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No need to go to court in check bounce case

चेक बाउंस केस में नहीं काटने पड़ेंगे कोर्ट-कचहरी के चक्कर

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चेक बाउंस केस में नहीं काटने पड़ेंगे कोर्ट-कचहरी के चक्कर

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 26, 2024
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No need to go to court in check bounce case

नई दिल्ली। क्या अभी आपका कोई चेक बाउंस हुआ है या आपको किसी ने चेक दिया और उसका पेमेंट क्लियर ही नहीं हो सका। अगर ऐसा है तो आपको पता होगा कि चेक बाउंस के मामलों में कोर्ट-कचहरी का कितना लंबा चक्क र पड़ जाता है। ऐसे में देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने एक शानदार सलाह दी है जिसकी वजह से चेक बाउंस के मामले में आपको कोर्ट-कचहरी के झंझट से मुक्ति मिल सकती है। उसने ये सलाह आम लोगों के साथ-साथ प्रशासन और लोअर कोर्टों के लिए भी दी है।

बड़ी संख्या में मामले लंबित
दरअसल देश की अदालतों में चेक बाउंस से जुड़े मामले बड़ी संख्या में लंबित पड़े हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता व्यक्त की है, क्योंकि इससे देश के न्यायिक तंत्र पर बोझ को बढ़ रहा है। वहीं ऐसे ही एक केस की सुनवाई के दौरान जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस ए. अमानुल्लाह की पीठ ने पी. कुमारसामी नाम के एक व्यक्ति की सजा को रद कर दिया।

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पीठ की आब्जर्वेशन
पीठ ने अपनी आब्जर्वेशन में पाया कि दोनों पक्षों के बीच चेक बाउंस के मामले में समझौता हो चुका है। शिकायत करने वाले व्यक्ति को दूसरे पक्ष की ओर से 5.25 लाख रुपए का भुगतान किया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी दौरान कहा, चेक बाउंस होने से जुड़े मामले बड़ी संख्या में अदालतों में लंबित हैं। ये देश की न्यायिक व्यवस्था के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। इसे ध्यान में रखते हुए इनका निपटान करने के तरीके को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि सजा देने के तरीके पर फोकस करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतों को कानून के दायरे में रहते हुए निपटान को बढ़ावा देने के लिए काम करना चाहिए, अगर दोनों पक्ष ऐसा करने के इच्छुक हैं।

सभी तरह के विवाद में कारगर सलाह
सुप्रीम कोर्ट की ये सलाह सिर्फ चेक बाउंस के केस में ही नहीं बल्कि कानूनी तौर पर लिखे गए सभी तरह के वचन पत्रों में विवाद की स्थिति पैदा होने पर मामलों के निपटारे में काम आ सकती है। पीठ ने 11 जुलाई को जो आदेश पारित किया, उसमें ये भी कहा कि समझौता योग्य अपराध ऐसे होते हैं, जिनमें प्रतिद्वंद्वी पक्षों के बीच समझौता हो सकता है। हमें यह याद रखना होगा कि चेक का बाउंस होना एक रेगुलेटरी क्राइम है जिसे केवल सार्वजनिक हित को देखते हुए अपराध की श्रेणी में लाया गया है ताकि संबंधित नियमों की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।

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