ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि बीमा कंपनी से अपने ग्राहक के साथ अच्छी भावना के साथ और ईमानदारी से काम करने की अपेक्षा की जाती है। उसे केवल अपने लाभ के बारे में ही नहीं सोचना चाहिए। जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस संजय कुमार ने एक बीमा कंपनी की अर्जी पर फैसला सुनाते हुए कहा कि यह बीमा कानून का मूल सिद्धांत है कि अनुबंध करने वाले पक्षों के प्रति अच्छी भावना हो।
शीर्ष अदालत ने कहा कि यह बीमित और बीमा करने वाली कंपनी का कर्तव्य है कि वह अपनी जानकारी के मुताबिक सभी तथ्यों को बताए। पीठ ने कहा, ‘विशेष परिस्थितियों में, संभावित नुकसान की बीमाधारक को क्षतिपूर्ति करने की एक बीमा कंपनी से अपेक्षा की जाती है। साथ ही, वह (बीमा कंपनी) अपने वादे को सही भावना के साथ और निष्पक्ष तरीके से पूरा करे, न कि केवल अपना स्वयं का मुनाफा देखे और अपने हितों की पूर्ति करे।
राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के एक आदेश के खिलाफ इस्नार एक्वा फार्म्स की याचिका पर आदेश जारी करते हुए न्यायालय ने यह टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि बीमा कंपनी, बीमित कंपनी को 45.18 लाख रुपये की राशि छह सप्ताह के भीतर शिकायत की तारीख से 10 प्रतिशत के साधारण ब्याज के साथ अदा करे।
‘व्हाइट स्पॉट डिजीज’ से हुआ था नुकसान
बीमित कंपनी ने बीमा कंपनी से 1.20 करोड़ रुपये का बीमा कराने के बाद विशाखापत्तनम जिले में 100 एकड़ क्षेत्र में झींगा की खेती की थी। आंध्र प्रदेश के पूर्वी तट पर ‘व्हाइट स्पॉट डिजीज’ नामक जीवाणु रोग के बड़े प्रकोप के कारण कंपनी को इसमें बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ा था।