ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।जून 2026 भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का अब तक का सबसे बड़ा महीना रहा — 3,06,220 गाड़ियों की खुदरा बिक्री, जो जून 2025 की 1,88,773 यूनिट से 62.7 फ़ीसदी ज़्यादा है। पर इससे भी बड़ी बात हिस्सेदारी की है: पहली बार देश में बिकने वाली कुल गाड़ियों में इलेक्ट्रिक वाहनों का हिस्सा 12 फ़ीसदी से ऊपर पहुंच गया। हर आठ में एक गाड़ी — यही वह मोड़ होता है जहां कोई तकनीक शौक़ीनों की पसंद से निकलकर शोरूम का आम विकल्प बन जाती है।
बढ़त किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं है। इस साल जनवरी से जून के बीच इलेक्ट्रिक कार और एसयूवी की खुदरा बिक्री 1,48,032 यूनिट रही, जो पिछले साल से 79 फ़ीसदी ज़्यादा है और पूरे साल में तीन लाख यूनिट पार करती दिख रही है। व्यावसायिक वाहनों में रफ़्तार और तेज़ रही — जून में 3,214 इलेक्ट्रिक कमर्शियल गाड़ियां बिकीं, जो मई से 33.9 फ़ीसदी और पिछले साल जून से 163.7 फ़ीसदी ज़्यादा है। जुलाई में भी अब तक कुल वाहन बिक्री क़रीब 28.6 फ़ीसदी बढ़ी है।
12 फ़ीसदी के पार: जून में 3,06,220 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री के साथ इनकी हिस्सेदारी पहली बार 12% से ऊपर गई। इलेक्ट्रिक व्यावसायिक वाहन 3,214 यूनिट के रिकॉर्ड पर।
यह दलील सब्सिडी से ज़्यादा असरदार तेल ने दी। जब बैरल सौ डॉलर पर पहुंचता है, तो इलेक्ट्रिक स्कूटर शौक़ नहीं रह जाता — हिसाब बन जाता है।
एक नज़र में
• जून बिक्री: 3,06,220 इलेक्ट्रिक वाहन, 62.7% की सालाना बढ़त
• हिस्सेदारी: पहली बार कुल वाहन बिक्री का 12% से ऊपर
• कार और एसयूवी: जनवरी–जून में 1,48,032 यूनिट, 79% बढ़त
• व्यावसायिक वाहन: जून में रिकॉर्ड 3,214 यूनिट, सालाना 163.7% बढ़त
ईमानदारी से कहें तो इस तेज़ी का एक हिस्सा हालात की देन है, पसंद की नहीं। पश्चिम एशिया के तनाव से कच्चे तेल के दाम में उतार-चढ़ाव ने चलाने के ख़र्च का गणित रातोंरात बदल दिया, और ब्याज दरों में नरमी ने ख़रीद आसान की। जिस बाज़ार को पेट्रोल की महंगाई ने बढ़ाया है, उसे यह भी साबित करना होगा कि दाम शांत होने पर भी वह अपनी हिस्सेदारी बनाए रख सकता है। यही उसकी असली परीक्षा है।
आगे का काम इस मौक़े को पक्के ढांचे में बदलने का है। महानगरों के बाहर चार्जिंग स्टेशनों की कमी अब भी सबसे बड़ी रुकावट है, और उतनी ही अहम है उस बिजली व्यवस्था की मज़बूती जिससे ये चार्जर चलते हैं। बैटरी के लिए सेल और ज़रूरी खनिज अब भी बड़े पैमाने पर आयात होते हैं। और पुरानी इलेक्ट्रिक गाड़ी की क़ीमत तभी ठीक मिलेगी जब सर्विस और वारंटी का भरोसेमंद जाल बने। सबसे कठिन काम — ख़रीदार को मनाना — भारत कर चुका है। बाक़ी काम सड़क, वर्कशॉप और तारों का है।












