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शिंदे बने रहेंगे सीएम, दिल्ली में एलजी के पास जमीन, पुलिस व कानून व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट के फैसले

by ब्लिट्ज़ इंडिया
May 12, 2023
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महाराष्ट्र

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में एक साल से चल रही राजनीतिक उठापठक आज थम गई। एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने फ्लोर टेस्ट का सामना नहीं किया। उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया था। ऐसे में कोर्ट इस्तीफे को रद्द तो नहीं कर सकता। हम पुरानी सरकार को बहाल नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल के फ्लोर टेस्ट को गलत भी ठहराया। अब स्पीकर को शिवसेना के 16 बागी विधायकों पर जल्द फैसला करना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह शिंदे और 15 अन्य विधायकों को पिछले साल जून में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत करने के लिए अयोग्य नहीं ठहरा सकता। यह अधिकार स्पीकर के पास तब तक रहेगा, जब तक कि सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच इस पर फैसला नहीं सुना देती।
शीर्ष अदालत ने विधायकों को अयोग्य करार देने के संबंध में विधानसभा अध्यक्ष के अधिकार से जुड़े पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के 2016 के नबाम रेबिया फैसले को सात न्यायाधीशों की बड़ी पीठ को भेज दिया है। चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि नबाम रेबिया मामले में उठाए गए सवाल को बड़ी बेंच में भेजना चाहिए। क्योंकि उसमें और अधिक स्पष्टता की आवश्यकता है।

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फ्लोर टेस्ट पर कोर्ट की व्यवस्था
राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने यह निष्कर्ष निकालने में गलती की थी कि ठाकरे ने विधायकों के बहुमत का समर्थन खो दिया था। राज्यपाल के पास फ्लोर टेस्ट बुलाने के लिए कोई पुख्ता आधार नहीं था। इस मामले में राज्यपाल के विवेक का प्रयोग कानून के अनुसार नहीं था। सदन के स्पीकर का शिंदे गुट की ओर से प्रस्तावित स्पीकर गोगावले को चीफ व्हिप नियुक्त करना अवैध फैसला था। स्पीकर को सिर्फ राजनीतिक दल की ओर से नियुक्त व्हिप को ही मान्यता देनी चाहिए थी।

उद्धव ठाकरे के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि राज्यपाल का निर्णय गलत था। उन्होंने ऐसे तथ्य देखे जो वहां थे ही नहीं। आज सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि स्पीकर को तुरंत फैसला लेना चाहिए था। जब व्हिप का उल्लंघन हुआ तो राज्यपाल को खुद ही बागी विधायकों को डिस्क्वॉलिफाई करना चाहिए था। व्हिप किसी पॉलिटिकल पार्टी का होता है, सरकार का नहीं। ये सही बात है कि मुख्यमंत्री ने फ्लोर टेस्ट के पहले इस्तीफा न दिया होता तो सरकार बच सकती थी, लेकिन इससे राज्यपाल की भूमिका बड़ी हो जाती है।

शिंदे ने 30 जून को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी
महाराष्ट्र में शिवसेना विधायकों की बगावत के बाद महाराष्ट्र विकास अघाड़ी गठबंधन सरकार पिछले साल जून में गिर गई थी। इसके बाद 30 जून को शिंदे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके खिलाफ उद्धव ठाकरे सुप्रीम कोर्ट गए। मामला पांच जजों की कॉन्स्टिट्यूशनल बेंच को ट्रांसफर हुआ। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एमआर शाह, जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने फैसला सुनाया।

दिल्ली

नई दिल्ली। केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच राष्ट्रीय राजधानी में प्रशासनिक सेवाओं पर नियंत्रण को लेकर लंबे समय चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने अपना सर्वसम्मत फैसला सुना दिया है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुआई वाली संविधान पीठ ने यह व्यवस्था दी है कि जमीन, पुलिस और कानून-व्यवस्था को छोड़कर राष्ट्रीय राजधानी की बाकी प्रशासनिक सेवाओं पर दिल्ली सरकार का ही नियंत्रण है। उपराज्यपाल इन तीन मुद्दों को छोड़कर दिल्ली सरकार के बाकी फैसले मानने के लिए बाध्य हैं। संविधान पीठ ने 2019 के जस्टिस अशोक भूषण के फैसले से असहमति जताई। 2019 के फैसले में कहा गया था कि तमाम सेवाएं दिल्ली सरकार के दायरे से पूरी तरह बाहर हैं।

सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था के मुताबिक महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों पर भी दिल्ली सरकार का नियंत्रण रहेगा, भले ही वे उसकी तरफ से नियुक्त न किए गए हों। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार को अधिकारियों को नियंत्रित करने का अधिकार नहीं दिया गया तो जवाबदेही तय करने के सिद्धांत का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर अधिकारियों ने मंत्रियों को रिपोर्ट करना बंद कर दिया या उन्होंने मंत्रियों के निर्देश नहीं माने तो सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांत पर असर पड़ेगा। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा तय प्रशासनिक भूमिका के तहत आने वाले अधिकारों का उपराज्यपाल इस्तेमाल कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ यह भी जोड़ा कि इसके ये मायने नहीं हैं कि उपराज्यपाल का पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र पर प्रशासनिक नियंत्रण है। अगर पूरा प्रशासन उन्हें दे दिया गया तो दिल्ली के अंदर पृथक निर्वाचित व्यवस्था के कोई मायने नहीं रह जाएंगे।

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