• Latest
  • Trending
The language of law should be of common people

कानून की भाषा आम लोगों की हो

October 1, 2023
Gwalior-Fort-in-Madhya-Pradesh

ग्वालियर में ₹5,500 करोड़, 18 हज़ार नौकरियां

August 6, 2026
hospital

22 बच्चे, और वायरस का वाहक अब भी तय नहीं

August 6, 2026
farmer

किसान के हर ₹1 पर ₹2.30

August 6, 2026
यूपीआई और डीपीआई ने बदली भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था

अब सिर्फ़ 460 गांव बाकी हैं

August 6, 2026
solar

19 लाख घरों का बिजली बिल अब ज़ीरो

August 6, 2026
airport

अब खाड़ी नहीं, अमेरिका से आता है ज़्यादा पैसा

August 5, 2026
वैश्विक संकट के बीच भी नहीं थमेगी भारत की रफ्तार

यूपी में जीएसटी 15% बढ़ा

August 5, 2026
boxing

ग्लासगो में 39 पदक, सात गोल्ड सिर्फ़ बॉक्सिंग से

August 5, 2026
solar

बारह लाख घरों ने बिजली बेचकर कमाए

August 5, 2026
पीएम-किसान अब 2031 तक चलेगी

पीएम-किसान अब 2031 तक

August 5, 2026
आरबीआई

कल सुबह 10 बजे आरबीआई का फ़ैसला आएगा। आपकी होम लोन ईएमआई पर इसका क्या असर होगा — और असली बात रेट में नहीं, भाषा में है

August 4, 2026
election center

तीन राज्य, तीन सीटें, तीन अलग नतीजे: बांकीपुर, दतिया और मांजलपुर ने एक ही दिन तीन अलग कहानियां सुनाईं

August 4, 2026
Friday, August 7, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

कानून की भाषा आम लोगों की हो

इंटरनेशनल लॉयर्स कॉन्फ्रेंस वसुधैव कुटुम्बकम की भावना का प्रतिबिंब : मोदी

by ब्लिट्ज़ इंडिया
October 1, 2023
in लीगल
0
The language of law should be of common people
दीप्सी द्विवेदी

नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी ने विज्ञान भवन में इंटरनेशनल लॉयर्स कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया। इस मौके पर सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में पीएम ने देश की लीगल फ्रैटरनिटी की तारीफ की।

इस मौके पर पीएम ने कानूनी कार्रवाई को लोगों के लिए आसान बनाने के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि आम लोगों को कानून अपना लगना चाहिए, उसकी भाषा भी अपनी लगनी चाहिए। देश की पंचायतों में इसका उदाहरण मिलता है। सरकार नए कानून बहुत ज्यादा सरल बनाने की दिशा में काम कर रही है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया की तरफ से आयोजित इस सम्मेलन का विषय ‘न्याय वितरण प्रणाली में उभरती चुनौतियां’ था। इस कॉन्फ्रेंस में लॉर्ड चांसलर ऑफ इंग्लैंड और बार एसोसिएशन ऑफ इंग्लैंड के डेलीगेट्स भी शामिल हुए ।

YOU MAY ALSO LIKE

‘सब्जी की तरह खाली बर्थ बेचते हैं टीटीई’

सुप्रीम कोर्ट ने पॉक्सो के दुरुपयोग पर जताई चिंता

मेरे लिए सुखद अनुभव
पीएम मोदी ने कहा, ये कॉन्फ्रेंस वसुधैव कुटुम्बकम ्की भारत की भावना का प्रतिबिंब है। दुनियाभर की लीगल फ्रैटरनिटी के दिग्गज लोगों से मिलना मेरे लिए सुखद अनुभव है। इस कॉन्फ्रेंस में यूके, कॉमनवेल्थ और अफ्रीकी देशों के डेलिगेट्स ने भी हिस्सा लिया। एक तरह से इंटरनेशनल लॉयर कॉन्फ्रेंस वसुधैव कुटुम्बकम ् की भारत की भावना का प्रतिबिंब बन गई है।

-पंचायतों से विवादों का निपटारा इसका बड़ा उदाहरण

देश निर्माण में लीगल फ्रैटरनिटी की बड़ी भूमिका
पीएम बोले, किसी भी देश के निर्माण में वहां की लीगल फ्रैटरनिटी की बहुत बड़ी भूमिका होती है। भारत में वर्षों से ज्यूडिशियरी और बार देश की न्याय व्यवस्था के संरक्षक रहे हैं। कुछ ही साल पहले भारत ने अपनी आजादी के 75 साल पूरे किए हैं। आजादी की लड़ाई में लीगल प्रोफेशनल्स की बहुत बड़ी भूमिका रही है। कई वकीलों ने चलती हुई वकालत छोड़कर राष्ट्रीय आंदोलन का रास्ता चुना था। हमारे पूज्य राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, हमारे संविधान के मुख्य शिल्पी डॉ. बाबा साहब अंबेडकर, देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल, आजादी के समय देश को दिशा देने वाले लोकमान्य तिलक व वीर सावरकर, ऐसे अनेक महान व्यक्तित्व वकील ही थे।

भारत कई ऐतिहासिक निर्णयों का साक्षी बना
पीएम ने कहा कि आज ये कॉन्फ्रेंस ऐसे समय में हो रही है, जब भारत कई ऐतिहासिक निर्णयों का साक्षी बना है। भारत की संसद ने लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून पास किया है। नारी शक्ति वंदन कानून भारत में महिलाओं के नेतृत्व में विकास को नई दिशा और नई ऊर्जा देगा। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए भारत को एक मजबूत और निष्पक्ष स्वतंत्र न्याय व्यवस्था का आधार चाहिए। मुझे विश्वास है इंटरनेशनल लॉयर्स कॉन्फ्रेंस भारत के लिए बहुत ही उपयोगी साबित होगा।

खतरा ग्लोबल हो, तो लड़ने का तरीका भी ग्लोबल
पीएम बोले कि 21वीं सदी में आज हम एक ऐसी दुनिया में रह रहे हैं, जो गहराई से कनेक्टेड हैं। हर लीगल माइंड या इंस्टीटयूशन अपने ज्यूरिस्डिक्शन को लेकर बहुत सचेत है लेकिन ऐसी कई ताकतें हैं, जिनके खिलाफ हम लड़ रहे हैं। ये ताकतें बॉर्डर्स या ज्यूरिस्डिक्शन की परवाह नहीं करती हैं और जब खतरे ग्लोबल हैं, तो उनसे निपटने का तरीका भी ग्लोबल होना चाहिए।

कानूनों की ड्राफ्टिंग सरल भाषा में करनी जरूरी
उन्होंने कहा कि जस्टिस डिलिवरी का एक और बड़ा पहलू है, जिसकी चर्चा बहुत कम हो पाती है। वो है भाषा और कानून की सरलता। आम लोगों को कानून भी अपना लगना चाहिए। कानून किस भाषा में लिखे जा रहे हैं, अदालती कार्रवाई किस भाषा में हो रही है, ये बात न्याय सुनिश्चित कराने में बहुत बड़ी भूमिका अदा कर रही है। पहले किसी भी कानून की ड्राफ्टिंग बहुत कॉम्प्लेक्स होती थी। सरकार के तौर पर अब हम भारत में नए कानून बहुत ज्यादा सरल बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। जितना ज्यादा हो सके इसे भारतीय भाषाओं में लाने का प्रयास कर रहे हैं। डेटा प्रोटेक्शन लॉ से हमने इसकी शुरुआत की है।

अदालती फैसले भी आम लोगों की भाषा में हों
पीएम बोले, सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ जी ने भी कहा था कि हम आम लोगों की भाषा में अदालती फैसले उपलब्ध कराएंगे। देखिए इतने से काम में 75 साल लग गए और इसके लिए भी मुझे आना पड़ा। मैं भारत के सुप्रीम कोर्ट को इसके लिए बधाई दूंगा। उसने अपने फैसलों को कई स्थानीय भाषाओं में भी अनुवाद करने की व्यवस्था की है। इससे भारत के सामान्य व्यक्ति को बहुत मदद मिलेगी।

ग्लोबल फ्रेमवर्क तैयार करने की जरूरत
पीएम ने कहा कि साइबर टेररिज्म, मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अनेक मुद्दों पर सहयोग के लिए ग्लोबल फ्रेमवर्क तैयार करना सिर्फ किसी शासन या सरकार से जुड़ा मामला नहीं है। इसके लिए अलग-अलग देशों के लीगल फ्रेमवर्क को भी एक-दूसरे से जुड़ना होगा। जैसे हम एयर ट्रैफिक कंट्रोल के लिए मिलकर काम करते हैं। कोई ये नहीं कहता कि तुम्हारा कानून तुम्हारे यहां, हमारा कानून हमारे यहां, फिर तो किसी का जहाज उतरेगा ही नहीं। हर कोई कॉमन रूल्स और रेगुलेशन का पालन करता है। उसी तरह हमें अलग-अलग डोमेन में ग्लोबल फ्रेमवर्क तैयार करना ही पड़ेगा। इंटरनेशनल लॉयर्स कॉन्फ्रेंस में इस दिशा में मंथन करना चाहिए। दुनिया को नई दिशा देनी चाहिए। पंचायतों के जरिए विवादों का निपटारा भारत के संस्कार में है। पीएम ने कहा कि एक अहम विषय आल्टरनेट डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन (एडीआर) का है यानी अदालतों के बाहर विवादों का निपटारा करना। दुनियाभर में इसका चलन तेजी से बढ़ा है।

भारत में सदियों से पंचायत के जरिए विवादों के निपटारे की व्यवस्था रही है। लोक अदालत की व्यवस्था भी विवादों को हल करने की दिशा में बड़ा माध्यम है। जब मैं गुजरात में था, तो एवरेज एक मामला निपटाने में न्याय होने तक सिर्फ 35 पैसे का खर्च होता था। यानी ये व्यवस्था हमारे देश में होती थी। पिछले 6 साल में 7 लाख केसों को लोक अदालतों में सुलझाया गया है। इस इनफॉर्मल व्यवस्था को एक व्यवस्थित रूप देने के लिए भी भारत सरकार ने मीडिएशन एक्ट बनाया है।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation