• Latest
  • Trending
The increasing trend of opposition to constitutional institutions is dangerous

संवैधानिक संस्थाओं के विरोध का बढ़ता चलन खतरनाक

January 12, 2024
daily-news

कोयला खदानों से डेटा सेंटर तक: भारत की बड़ी आर्थिक और तकनीकी खबरें

September 14, 2026
brics

भारत की बड़ी खबरें: एशिया कप, धीरज बोम्मादेवरा, हिंदी दिवस और G20-ब्रिक्स

September 14, 2026
ब्रिक्स सम्मेलन: भारत को क्या मिला?

ब्रिक्स सम्मेलन: भारत को क्या मिला?

September 13, 2026
मोदी-शी मुलाकात और ब्रिक्स सम्मेलन का दूसरा दिन

मोदी-शी मुलाकात और ब्रिक्स सम्मेलन का दूसरा दिन

September 13, 2026
ब्रिक्स सुधार, ओडिशा में 11.5 अरब डॉलर निवेश, भारतीय वाणिज्य दूतावास, हॉकी, बद्री नस्ल और बांस की बड़ी खबरें।

ब्रिक्स से ओडिशा निवेश तक भारत की बड़ी खबरें

September 12, 2026
भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026

18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत मंडपम में शुरू, भारत चौथी बार अध्यक्ष

September 12, 2026
daily-news

भारत में ब्रिक्स बैठक: व्यापार, UPI, डिजिटल मजदूर चौक और आर्थिक सुधार

September 11, 2026
daily-news

भारत की बड़ी खबरें: LPG नियम, मत्स्य योजना, BRICS, AI, सुधार और ग्रीन मिशन

September 10, 2026
daily-news

भारत की बड़ी खबरें: रेलवे, UPI, कौशल, तकनीक और हरित विकास में बड़े फैसले

September 10, 2026
भारत की 7.8% जीडीपी ग्रोथ

‘झूठ की गूंज वाले निराशा फैलाने में लगे हैं’

September 7, 2026
पीएम मोदी पुतिन मुलाकात SCO शिखर सम्मेलन

पीएम मोदी का विदेश दौरा और एससीओ शिखर सम्मेलन का संदेश… भारत विश्व-मित्र महाशक्ति

September 7, 2026
भारत-उज्बेकिस्तान व्यापक रणनीतिक साझेदारी

भारत का बढ़ा रुतबा

September 7, 2026
Wednesday, September 16, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

संवैधानिक संस्थाओं के विरोध का बढ़ता चलन खतरनाक

by ब्लिट्ज़ इंडिया
January 12, 2024
in दृष्टिकोण
0
The increasing trend of opposition to constitutional institutions is dangerous

deepakआजकल देश में यहां की सरकारी व्यवस्था में क्या होना चाहिए; और क्या नहीं, इस बात को लेकर एक बड़ा दिलचस्प नजरिया देखने एवं सुनने को मिल रहा है। देश भर में विपक्ष के नेता आरोप लगा रहे हैं कि केन्द्र सरकार की जांच एजेंसियां एनडीए से जुड़ी पार्टियों से इतर बाकी तमाम विपक्षी दलों के नेताओं और उनकी राज्य सरकारों के खिलाफ और उनसे जुड़े हुए कारोबारों के खिलाफ एकतरफा जांच में व्यस्त हैं, जबकि वास्तव में ऐसा है नहीं। विपक्षी नेता तथा पार्टियां ऐसे आंकड़े देने में जुटी हैं कि प्रवर्तन निदेशालय (एनफोर्समेंट डाइरेक्टोरेट, ईडी) की चल रही तमाम जांच में से कितनी जांच विपक्षी नेताओं के खिलाफ हैं और कितनी अन्य के। लेकिन यहां यह तथ्य भी समझने और गौर करने योग्य है कि भले ही तमाम जांच एजेंसियां विपक्षी नेताओं के ईमानदार होने के दावों के खिलाफ जांच में व्यस्त हैं; पर जांच एजेंसियों का विरोध और उनके कर्मचारियों पर जानलेवा हमले की घटनाएं ऐसे सभी नेताओं के संबंध में ‘कुछ न कुछ’ गड़बड़ होने का अंदेशा स्वत: ही उत्पन्न कर देती हैं। यही नहीं, विपक्ष के नेताओं द्वारा संवैधानिक संस्थाओं का विरोध किए जाने का बढ़ता चलन अब खतरनाक होता जा रहा है।

– ईडी के छापों में जहां करोड़ों रुपये, सोना तथा घातक हथियार बरामद हो रहे हों तो ऐसे समय में जब ऐसे मामले सामने आ रहे हैं तो सभी को जांच एजेंसियों के सवालों से भागने एवं राजनीतिक रंग देने के बजाय उन्हें साक्ष्यों से समाप्त करने से ही बात बनेगी; न कि संवैधानिक संस्थानों के विरोध से।

देश के दर्जन भर से अधिक राजनीतिक दलों ने कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट में इसी संबंध में एक याचिका भी लगाई थी कि केन्द्रीय जांच एजेंसियों को नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करते हुए क्या-क्या नहीं करना चाहिए। इनके वकील ने सुप्रीम कोर्ट से केन्द्र सरकार और उसकी एजेंसियों को निर्देश देने की अपील की थी, ताकि राजनेताओं को जांच की प्रताड़ना न झेलनी पड़े एवं उन्हें जल्द जमानत मिल जाए। विपक्षी वकील का यह आरोप था कि केन्द्र सरकार चुनिंदा तरीके से राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाती है तथा ऐसे में गिरफ्तारी, रिमांड, और जमानत, सबके लिए सुप्रीम कोर्ट को निर्देश देने चाहिए। कांग्रेस सहित देश के 14 विपक्षी दलों ने यह पिटीशन लगाई थी। कांग्रेस के एक बड़े नेता और सुप्रीम कोर्ट के एक प्रमुख वकील अभिषेक मनु सिंघवी इसे लेकर अदालत में खड़े हुए थे पर कोर्ट का रूख देखकर सिंघवी ने यह पिटीशन वापिस ले ली थी।

YOU MAY ALSO LIKE

भारत का बढ़ा रुतबा

तेजस एमके-2 फाइटर जेट पर पूर्व वाइस चीफ की दो टूक ‘कब तक करेंगे इंतजार’

इस मामले को सुन रहे देश के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चन्द्रचूड़ ने इस बात पर कुछ हैरानी भी जाहिर की थी कि कैसे नेता अपने आपको बाकी जनता से परे के ऐसे कोई विशेषाधिकार देने की मांग कर सकते हैं? उन्होंने कहा था कि राजनेता और देश की जनता का दर्जा एक बराबर है, वे जनता से ऊपर किसी दर्जे का दावा नहीं कर सकते, उनके लिए कोई अलग प्रक्रिया कैसे हो सकती है? जितनी तरह की बातें विपक्षियों के वकील ने कही थीं, वे जांच और मुकदमों का सामना कर रहे विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी में कुछ शर्तें लगाने, उनको आसान जमानत मिलने की वकालत करते हुए थीं। मुख्य न्यायाधीश ने इनको पूरी तरह से खारिज कर दिया और कहा कि अगर केन्द्र सरकार और जांच एजेंसियों ने किसी मामले में ज्यादती की है तो वह मामला सामने रखा जाए। इस तरह तमाम जांच के लिए कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता। उनका कहना बड़ा साफ था कि गिरफ्तारी या जमानत के मामले में जनता और नेता के बीच कोई फर्क कैसे किया जा सकता है?

आज की तारीख में तमाम नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के तथाकथित आरोपों में जांच एजेंसियां जांच कर रही हैं पर अब यह अजीब सी परिपाटी बनती जा रही है कि जब भी किसी राजनेता पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं तो वह संबंधित जांच एजेंसी को ही कठघरे में खड़ा कर देता है। वह जांच एजेंसी के इरादों एवं उसकी नीयत पर ही सवाल उठाना शुरू कर देता है। इतना ही नहीं अगर संबंधित राजनेता किसी राज्य का मुख्यमंत्री हो तो वह अपने पक्ष में पूरे राज्यतंत्र को ही ला खड़ा करता है। दिल्ली और झारखंड के मुख्यमंत्री संभवत: इसी दांव का प्रयोग सा करते दिखाई दे रहे हैं। अवैध खनन में धनशोधन मामले की जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय झारखंड के मुख्यमंत्री को सात बार समन भेज चुका है, मगर वे किसी न किसी बहाने उसमें सहयोग करने से बचते रहे हैं। उन्होंने पार्टी, विधायकों और मंत्रियों की बैठक बुला कर समर्थन हासिल कर लिया है कि अगर प्रवर्तन निदेशालय उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है, तो भी वही मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे। इससे पहले यही कवायद दिल्ली के मुख्यमंत्री भी कर चुके हैं। उन पर कथित दिल्ली शराब घोटाले की जांच में सहयोग न करने का आरोप है। प्रवर्तन निदेशालय उन्हें तीन बार पूछताछ के लिए बुला चुका है पर वे उसके इरादे पर सवाल उठाते हुए उसके नोटिस पर ही प्रश्नचिन्ह लगा चुके हैं। वे और उनकी पार्टी लगातार इसके पीछे केंद्र सरकार की गलत मंशा बताते रहे हैं। यह अजीब सी परिस्थिति उत्पन्न करने जैसा है। यह कैसी ईमानदारी है कि आरोपी जांच में सहयोग करने के बजाय खुद को पाक-साफ बताता रहे। इसमें कोई संदेह नहीं कि अगर किसी ने कुछ गलत नहीं किया है तो फिर उसे किसी भी जांच से डर कैसा, क्योंकि सांच को आंच नहीं होती। कायदे से आरोपी को जांच एजेंसियों के सवालों का जवाब देकर साबित करना होता है कि वह निरपराध है।

प्रवर्तन निदेशालय लंबे समय से दिल्ली शराब घोटाले और झारखंड में अवैध खनन से जुड़े मामलों की जांच कर रहा है। उसे कुछ तो तथ्य हाथ लगे होंगे, जिनके आधार पर उसने दोनों मुख्यमंत्रियों को पूछताछ के लिए तलब किया है। आरोप हैं कि दोनों मामलों में कई लोगों को संलिप्त पाया गया है। ऐसे में बेहतर यही है कि आरोपों के खिलाफ सबूत पेश किए जाएं और स्वयं को निर्दोष साबित किया जाए। यह बात तो खासकर उन लोगों के लिए विशेष रूप से अहम है जो सार्वजनिक जीवन से संबंध रखते हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री से इसलिए भी सवालों का सामना करने की अपेक्षा की जा रही है कि वे अपनी पार्टी के गठन के दिन से ही यह दावा कर रहे हैं कि उनकी पार्टी खांटी ईमानदार है। ईमानदारी का प्रमाण मात्र जुबानी नहीं हो सकता। उसे सबूतों के जरिए दर्शाना भी होता है। ईडी के छापों में जहां करोड़ों रुपये, सोना तथा घातक हथियार बरामद हो रहे हों तो ऐसे समय में जब ऐसे मामले सामने आ रहे हैं तो सभी को जांच एजेंसियों के सवालों से भागने एवं राजनीतिक रंग देने के बजाय उन्हें साक्ष्यों से समाप्त करने से ही बात बनेगी; न कि संवैधानिक संस्थानों के विरोध से।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation