• Latest
  • Trending
सुप्रीम कोर्ट

‘साल भर नज़र रखेंगे’: सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसले को लगातार निगरानी में बदल दिया

July 27, 2026
semiconductor

₹1.27 लाख करोड़, दूसरा चरण: अपनी चिप बनाने की राह पर भारत का बड़ा दांव

July 27, 2026
mansoon

16 से 6 फ़ीसदी: देर से आई बारिश के बाद तेज़ी से भरता खरीफ़ बुवाई का अंतर

July 27, 2026
Congratulations to Mirabai Chanu

सोने की हैट्रिक: मीराबाई चानू ने तोड़ डाले मुक़ाबले के सारे रिकॉर्ड

July 27, 2026
bharat-jal-suraksha-rainwater-harvesting-2026

बारिश के बाद का असली सवाल: भारत अपना पानी कहां रखेगा

July 27, 2026
व्यवस्था में हो सुधार, अराजकता अस्वीकार्य

प्रोटेस्ट, पॉलिटिक्स और अराजकता!

July 27, 2026
modi

सरकार छात्रों के साथ, पेपर लीक के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट ः मोदी

July 27, 2026
व्यवस्था में हो सुधार, अराजकता अस्वीकार्य

88 मिनट में नीट पेपर लीक पर 4 बड़े एक्शन

July 27, 2026
व्यवस्था में हो सुधार, अराजकता अस्वीकार्य

व्यवस्था में हो सुधार, अराजकता अस्वीकार्य

July 27, 2026
‘ब्रेन ड्रेन’ रोकने के लिए इसरो का बड़ा कदम

‘ब्रेन ड्रेन’ रोकने के लिए इसरो का बड़ा कदम

July 27, 2026
पपीते के पत्ते का अर्क बढ़ाता है प्लेटलेट्स? टाटा हॉस्पिटल की स्टडी पर उठे सवाल

पपीते के पत्ते का अर्क बढ़ाता है कैंसर रोगियों की प्लेटलेट्स !

July 27, 2026
एक टनल-एक हाईवे से बदल जाएगा यूपी-एनसीआर का पूरा नक्शा

एक टनल-एक हाईवे से बदल जाएगा यूपी-एनसीआर का पूरा नक्शा

July 27, 2026
रिंगरोड बनने पर कानपुर को मिलेगा एक्सप्रेसवे का पूरा फायदा

रिंगरोड बनने पर कानपुर को मिलेगा एक्सप्रेसवे का पूरा फायदा

July 27, 2026
Monday, July 27, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

‘साल भर नज़र रखेंगे’: सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसले को लगातार निगरानी में बदल दिया

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 27, 2026
in the blitz
0
सुप्रीम कोर्ट

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में जो हुआ, उसे ठीक-ठीक समझना ज़रूरी है। नीट-यूजी परीक्षा में ढांचागत सुधार की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने सिर्फ़ आदेश देकर बात ख़त्म नहीं की। पीठ ने कहा कि वह केंद्र की सुधार-योजना पर ‘बहुत बारीकी से नज़र’ रखेगी और ‘साल भर इसका अनुसरण करती रहेगी’। अदालत ने केंद्र सरकार को विस्तृत हलफ़नामा दाख़िल करने का निर्देश दिया है, जिसमें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में संस्थागत सुधार, नीट को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) में बदलने की व्यावहारिकता, और उसके साथ ज़रूरी साइबर सुरक्षा व परीक्षा-सुरक्षा के इंतज़ामों का ब्योरा हो।

यह फ़र्क़ मामूली नहीं है। कोई फ़ैसला फ़ाइल बंद कर देता है; निगरानी उसे खुला रखती है। एक दिन की सुनवाई को साल भर की प्रक्रिया में बदलकर अदालत ने सफलता की परिभाषा ही बदल दी है — अब कसौटी अदालत में एक बार दिया गया भरोसा नहीं, बल्कि वह योजना है जिसे बार-बार जांच से गुज़रना होगा। पीठ ने साफ़ कहा कि तात्कालिक इंतज़ाम स्थायी हल नहीं होते, और देश को एक पूरी तरह संस्थागत परीक्षा व्यवस्था चाहिए — यह भाषा किसी एक घटना पर नहीं, पूरे ढांचे पर केंद्रित है।

YOU MAY ALSO LIKE

₹1.27 लाख करोड़, दूसरा चरण: अपनी चिप बनाने की राह पर भारत का बड़ा दांव

16 से 6 फ़ीसदी: देर से आई बारिश के बाद तेज़ी से भरता खरीफ़ बुवाई का अंतर

सिर्फ़ फ़ैसला नहीं, निगरानी: जस्टिस नरसिम्हा और जस्टिस आराधे की पीठ ने एनटीए सुधार, कंप्यूटर आधारित परीक्षा और साइबर सुरक्षा पर विस्तृत हलफ़नामा मांगा है, और कहा है कि वह साल भर इस योजना पर नज़र रखेगी।

एक बार किया गया वादा धुंधला पड़ सकता है। हर कुछ महीने में जांचा गया वादा योजना बन जाता है — और अदालत ने दो करोड़ अभ्यर्थियों के लिए ठीक यही बनाया है।

एक नज़र में

• पीठ: जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे
• निर्देश: एनटीए में संस्थागत सुधार पर विस्तृत हलफ़नामा
• दायरा: सीबीटी की व्यावहारिकता, साइबर व परीक्षा सुरक्षा के प्रोटोकॉल
• तरीक़ा: अदालत साल भर बारीकी से निगरानी करेगी

अदालती रास्ते के साथ-साथ राजनीतिक रास्ता भी चल रहा है। संसद का मानसून सत्र जारी है और परीक्षा में जवाबदेही चर्चा के केंद्र में है। इसी बीच शिक्षा मंत्रालय का प्रभार बदल चुका है — धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद प्रल्हाद जोशी ने सप्ताहांत में अतिरिक्त प्रभार संभाला; प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ने अनुच्छेद 75 के तहत इस्तीफ़ा स्वीकार किया था। यानी नए मंत्री को ऐसा विभाग मिला है जिसका सुधार-एजेंडा अकेले उनका तय किया हुआ नहीं है: वह याचिकाओं में रखा गया, खुली अदालत में परखा गया, और अब एक पीठ अपने चुने हुए अंतराल पर उसकी जांच करेगी।

आगे का रचनात्मक रास्ता इस निगरानी को बोझ नहीं, पूंजी मानने में है। भारत के पास सुरक्षित राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली बनाने की तकनीकी क्षमता है — ऐसे संतुलित प्रश्न-बैंक जिनसे किसी एक पेपर को चुराने का कोई मतलब न रह जाए, बायोमेट्रिक पहचान, कूटबद्ध (एन्क्रिप्टेड) वितरण, ज़िला केंद्रों तक भरोसेमंद कनेक्टिविटी और हर क़दम पर जांचा जा सकने वाला रिकॉर्ड। ऐसी परियोजनाओं में जो चीज़ अक्सर कम पड़ती है, वह है सुर्ख़ियां हटने के बाद बनी रहने वाली तवज्जो। फ़ाइल साल भर खुली रखकर अदालत ने वही तवज्जो सुनिश्चित कर दी है। अगर आने वाला हलफ़नामा इरादों के बजाय समय-सीमा, लागत और पायलट परियोजनाओं के बारे में ठोस बात करता है, तो यही वह मोड़ होगा जहां भारत ने अपनी सबसे अहम परीक्षा की मरम्मत करना छोड़कर उसे नए सिरे से बनाना शुरू किया।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation