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18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत मंडपम में शुरू, भारत चौथी बार अध्यक्ष

इस बार समूह में ग्यारह सदस्य और दस साझेदार देश

by ब्लिट्ज़ इंडिया
September 12, 2026
in the blitz
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भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026

नई दिल्ली। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में स्थित भारत मंडपम आज देश की सबसे व्यस्त इमारत है। 12 सितंबर 2026 से दो दिन यहां 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन चल रहा है। मेज पर ग्यारह देश हैं, और उनके पास दुनिया की करीब आधी आबादी है।

आज दिन की शुरुआत सदस्य देशों की बंद बैठक से होगी। विषय है — समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद। इसके बाद नेता भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी देखेंगे, साथ में पौधा लगाएंगे, और रात को प्रधानमंत्री का भोज है।

सदस्य देश हैं — ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात। इनके पास दुनिया की 49.5 फीसदी आबादी, 40 फीसदी जीडीपी और 26 फीसदी कारोबार है।

ब्रिक्स के ग्यारह देश

इन तीन आंकड़ों में जो फर्क है, वही असली खबर है। ब्लिट्ज़ ने यह हिसाब यहीं निकाला। दुनिया के कारोबार में इस समूह का हिस्सा उसकी आबादी के हिस्से का आधा ही है। उत्पादन के हिस्से से यह 14 अंक नीचे है। जो समूह दुनिया का 40 फीसदी माल बनाता है, वह दुनिया का सिर्फ 26 फीसदी कारोबार करता है।

यही फर्क भरने के लिए इस साल की बैठकों में सीमा शुल्क सहयोग का करार, मानकों पर सहमति पत्र और ढुलाई श्रृंखला का ढांचा तय हुआ है। भारत 1 जनवरी 2026 को अध्यक्ष बना था। साल भर में 25 शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें हुईं।

भारत को इससे क्या मिला

यह साफ शब्दों में कहा जा सकता है। ग्यारह देशों के मानक संस्थानों का सहमति पत्र यह तय करता है कि अदीस अबाबा की बंदरगाह पर भारतीय दवा की खेप रुकेगी या निकल जाएगी। सीमा शुल्क का करार नौ दिन की निकासी को तीन दिन में बदल सकता है। निर्यात की कमाई इन्हीं छोटी चीजों पर टिकती है।

सम्मेलन 13 सितंबर को नई दिल्ली घोषणापत्र के साथ खत्म होगा।


ब्रिक्स बिजनेस फोरम में प्रधानमंत्री ने कारोबार की बात नाविकों की सुरक्षा से शुरू की

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 सितंबर 2026 की शाम भारत मंडपम में ब्रिक्स बिजनेस फोरम के नेताओं के सत्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि समुद्री रास्ते सुरक्षित रहने चाहिए और आपूर्ति के रास्ते खुले। नाविकों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।

यह कूटनीति की भाषा नहीं है। भारत का ज्यादातर कारोबार समुद्र से चलता है, और दुनिया के जहाजों पर काम करने वाले नाविकों में बड़ी संख्या भारतीयों की है। गोवा, केरल और महाराष्ट्र के घरों में हर महीने जो पैसा आता है, वह इसी पर टिका है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 से भारत ने करीब 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। उन्होंने तीन बातें कहीं — भारत में बनाइए, भारत के साथ नया कीजिए, और दुनिया के लिए बढ़ाइए।

ब्रिक्स बिजनेस फोरम में प्रधानमंत्री
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में प्रधानमंत्री

उन्होंने आंकड़े भी दिए। बीते दो दशक में दुनिया की जीडीपी करीब 2.5 गुना बढ़ी, और ब्रिक्स देशों की जीडीपी करीब 4.5 गुना। ब्लिट्ज़ ने इसका हिसाब निकाला — 4.5 बंटे 2.5 यानी 1.8; मतलब यह समूह दुनिया की रफ्तार से करीब पौने दो गुना तेज बढ़ा है।

एक बात साफ कर देना जरूरी है। प्रधानमंत्री ने आबादी का हिस्सा 50 फीसदी बताया, जबकि पत्र सूचना कार्यालय की अपनी विज्ञप्ति में यह 49.5 फीसदी है। दिशा वही है, पर ब्लिट्ज़ दोनों आंकड़े छाप रहा है।

प्रधानमंत्री ने छोटे कारोबारियों के लिए बनी तीन चीजों का नाम लिया — ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क, ब्रिक्स एमएसएमई पोर्टल और ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड। कोयंबटूर के पंप बनाने वाले के पास माल हमेशा से था। जकार्ता के खरीदार तक पहुंचने का रास्ता और कर्ज नहीं था।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उसी सत्र में कहा कि बीते पांच साल में दुनिया की 40 फीसदी से ज्यादा जीडीपी ब्रिक्स देशों ने बनाई है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने आपसी कारोबार में अपनी मुद्राओं का इस्तेमाल बढ़ाने की बात रखी।

ब्लिट्ज़ की सलाह — नौवहन महानिदेशालय सरल भाषा में एक टिप्पणी जारी करे। उसमें लिखा हो कि इस सम्मेलन की बात से भारतीय नाविकों के अनुबंध और बीमा पर क्या फर्क पड़ेगा। जिसकी बात हुई है, उसे पढ़ने लायक भी मिलना चाहिए।


हरित भारत मिशन की जांच में नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक ने जीपीएस, सैटेलाइट चित्र और भारतीय विज्ञान संस्थान की मदद ली।

नई दिल्ली। इस बार कागज पर भरोसा नहीं किया गया। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक ने राज्यों की भेजी हुई पौधारोपण की रिपोर्ट पढ़कर छोड़ नहीं दी। उसने मौके पर जाकर देखा।

हरित भारत मिशन पर रिपोर्ट संख्या 4 (2026) 12 अगस्त 2026 को संसद में रखी गई। रिपोर्ट में लिखा है कि जांच दल जीपीएस लेकर पौधारोपण की जमीन पर गया। गूगल अर्थ प्रो पर साइटों की केएमएल फाइलें देखी गईं। बेंगलुरु के भारतीय विज्ञान संस्थान से समय के साथ बदलाव का अध्ययन कराया गया। नौ राज्यों की जिन जगहों की जांच हुई, उनमें से करीब 70 फीसदी पर 2016-17 से 2019-20 के बीच कोई साफ बदलाव नहीं दिखा।

मिशन जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना के आठ बड़े मिशनों में से एक है। फरवरी 2014 में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने इसे मंजूरी दी थी। चार साल में 28 लाख हेक्टेयर पर पौधारोपण का लक्ष्य था, और खर्च का अंदाजा 13,000 करोड़ रुपये। इसमें से 10,600 करोड़ रुपये दूसरी योजनाओं से जुड़कर आने थे।

रिपोर्ट के मुताबिक वह जुड़ाव हुआ ही नहीं। दस साल में बजट से सिर्फ 1,149.14 करोड़ रुपये मिले, यानी मंजूर रकम का 47.88 फीसदी। ब्लिट्ज़ ने यह हिसाब दोबारा जोड़कर देखा — 1,149.14 बंटे 2,400, बराबर 47.88 फीसदी। लेखा जांच का जोड़ हूबहू मिल गया, और जोड़ की जांच का मिल जाना अपने आप में एक पक्की बात है।

28 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले मार्च 2025 तक 1.47 लाख हेक्टेयर पर काम हुआ। इस डेस्क के हिसाब से यह लक्ष्य का 5.28 फीसदी है। मिली हुई रकम को इसी जमीन से बांटें तो प्रति हेक्टेयर करीब 77,684 रुपये बैठते हैं। यह आंकड़ा रिपोर्ट में नहीं छपा है।

देश की तस्वीर मिशन से बेहतर है। रिपोर्ट बताती है कि वन और वृक्ष क्षेत्र 2021 की भारत वन स्थिति रिपोर्ट के 24.62 फीसदी से बढ़कर 2023 में 25.17 फीसदी हो गया। राष्ट्रीय वन नीति का लक्ष्य 33 फीसदी है, यानी 7.83 अंक और चढ़ना है।

दो राज्यों का नाम तारीफ के साथ लेना बनता है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ ही ऐसे राज्य रहे जिन्होंने 2015 से 2025 के बीच कार्बन सोखने का आकलन कराया। मिजोरम और उत्तराखंड ऐसे दो राज्य रहे जहां ग्राम सभा की सामाजिक जांच हुई, भले रुक-रुककर हुई।

रिपोर्ट की सिफारिशें काम की हैं। मंत्रालय दूसरी योजनाओं से जुड़ाव की पूरी बात दोबारा परखे। राष्ट्रीय संचालन परिषद और राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद की बैठकें तय समय पर हों । गांव से ऊपर की ओर बनने वाली योजना फिर से चले । सालाना योजना भेजने की तारीख तय हो और हर इलाके के लिए पौधारोपण का कैलेंडर बने और साइटों की केएमएल फाइलों की जांच जीआईएस से हो, मौके पर जाकर मिलान हो, और सबका एक केंद्रीय भू-स्थानिक डेटाबेस बने।

भारत को इससे जो मिला है, वह एक तरीका है। जो संस्था सैटेलाइट चित्र और एक संस्थान की मदद से जंगल की बात परख सकती है, वह सड़क, नहर और मकान की योजना भी उसी तरह परख सकती है। यह क्षमता उस मिशन से ज्यादा दिन चलेगी जिसे परखने के लिए बनी थी।

ब्लिट्ज़ की सलाह — जिस भू-स्थानिक डेटाबेस की बात है, वह मंत्रालय एक ही बार बनाए और देश की हर पौधारोपण योजना के लिए खोल दे। तरीका तो जांच दल ने दिखा ही दिया है, बचत दोबारा न बनाने में है।


ब्रिक्स की खेती और सेहत की साझा प्रयोगशालाओं में कई का जिम्मा भारतीय संस्थानों को मिला

नई दिल्ली। ब्रिक्स अध्यक्षता के साल की सबसे टिकाऊ चीज बैठकों के बयान नहीं हैं। कुछ शोध नेटवर्क हैं, और उनमें से कई का जिम्मा भारतीय संस्थानों के पास आया है।

प्राकृतिक, जैविक और पुनर्जीवी खेती पर साझा शोध के लिए बने ब्रिक्स एग्रो-इकोलॉजी उत्कृष्टता केंद्रों का जिम्मा शुरू में मोदीपुरम के आईसीएआर-भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान के पास रहेगा। डिजिटल खेती के नेटवर्क का जिम्मा आईआईटी दिल्ली के पास।

मोदीपुरम का नाम आना मायने रखता है। यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश का काम करता हुआ संस्थान है, कोई दफ्तर का पता नहीं। फसल चक्र, पराली का निपटारा और छोटे खेत की मिट्टी — मेरठ का किसान इन्हीं बातों को पहचानता है।

ब्रिक्स का साझेदार देश ढांचा
ब्रिक्स का साझेदार देश ढांचा

सेहत की तरफ तीन चीजें हैं। मोटापे और गैर-संचारी बीमारियों पर ब्रिक्स स्वस्थ जीवनशैली मिशन और 2026 से 2029 की उसकी रूपरेखा। पारंपरिक और एकीकृत चिकित्सा पर विशेषज्ञ कार्य समूह, जिसमें देसी ज्ञान की हिफाजत भी शामिल है। और मानसिक सेहत पर प्रशिक्षण केंद्रों का नेटवर्क, जिसका समन्वय निमहंस करेगा।

निमहंस का ग्यारह देशों के मानसिक सेहत प्रशिक्षण नेटवर्क का समन्वय करना पूरी विज्ञप्ति की सबसे कम चर्चा वाली बात है। भारत में जरूरत के मुकाबले प्रशिक्षित लोगों की भारी कमी है। यह नेटवर्क कहता है कि वह कौशल बढ़ाएगा, काम बांटेगा और प्राथमिक स्वास्थ्य में मानसिक सेहत को जोड़ेगा।

एक बात ब्लिट्ज़ खुद कह देना चाहता है। ये सब सहयोग के ढांचे हैं, पैसे वाली योजनाएं नहीं। विज्ञप्ति में कई को स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी बताया गया है। ऐसा नेटवर्क तभी नतीजा देता है जब बजट की एक लाइन और एक नामजद वैज्ञानिक उसके साथ आते हैं।

बजट आ गया तो भारत को समन्वय की कुर्सी मिलेगी। जो संस्थान नेटवर्क चलाता है, वही उसके नियम बनाता है, उसका डेटा रखता है और उसके लोग तैयार करता है।

ब्लिट्ज़ की सलाह — हर समन्वय करने वाला भारतीय संस्थान इसी साल एक पन्ने की कार्ययोजना छापे। उसमें मुख्य वैज्ञानिक का नाम, बजट की लाइन और पहला काम लिखा हो। इन तीन चीजों के बिना नेटवर्क सिर्फ एक चिट्ठी का सिरनामा है।


सितंबर 2026 का बंद भाव। चांदी सोने से दोगुनी तेजी से गिरी।

नई दिल्ली। घरेलू शेयर बाजार 11 सितंबर 2026 को नीचे रहा। आकाशवाणी समाचार ने इसे लगातार तीसरा गिरावट वाला सत्र बताया। कारोबार के आखिरी घंटे में नुकसान कुछ कम हुआ, और खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 55 अंक नीचे 74,848 पर तथा निफ्टी 53 अंक नीचे 23,425 पर था। ये बंद भाव नहीं, उसी वक्त के स्तर हैं।

विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 10 पैसे कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 95 रुपये 55 पैसे पर बंद हुआ।

सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना 0.9 फीसदी गिरकर 1.52 लाख रुपये प्रति दस ग्राम के आसपास रहा। चांदी 2 फीसदी गिरकर करीब 2.29 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई।

चांदी का सोने से दोगुनी रफ्तार से गिरना ध्यान देने लायक है। चांदी अब गहने और बचत से पहले सौर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स का कच्चा माल है। जिस घर में चांदी रखी है, वह बिना जाने कारखानों पर दांव लगाए बैठा है।

ब्लिट्ज़ यह साफ कर देता है कि शेयर सूचकांक के आंकड़े प्रसारक के बताए उसी समय के स्तर हैं। ये तय बंद भाव नहीं हैं। इनमें से कोई भी वायदा बाजार का निपटान भाव भी नहीं है। खरीद-बिक्री के लिए निपटान भाव और उसकी अपनी तारीख ही चलेगी।

ब्लिट्ज़ की सलाह — दाम मिलाने से पहले पाठक एक्सचेंज का निपटान भाव और उसकी तारीख देख ले। प्रसारक का बंद भाव और निपटान भाव दो अलग आंकड़े हैं।


भारत तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाएः सीतारमण

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 11 सितंबर 2026 को मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्टिवल 2026 में बोलीं। उन्होंने कहा कि भारत तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाए पर यह इंसानी जिम्मेदारी, सुरक्षा और जनता के भरोसे की कीमत पर न हो।

उन्होंने कहा, किसी भी भुगतान व्यवस्था में रफ्तार और सावधानी एक दूसरे को खींचती हैं। फिनटेक की सभा में यह कहना आसान रास्ता नहीं है।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत की युवा आबादी का फायदा तेजी से बढ़ते फिनटेक कारोबार में दिख रहा है, और नौजवान मौके का इंतजार नहीं कर रहे।

भरोसे की बात का भारत में एक ठोस मतलब है। जो व्यवस्था बहुत बड़ी संख्या में बहुत छोटे लेनदेन ढोती है, वह उतनी ही मजबूत है जितना उस आदमी का भरोसा जो सब्जी वाले को 200 रुपये भेज रहा है। एक धोखाधड़ी की खबर जितने लोगों को रोक देती है, उतने किसी प्रचार से नहीं जुड़ते।

भारतवासियों को इसका सीधा फायदा यह है कि डिजिटल भुगतान सस्ता बना रहेगा। भारत की खुदरा डिजिटल पटरियां इस्तेमाल करने वाले के लिए दुनिया में सबसे सस्ती हैं, और यह छूट बजट से नहीं, डिजाइन से मिली है।

ब्लिट्ज़ की सलाह — खुदरा डिजिटल भुगतान में ठगी के आंकड़े हर तिमाही एक ही जगह, एक ही तालिका में छापे जाएं। भरोसा बुरे आंकड़े छापने से बनता है, सिर्फ अच्छे छापने से नहीं।


संचार मंत्री ने कहा कि डिजिटल भुगतान की कहानी नेटवर्क की कहानी है

नई दिल्ली। संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 10 सितंबर 2026 को मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के तीसरे दिन कहा कि देश की फिनटेक क्रांति उसकी नेटवर्क क्रांति से अलग नहीं है।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम क्रिप्टोग्राफी आगे की तस्वीर तय करेंगी, और डिजिटल वित्त के बढ़ने के लिए नेटवर्क और भरोसा दोनों चाहिए।

Scindhyia
ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में संचार मंत्री, मुंबई, 10 सितंबर 2026

बात सीधी है और अक्सर भुला दी जाती है। भुगतान का ऐप एक टावर, एक फाइबर लाइन और एक स्पेक्ट्रम आवंटन के ऊपर की पतली परत है। जहां टावर नहीं, वहां ऐप सिर्फ स्क्रीन पर बनी तस्वीर है।

भारत के लिए इसका मतलब यह है कि अब की बढ़त तकनीक से नहीं, भूगोल से आएगी। ऐप बन चुके हैं। पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों, पहाड़ी जिलों और भीतरी ग्रामीण ब्लॉकों में वह नेटवर्क नहीं बना है जो लेनदेन के ठीक उसी पल काम करे।

ब्लिट्ज़ की सलाह — ग्रामीण मोबाइल डेटा की सेवा गुणवत्ता के आंकड़े सर्किल के बजाय ब्लॉक के हिसाब से छापे जाएं। सर्किल का औसत ठीक उसी ब्लॉक को छिपा लेता है जहां भुगतान अटकता है।


भारत-रूस दोतरफा निवेश की दिशा में कर रहे काम

नई दिल्ली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 10 सितंबर 2026 को इनोप्रोम में भारत-रूस रिश्ते पर बात की। उन्होंने कहा कि दोनों देश 2030 तक 100 अरब डॉलर के आपसी कारोबार और 50 अरब डॉलर के दोतरफा निवेश की दिशा में काम कर रहे हैं।

इन दोनों में निवेश वाला आंकड़ा ज्यादा मुश्किल है और ज्यादा कीमती भी। कारोबार का आंकड़ा एक बड़े सौदे से हिल जाता है। निवेश के लिए कारखाना लगाना पड़ता है, तकनीक देनी पड़ती है और लोगों को तनख्वाह पर रखना पड़ता है। वह रिश्ता खराब साल में भी टिकता है।

प्रधानमंत्री और रूस के राष्ट्रपति, नई दिल्ली, 11 सितंबर 2026
प्रधानमंत्री और रूस के राष्ट्रपति, नई दिल्ली, 11 सितंबर 2026

11 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री और रूस के राष्ट्रपति की बैठक में राजनीति, कारोबार, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल आवाजाही और लोगों के आपसी रिश्तों पर बात हुई। रूस के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए बुलाया, और न्योता मान लिया गया।

इस सूची में कौशल आवाजाही को अलग से देखना चाहिए। भारतीय कामगारों और पेशेवरों के लिए बना ढांचा घर आने वाले पैसे में और साथ लौटने वाले तजुर्बे में सीधे दिखता है। भारतीय घर पर सबसे सीधा असर इसी का पड़ता है।

ब्लिट्ज़ की सलाह — 2030 के लक्ष्य के साथ हर साल का पड़ाव भी छापा जाए। जिस लक्ष्य के बीच में कोई निशान नहीं होता, उसे चलाया नहीं जा सकता, सिर्फ बताया जा सकता है।


ब्रिक्स का निर्यात 900 अरब डॉलर से 6 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचा, अब छोटे उद्यम की बारी

नई दिल्ली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 11 सितंबर 2026 को ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स देशों का निर्यात 2003 के करीब 900 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में 6 लाख करोड़ डॉलर हो गया।

ब्लिट्ज़ ने इसका हिसाब निकाला। 21 साल में यह 6.67 गुना है, यानी हर साल औसतन 9.45 फीसदी की चक्रवृद्धि बढ़त। मोटे तौर पर हर साढ़े सात साल में दोगुना।

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मंत्री ने कहा कि भारत की अध्यक्षता का मकसद साफ रहा — सदस्य देशों के बीच ज्यादा संतुलित कारोबार, और सेवाओं के कारोबार का विस्तार। उन्होंने कहा कि सहयोग का फायदा किसानों तक, कारोबार में उतरी महिलाओं तक, नौजवान उद्यमियों और छोटे उद्यमों तक पहुंचना चाहिए।
उनके मुताबिक 2,000 से ज्यादा कारोबारी और प्रतिनिधि आए, और यह अब तक का सबसे बड़ा ब्रिक्स बिजनेस फोरम रहा। फोरम में गैर-शुल्क अड़चनें, खेती और कृषि तकनीक, सेवाओं का कारोबार, महिलाओं की अगुवाई वाले उद्यम और डिजिटल कारोबार पर बात हुई।

छोटे उद्यम के लिए तीन ठोस चीजें बनी हैं — इन्क्यूबेटर नेटवर्क, एमएसएमई सहयोग पोर्टल और स्टार्टअप इनोवेशन फंड। तिरुपुर के बुनकर या लुधियाना के कल-पुर्जे बनाने वाले के लिए असली सवाल यही है कि पहला विदेशी ऑर्डर कहां से आएगा।

भारत के लिए सेवाओं वाला हिस्सा सबसे ज्यादा काम का है और अब तक सबसे कम छुआ गया है। माल के लिए सीमा शुल्क और मानकों पर काम आगे बढ़ चुका है। सेवाओं के लिए अभी तक डिग्री और पेशेवर योग्यता की आपसी मान्यता जैसा कोई साफ अध्याय नहीं है।

ब्लिट्ज़ की सलाह — भारत अध्यक्षता छोड़ने से पहले सेवाओं पर एक मसौदा अध्याय मेज पर रख दे, चाहे वह छोटा ही हो। मेज पर रखा मसौदा अध्यक्षता के बाद भी चलता है, भाषण में कही प्राथमिकता नहीं चलती।

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