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बनेगा राम मंदिर

मुस्लिम पक्ष विवादित जमीन पर दावा साबिकरने में नाकाम रहा

by ब्लिट्ज़ इंडिया
January 19, 2024
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ram ji
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन पर रामलला का हक माना था। कोर्ट के फैसले के बाद ही राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ था। देश की सबसे बड़ी अदालत ने सबसे बड़े फैसले में अयोध्या की विवादित जमीन पर रामलला विराजमान का हक माना था। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 जजों की विशेष बेंच ने 9 नवंबर, 2019 को सर्वसम्मति से यह फैसला सुनाया था। सुबह 10.30 बजे सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े, जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नज़ीर पहुंचे। पांच जजों ने लिफाफे में बंद फैसले की कॉपी पर दस्तखत किए और इसके बाद जस्टिस गोगोई ने फैसला पढ़ना शुरू किया।

खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी मस्जिद
फैसले में एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) का हवाला देते हुए कहा गया कि बाबरी मस्जिद का निर्माण किसी खाली जगह पर नहीं किया गया था। विवादित जमीन के नीचे एक ढांचा था और यह इस्लामिक ढांचा नहीं था। कोर्ट ने कहा कि पुरातत्व विभाग की खोज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष विवादित जमीन पर दावा साबित करने में नाकाम रहा है।

वहीं, कोर्ट ने 6 दिसंबर 1992 को गिराए गए ढांचे पर कहा कि उसे गिराना कानून का उल्लंघन था। ये तमाम बातें कहने के बाद कोर्ट ने विवादित जमीन पर रामलला का हक बताया। कोर्ट ने शिया वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े के दावों को खारिज कर दिया।

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- विवादित जमीन पर रामलला का हक

निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज
निर्मोही अखाड़े की लिखित दलील में कहा गया था कि विवादित भूमि का आंतरिक और बाहरी अहाता भगवान राम की जन्मभूमि के रूप में मान्य है। हम रामलला के सेवायत हैं और ये हमारे अधिकार में सदियों से रहा है। निर्मोही अखाड़े ने अपनी दलील में कहा था कि हमें ही रामलला के मंदिर के पुनर्निर्माण, रखरखाव और सेवा का अधिकार मिलना चाहिए। अखाड़े के इस दावे को कोर्ट ने खारिज कर दिया और विवादित जमीन पर मंदिर निर्माण के लिए अलग से ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया।

शिया वक्फ बोर्ड का दावा भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। शिया वक्फ बोर्ड ने कहा था कि मस्जिद मीर बाकी ने बनवाई थी, जो एक शिया थे, ऐसे में यह मस्जिद सुन्नियों को नहीं दी जा सकती।

केंद्र सरकार को ट्रस्ट बनाने का आदेश
विवादित जमीन पर रामलला का हक बताते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन महीने के अंदर ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया। इस ट्रस्ट के पास ही मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी होगी।

मुस्लिम पक्ष को भी जमीन
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही किसी उचित जगह मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ जगह दी जाए।
इस तरह 40 दिनों की लगातार सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया था जिससे दशकों पुराने विवाद का खात्मा हो गया और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया।

क्या था इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट से पहले इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2010 में अपना फैसला सुनाया था। 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2.77 एकड़ जमीन का बंटवारा कर दिया गया था। कोर्ट ने यह जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान के बीच जमीन बराबर बांटने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट के इस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिस पर लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया और विवादित जमीन रामलला को देने का आदेश दिया।

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