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कंबोडिया में फंसे 5000 भारतीयों को छुड़ाएगी सरकार

by ब्लिट्ज़ इंडिया
April 5, 2024
in अन्तरराष्ट्रीय
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Government will rescue 5000 Indians stranded in Cambodia
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। कंबोडिया में 5000 से अधिक भारतीयों को बंधक बनाकर रखा गया है। उनसे गलत-गलत काम कराए जा रहे हैं। भारत सरकार उन्हें जल्द रेस्क्यू करने का प्लान बना रही है। दक्षिणपूर्व एशियाई देश में 5,000 से अधिक भारतीयों को जबरन रोककर उन्हें साइबर धोखाधड़ी करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हैरानी की बात ये है कि इन लोगों से किसी और के साथ नहीं बल्कि भारतीयों के साथ ही ठगी कराई जा रही है।

500 करोड़ रुपये की ठगी
सरकार का अनुमान है कि धोखेबाजों ने पिछले छह महीनों में भारत में लोगों से कथित तौर पर कम से कम 500 करोड़ रुपये की ठगी की है।

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रणनीति तैयार करने पर चर्चा
गृह मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय , भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) और अन्य सुरक्षा विशेषज्ञों के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में कंबोडिया में फंसे भारतीयों को बचाने के लिए रणनीति तैयार करने पर चर्चा हुई। बैठक का एजेंडा संगठित रैकेट पर चर्चा करना और वहां फंसे लोगों को वापस लाना था। डेटा से पता चलता है कि पिछले छह महीनों में (कंबोडिया से होने वाली साइबर धोखाधड़ी से) भारत में 500 करोड़ रुपये की ठगी हुई है।

केंद्रीय एजेंसियों की जांच
अब तक पता चला है कि एजेंटों ने लोगों को फंसाया और उन्हें डेटा एंट्री की नौकरियों के बहाने कंबोडिया भेजा। बाद में उन्हें साइबर धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए मजबूर किया गया। ज्यादातर दक्षिण भारतीय हैं। कंबोडिया में फंसे लोगों के जरिए भारत में अन्य लोगों को ठगा गया। अब तक बेंगलुरु के तीन लोगों को वापस लाया जा चुका है।

16 लोगों के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर
यह मामला तब सामने आया जब ओडिशा में राउरकेला पुलिस ने पिछले साल 30 दिसंबर को एक साइबर अपराध सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया जिसमें आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया जो कथित तौर पर लोगों को कंबोडिया ले जाने में शामिल थे।

70 लाख रुपये की ठगी
राउरकेला पुलिस के ऑपरेशन का विवरण साझा करते हुए एक अधिकारी ने कहा कि मामला केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी की शिकायत पर आधारित था, जिनसे लगभग 70 लाख रुपये की ठगी की गई थी। अधिकारी ने कहा, हमने देश के विभिन्न हिस्सों से आठ लोगों को गिरफ्तार किया है और हमारे पास घोटाले में शामिल कई लोगों के खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत हैं। हमने 16 लोगों के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी किया, जिसके बाद इस सप्ताह इमिग्रेशन ब्यूरो ने हैदराबाद हवाई अड्डे पर दो व्यक्तियों, हरीश कुरापति और नागा वेंकट सौजन्य कुरापति को हिरासत में लिया। वे कंबोडिया से लौट रहे थे।

तीन लोगों को विदेश मंत्रालय की मदद से बचाया
कर्नाटक सरकार के अनिवासी भारतीय फोरम (एनआरआईएफके) के उपाध्यक्ष डॉ. आरती कृष्णा ने बताया कि कंबोडिया में फंसे राज्य के तीन लोगों को विदेश मंत्रालय की मदद से बचाया गया है। उन्होंने कहा कि “उनके परिवार के सदस्यों ने हमारे संगठन से संपर्क किया और उन्होंने हमें बताया कि वे डेटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में काम करने गए थे, लेकिन उन्हें साइबर घोटाले करने के लिए मजबूर किया गया।

– गृह मंत्रालय ने अन्य विभागों के साथ संयुक्त बैठक की
– डेटा एंट्री की नौकरी के बहाने भारतीयों को फंसाया
– फंसे लोगों के जरिए भारत में अन्य लोगों को ठगा गया

क्षेत्र के 200 से अधिक लोग फंसे
हमारे संगठन ने उन्हें वापस लाने के लिए विदेश मंत्रालय और कंबोडिया में भारतीय दूतावास के साथ समन्वय किया। उन्होंने कहा कि बचाए गए तीन लोगों ने उन्हें बताया कि क्षेत्र के लगभग 200 से अधिक लोग कंबोडिया में फंसे हुए हैं।

चीन की टीम, मलेशियाई एजेंट
बचाए गए लोगों में से एक स्टीफन ने बताया, “मंगलुरु में एक एजेंट ने मुझे कंबोडिया में डेटा एंट्री की नौकरी की पेशकश की। मेरे पास आईटीआई की डिग्री है और मैंने कोविड के दौरान कुछ कंप्यूटर कोर्स किए। हम तीन लोग थे जिनमें आंध्र का बाबू राव नामक एक व्यक्ति भी शामिल था।

टीम चीनी थी लेकिन एक मलेशियाई था
इमिग्रेशन एजेंट ने बताया किया कि हम पर्यटक वीजा पर जा रहे थे, जिससे मेरा संदेह बढ़ गया। कंबोडिया में हमें एक ऑफिस स्पेस पर ले जाया गया, जहां उन्होंने एक इंटरव्यू लिया और हम दोनों ने इसे पास कर लिया।

उन्होंने हमारी टाइपिंग स्पीड आदि का टेस्ट किया। बाद में हमें पता चला कि हमारा काम फेसबुक पर प्रोफाइल ढूंढ़ना और ऐसे लोगों की पहचान करना शामिल है, जिनके साथ धोखाधड़ी की जा सकती है। टीम चीनी थी लेकिन एक मलेशियाई था जिसने हमें उनके निर्देशों का अंग्रेजी में अनुवाद किया।
स्टीफन ने कहा, हमें विभिन्न प्लेटफार्मों से ली गई महिलाओं की तस्वीरों के साथ नकली सोशल मीडिया अकाउंट बनाना था। लेकिन हमें बताया गया कि इन तस्वीरों को चुनते समय सावधानी बरतें। इसलिए एक दक्षिण भारतीय लड़की की प्रोफाइल का इस्तेमाल उत्तर में किसी को फंसाने के लिए किया जाता था ताकि इससे कोई संदेह न हो। हमारे पास टारगेट थे और अगर हम उन्हें पूरा नहीं कर पाते, तो वे हमें खाना नहीं देते थे या हमें अपने कमरे में नहीं आने देते थे।

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