• Latest
  • Trending
exam

छह लोग, एक परीक्षा हॉल: भारत ने अपनी परीक्षा व्यवस्था टास्क फोर्स के हवाले की

July 27, 2026
Sarbananda Sonowal

तीन साल में आधी सिफ़ारिश पर हुआ अमल

August 27, 2026
दिल्ली लक्ष्मी योजना: 4,000 महिलाओं को स्वीकृति पत्र, 1 सितंबर से मिलेंगे ₹2,500

लक्ष्मी योजना: पैसा 1 सितंबर से, पर 2.61 लाख फॉर्म अधूरे

August 26, 2026
UPI

यूपीआई के दस साल: अब औसत भुगतान सिर्फ़ ₹1,300 का

August 26, 2026
भारत उच्च शिक्षा

एच-1बी पर एक लाख डॉलर की नई फ़ीस का प्रस्ताव

August 26, 2026
hospital

मौसमी बुखार सामान्य है, पर इन चार को इंतज़ार नहीं करना

August 26, 2026
ई-श्रम पोर्टल के 5 साल: 31.89 करोड़ श्रमिक जुड़े, जानें रजिस्ट्रेशन और योजनाओं का लाभ

ई-श्रम के पाँच साल: 31.89 करोड़ नाम, और आपका हक़

August 26, 2026
daily-news

26 अगस्त की बड़ी खबरें: पंजाब में चीनी स्टॉक, शिमला भूकंप, खेलो इंडिया, बाजार और इसरो लॉन्च

August 26, 2026
दिल्ली लक्ष्मी योजना 2026

दिल्ली लक्ष्मी योजना: पहले 4,000 पत्र आज

August 26, 2026
सुप्रीम कोर्ट

क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट में विशेष पीठ

August 26, 2026
Amit Sah

तीन नए कानून, और एक साल की समयसीमा

August 26, 2026
गेहूँ के आटा-मैदा निर्यात से हटी रोक, किसानों और मंडी भाव पर क्या होगा असर?

बारिश 13% कम, पर दाल का रकबा बढ़ गया

August 26, 2026
farmer

चार साल बाद गेहूं और आटे का निर्यात खुला

August 26, 2026
Thursday, August 27, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

छह लोग, एक परीक्षा हॉल: भारत ने अपनी परीक्षा व्यवस्था टास्क फोर्स के हवाले की

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 27, 2026
in the blitz
0
exam

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।नामों से ही समझ आ जाता है कि सरकार समस्या को किस तरह देख रही है। परीक्षा सुधार के लिए बनी छह सदस्यों की उच्चस्तरीय टास्क फोर्स की अध्यक्षता नंदन नीलेकणि कर रहे हैं — वही, जिन्होंने आधार की व्यवस्था खड़ी की थी। इसमें इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस सोमनाथ हैं, ख़ुफ़िया ब्यूरो के पूर्व निदेशक तपन डेका हैं, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी कामकोटि हैं, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवल हैं और लॉजिस्टिक्स के जानकार अमृत लाल मीणा हैं। यानी परियोजना प्रबंधन, सुरक्षा, कंप्यूटर विज्ञान, प्रशासन और सामान की सुरक्षित आवाजाही — पांचों चीज़ें एक ही मेज़ पर।

यह चुनाव सोच-समझकर किया गया है और इससे बीमारी की पहचान भी साफ़ होती है। देश की सार्वजनिक परीक्षाओं को अब सिर्फ़ शिक्षा का मामला नहीं माना जा रहा। इन्हें एक बड़े बुनियादी ढांचे की तरह देखा जा रहा है — ऐसी व्यवस्था जो एक ही सुबह हज़ारों केंद्रों पर लाखों छात्रों तक गोपनीय सामग्री पहुंचाती है, और जिसे भुगतान प्रणाली जैसी भरोसेमंद होना चाहिए। टास्क फोर्स से कहा गया है कि वह परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की जांच करे और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के लिए ढांचागत, प्रशासनिक और तकनीकी सुधार सुझाए — जिसमें आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और ब्लॉकचेन आधारित सत्यापन जैसी तकनीकें शामिल हैं।

YOU MAY ALSO LIKE

तीन साल में आधी सिफ़ारिश पर हुआ अमल

लक्ष्मी योजना: पैसा 1 सितंबर से, पर 2.61 लाख फॉर्म अधूरे

शिक्षा से आगे, ढांचे का सवाल: टास्क फोर्स को परीक्षा की पूरी प्रक्रिया देखनी है — प्रश्नपत्र की हिफ़ाज़त से लेकर छात्र की पहचान तक — और तकनीक आधारित हल सुझाने हैं।

जो देश रोज़ अरबों डिजिटल भुगतान बिना एक भी गड़बड़ी के कर लेता है, वह एक प्रश्नपत्र भी सुरक्षित पहुंचा सकता है। कमी क्षमता की कभी नहीं थी — डिज़ाइन की थी।

एक नज़र में

• अध्यक्ष: नंदन नीलेकणि, इंफ़ोसिस के सह-संस्थापक
• सदस्य: एस सोमनाथ, तपन डेका, वी कामकोटि, अनीता करवल, अमृत लाल मीणा
• काम: एनटीए में ढांचागत, प्रशासनिक और तकनीकी सुधार के सुझाव
• तकनीक: एआई और ब्लॉकचेन आधारित सत्यापन, पूरी परीक्षा प्रक्रिया की समीक्षा

हल कैसा दिख सकता है, इसका खाका मौजूद है। इतने बड़े प्रश्न-बैंक बनाए जाएं कि किसी एक पेपर की चोरी बेमानी हो जाए, क्योंकि दो छात्रों को एक जैसा पेपर मिलेगा ही नहीं। बायोमेट्रिक पहचान से दूसरे के बदले परीक्षा देने का रास्ता बंद हो। पेपर एन्क्रिप्टेड रूप में और ठीक समय पर पहुंचे, ताकि वह कई दिन तक कहीं रखा ही न रहे। और हर क़दम का ऐसा रिकॉर्ड बने कि कोई गड़बड़ हो तो केंद्र, पाली और मिनट तक पहचानी जा सके। ये सब नई तकनीकें नहीं हैं — बैंकिंग और पहचान की व्यवस्थाओं में ये रोज़ इस्तेमाल होती हैं।

आगे का रास्ता यही है कि इरादा बड़ा रखा जाए और क्रम ईमानदारी से तय हो। पूरे देश में कंप्यूटर आधारित परीक्षा के लिए भरोसेमंद बिजली और इंटरनेट चाहिए, जो कई ज़िलों में अब भी असमान है — जल्दबाज़ी में की गई शुरुआत एक तरह की दिक़्क़त हटाकर दूसरी खड़ी कर सकती है। समझदारी वाला रास्ता है: बड़े पैमाने पर पायलट, नतीजों को सार्वजनिक करना, जो चले उसे बढ़ाना, और जहां ज़रूरत हो वहां ऑफ़लाइन विकल्प रखना। भारत के पास डिजिटल बुनियादी ढांचा बनाने का तजुर्बा है जिसकी दुनिया मिसाल देती है। हर साल दो करोड़ छात्रों का भविष्य तय करने वाली परीक्षा को उसी गंभीरता से लेना कोई तकनीकी छलांग नहीं, बस एक फ़ैसला है।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation