• Latest
  • Trending
Supreme Court's decision on cash-for-vote issue a milestone

वोट के बदले नोट पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय मील का पत्थर

March 15, 2024
ब्रिक्स से किसान आईडी तक भारत की 10 बड़ी खबरें

ब्रिक्स देशों की संसदें दिल्ली में जुटीं

October 27, 2026
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन

ब्रिक्स मंच से निर्यात और जीएसटी तक भारत की बड़ी खबरें

October 26, 2026
daily-news

साप्ताहिक समाचार डायरी 19–25 अक्टूबर 2026: 11 करोड़ फार्मर आईडी | Blitz India Media

October 25, 2026
सरिया एक साल में 26% महंगा, बढ़ी निर्माण लागत

सरिया एक साल में 26 फीसदी महंगा

October 24, 2026
नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क, 22 अक्टूबर 2026 · फोटो : पीएमओ इंडिया

पोलैंड से दोगुना कारोबार, 12.7 अरब डॉलर

October 23, 2026
village

गांव-घर तक पहुंचा विकास, रफ्तार की परीक्षा बाकी

October 22, 2026
गन्ने की तौल और रिकवरी जांचेगी समिति

गन्ने की तौल और रिकवरी जांचेगी नई समिति

October 21, 2026
export

यूएई से कारोबार 100 अरब डॉलर पार

October 20, 2026
न्यूजीलैंड एफटीए

न्यूजीलैंड में भारतीय सामान पर अब ड्यूटी नहीं

October 20, 2026
ब्लूमबर्ग ने देखा सशक्त भारत का ट्रेलर

ब्लूमबर्ग ने देखा सशक्त भारत का ट्रेलर

October 19, 2026
वैश्विक 'सैटकॉम' जंग के दबाव में नहीं आएंगे

भारत बनेगा डिजिटल महाशक्ति

October 19, 2026
तंबाकू- सिगरेट छोड़ो अभियान

तंबाकू- सिगरेट छोड़ो अभियान

October 19, 2026
Tuesday, October 27, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

वोट के बदले नोट पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय मील का पत्थर

by ब्लिट्ज़ इंडिया
March 15, 2024
in दृष्टिकोण
0
Supreme Court's decision on cash-for-vote issue a milestone
दीपक द्विवेदी

देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चन्द्रचूड़ की अध्यक्षता में गठित सात न्यायमूर्तियों की संविधान पीठ ने गत 4 मार्च को सर्वसम्मति से ऐतिहासिक निर्णय देकर सांसदों व विधायकों के सदन के भीतर वोट देने या वक्तव्य देने के लिए रिश्वत लेने को अपराध की श्रेणी में डाल कर साफ कर दिया है कि इन सदस्यों को मिले विशेषाधिकारों का अर्थ जुर्म से उनका बरी होना नहीं है। वोट के बदले नोट मामले पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी खुशी जताई और लिखा है कि स्वागतम! माननीय सुप्रीम कोर्ट का एक अच्छा फैसला, जो बेदाग राजनीति और व्यवस्था में लोगों के विश्वास को पुख्ता करेगा।

अपने इस ऐतिहासिक फैसले से शीर्ष अदालत ने 1998 के नरसिम्हा राव बनाम सीबीआई मामले में दिए गए निर्णय को पलट दिया है। पांच जजों की पीठ ने तब यह फैसला 3-2 के बहुमत से दिया था। जब यह फैसला आया था तब उसने देश के प्रबुद्ध वर्ग में गहरी निराशा भर दी थी। 1998 के फैसले के अनुसार विधायिका का कोई भी सदस्य अपना वोट बेच सकता था। इसे उसका विशेषाधिकार माना गया था जिसके लिए उस पर कोई मुकदमा भी नहीं चलाया जा सकता था। विधायिका के सदस्य पर मुकदमा तभी चल सकता था जब वह पैसे लेकर पैसे देने वाले की इच्छा के अनुसार मत न दे। स्पष्ट है कि यह एक विचित्र लॉजिक था जिसके हिसाब से रिश्वत लेना तो माफ था पर रिश्वत लेकर बेईमानी करने को अक्षम्य अपराध माना गया था।
1998 के फैसले के बाद देश के संसदीय लोकतंत्र में रिश्वत का खेल अत्यधिक बढ़ गया था। हालात ऐसे हो जाते हैं कि किसी भी राज्य में चुनाव होने के बाद राजनीतिक दल अपने चुने गए सदस्यों को बसों अथवा विमानों में भर कर किसी दूरदराज के रिसॉर्ट या होटल या अन्य राज्य में ले जाते हैं ताकि कोई विरोधी दल उनको खरीद न सके। इसका ताजा उदाहरण अभी हाल ही में झारखंड में देखने को मिला था।

YOU MAY ALSO LIKE

लोकतंत्र, विरोध का अधिकार और जंतर-मंतर

देश के 1,000 आईटीआई का होगा कायाकल्प

पार्टियों को यह डर सताता है कि उनके सांसद या विधायक खरीद लिए जाएंगे और बिकने के बाद वे अपना वोट किसी दूसरी पार्टी के हित में डाल देंगे और उनकी पार्टी उनका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती। उम्मीद की जा सकती है कि अब सुप्रीम कोर्ट का नया फैसला देश में एक नई त्रुटिविहीन व्यवस्था का निर्माण करने में मदद करेगा। अभी तक संविधान के अनुच्छेद 105 (2) और 194 (2) के तहत सांसदों और विधायकों को सदन के अंदर कुछ कहने और करने का विशेषाधिकार मिला हुआ था। परिणामस्वरूप कई बार माननीयों द्वारा भाषण के दौरान ऐसे-ऐसे अभद्र आरोप लगाए जाते रहे हैं कि अगर वे सदन के बाहर लगाए जाएं तो सांसद या विधायक पर आपराधिक अवमानना या कानून के तहत अन्य अपराधों के लिए मुकदमा तक दर्ज हो जाए।

वोट के बदले नोट मामले पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले पर पीएम नरेंद्र मोदी ने भी खुशी जताई और लिखा है कि स्वागतम ! माननीय सुप्रीम कोर्ट का एक अच्छा फैसला, जो बेदाग राजनीति और व्यवस्था में लोगों के विश्वास को पुख्ता करेगा।

अब कम से कम यह बात तो स्पष्ट हो चुकी है कि रिश्वत लेकर वोट देना विधानमंडल के सदस्यों के विशेषाधिकार में नहीं आता और न ही रिश्वत लेकर सवाल पूछना अथवा विशेष प्रकार का भाषण देना संसदीय विशेषाधिकार है। ताजा फैसला आशा की किरण जगाता है कि अब भारतीय लोकतंत्र में अधिक शुचिता आएगी एवं जिम्मेदारी बढ़ेगी। जनप्रतिनिधि देश की जनता को धोखा नहीं दे पाएंगे और अपने दल की इच्छानुसार ही अपना मत डालेंगे।
दरअसल इन विशेषाधिकारों को विदेश की तर्ज पर भारत के संविधान में स्थान दिया गया। इस व्यवस्था में भारतीय संस्कृति की मूल भावना के रंच मात्र भी दर्शन नहीं होते । भारतीय संस्कृति और राज दर्शन में राजा को कानून से ऊपर स्थान नहीं है। इंग्लैंड में यह नियम है कि ‘किंग कैन डू नो रॉन्ग’ अर्थात ‘राजा कोई गलती कर ही नहीं सकता।’ इसके विपरीत भारत में राजा भी धर्म के अधीन होता है और न्याय के लिए उसको भी दंड दिया जा सकता है। इसीलिए भारतीय संस्कृति को ध्यान में रखते हुए अब हमारी संसद को भी संसदीय विशेषाधिकारों से संबद्ध अनुच्छेदों को समाप्त कर देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सदन में सदस्य भाषण देते समय सभी मर्यादाओं का ध्यान रखें। यह कहना शायद गलत नहीं होगा कि इस प्रकार के विशेषाधिकार किसी भी व्यक्ति को न दिए जाएं जिनसे कहीं न कहीं संविधान की उस मूल भावना का भी उल्लंघन होता है जिसमें देश के सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए जाने की बात कही गई है। जिस प्रकार सामान्य व्यक्ति पर कानून लागू होता है, वैसे ही विधायिका के सदस्यों पर भी कानून लागू होने चाहिए। इससे उनकी कार्यक्षमता पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि विधायिका के सदस्यों का यह काम नहीं है कि वे सदन में झूठ बोलें, गलत तथ्य पेश करें, दुर्भावनापूर्ण भाषण दें या दूसरों की मर्यादा को तार-तार करें। हमें यह आशा करनी चाहिए कि अगली संसद इस फैसले के बाद सभी विशेषाधिकारों को समाप्त कर देगी।

न्यायमूर्तियों के मुताबिक विशेषाधिकारों का सृजन सदनों की कार्यवाहियों को निरापद ढंग से चलाने के लिए किया गया था न कि आपराधिक गतिविधियों की अनदेखी करने के लिए। भ्रष्टाचार या रिश्वत एक अपराध है जिसे सदन के भीतर या बाहर एक दृष्टि से देखना होगा। सर्वोच्च न्यायालय ने साफ किया है कि लोकतन्त्र को स्वस्थ, गतिशील व जवाबदेह बनाए रखने के लिए यह व्यवस्था करना जरूरी होगा। न्यायमूर्ति चन्द्रचूड़ की पीठ ने इसी मुद्दे पर छाई धुंध को छांटने का काम करते हुए अब जो ताजा निर्णय दिया, वह हमारी विधायिका के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। सर्वोच्च अदालत ने तो अपना काम कर दिया है। अब बारी है संसद की कि वह कानून में जरूरी बदलाव करे और विधायिका सदस्यों को मिले विशेषाधिकारों को ही खत्म कर दे ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शुचिता का वास हो सके।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation