• Latest
  • Trending
Parliamentarians, conduct and parliamentary dignity

सांसद, आचरण और संसदीय गरिमा

December 17, 2023
solar

288 गीगावॉट के बाद का सवाल: भारत शाम की बिजली कहां रखेगा

July 27, 2026
vikram

तीन जांचें और पूरी: गगनयान उन पड़ावों से गुज़रा जिनकी तस्वीरें नहीं छपतीं

July 27, 2026
ev-charging

हर आठ में एक: इलेक्ट्रिक गाड़ियों ने वह लकीर पार कर ली जो अब पीछे नहीं जाएगी

July 27, 2026
export

बारह दिन शुल्क-मुक्त: भारत–ब्रिटेन समझौते ने ज़मीन पर क्या बदला

July 27, 2026
exam

छह लोग, एक परीक्षा हॉल: भारत ने अपनी परीक्षा व्यवस्था टास्क फोर्स के हवाले की

July 27, 2026
सुप्रीम कोर्ट

‘साल भर नज़र रखेंगे’: सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसले को लगातार निगरानी में बदल दिया

July 27, 2026
semiconductor

₹1.27 लाख करोड़, दूसरा चरण: अपनी चिप बनाने की राह पर भारत का बड़ा दांव

July 27, 2026
mansoon

16 से 6 फ़ीसदी: देर से आई बारिश के बाद तेज़ी से भरता खरीफ़ बुवाई का अंतर

July 27, 2026
Congratulations to Mirabai Chanu

सोने की हैट्रिक: मीराबाई चानू ने तोड़ डाले मुक़ाबले के सारे रिकॉर्ड

July 27, 2026
bharat-jal-suraksha-rainwater-harvesting-2026

बारिश के बाद का असली सवाल: भारत अपना पानी कहां रखेगा

July 27, 2026
व्यवस्था में हो सुधार, अराजकता अस्वीकार्य

प्रोटेस्ट, पॉलिटिक्स और अराजकता!

July 27, 2026
modi

सरकार छात्रों के साथ, पेपर लीक के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट ः मोदी

July 27, 2026
Tuesday, July 28, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

सांसद, आचरण और संसदीय गरिमा

by ब्लिट्ज़ इंडिया
December 17, 2023
in दृष्टिकोण
0
Parliamentarians, conduct and parliamentary dignity

deepakतृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा की लोकसभा की सदस्यता रद्द कर दी गई। उन्हें ‘कैश फॉर क्वेरी’ मामले में दोषी पाया गया है। एथिक्स कमेटी यानि कि आचार समिति की रिपोर्ट की सिफारिश के आधार पर उन्हें संसद से निष्कासित कर दिया गया है लेकिन इस पर हंगामा हो गया। सदन की कार्यवाही के स्थगन के बाद जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने रिपोर्ट पर चर्चा के लिए महज आधे घंटे का समय दिया। आधे घंटे की चर्चा के बाद ध्वनिमत से रिपोर्ट की सिफारिश मान ली गई और महुआ मोइत्रा की सदस्यता रद्द हो गई।

विपक्ष के सदस्यों ने चर्चा के लिए और समय की मांग की थी क्योंकि एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट 495 पन्नों की थी। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि मैं महुआ मोइत्रा पर एथिक्स कमेटी रिपोर्ट पर आधे घंटे की चर्चा करने की ही अनुमति देता हूं क्योंकि इस रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा है कि किस तरह महुआ ने अपना संसदीय लॉगइन आईडी और पासवर्ड किसी और को दे दिया। इसलिए प्रस्ताव पर चर्चा एकदम ठीक समय पर की जा रही है। तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी सांसदों ने मांग की कि महुआ मोइत्रा को सदन में बोलने का मौका दिया जाए जिसे स्पीकर बिरला ने खारिज कर दिया। लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने 2005 के एक मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि तत्कालीन लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ने 10 लोकसभा सांसदों की सदस्यता रद्द करने के निर्देश दिए थे। ये सांसद भी ‘कैश फॉर क्वेरी’ मामले में शामिल थे। इस बीच जोशी ने कहा कि 2005 में सदन के नेता प्रणब मुखर्जी ने खुद इन 10 सांसदों की सदस्यता रद्द करने के लिए प्रस्ताव पेश किया था और उन्हें भी बोलने का अवसर नहीं दिया गया था। ऐसे में लोकसभा अध्यक्ष ने आचार समिति की सिफारिशों पर महुआ मोइत्रा को सदन में बोलने से रोक दिया। जो भी किया गया संभवत: वह सदन की परंपरानुसार ही किया गया। उनका यह कथन भी उचित ही प्रतीत होता है कि कई बार ऐसे मौके आते हैं जब उचित निर्णय लेने पड़ते हैं। सदन उच्च मर्यादाओं से चलता है। यह सर्वोच्च पीठ है। यह सदन का सामूहिक कर्तव्य है कि वह ऐसे कदम उठाए जिससे सदन की गरिमा को बनाए रखा जा सके।
दरअसल यह पूरा मामला तब सामने आया जब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को चिट्ठी लिखकर यह दावा किया कि महुआ मोइत्रा ने कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से पैसे और गिफ्ट लेकर संसद में सवाल पूछे थे। दुबे ने कहा था कि महुआ मोइत्रा ने संसद में अब तक 61 सवाल पूछे हैं जिनमें से 50 अडाणी ग्रुप से जुड़े थे। उनका आरोप था कि मोइत्रा ने ऐसे सवाल पूछकर कारोबारी दर्शन हीरानंदानी के हितों की रक्षा कर आपराधिक साजिश रची।

YOU MAY ALSO LIKE

व्यवस्था में हो सुधार, अराजकता अस्वीकार्य

‘ब्रेन ड्रेन’ रोकने के लिए इसरो का बड़ा कदम

कोई भी सांसद संसद की गरिमा के साथ समझौता नहीं कर सकता क्योंकि यह मामला संसदीय शुचिता से भी जुड़ा है। सवाल एक सांसद की विश्वसनीयता का भी है। एक जनप्रतिनिधि के तौर पर एक सांसद के कुछ कर्तव्य होते हैं। इन कर्तव्यों के निर्वहन में उससे ईमानदारी बरतने की आशा भी की जाती है।

निशिकांत दुबे ने यह दावा एडवोकेट जय अनंत देहरदई की रिसर्च के आधार पर किया था। इतना ही नहीं, दुबे ने ये सवाल भी उठाया था कि इस बात की भी जांच की जानी चाहिए कि क्या महुआ मोइत्रा ने हीरानंदानी और हीरानंदानी ग्रुप को लोकसभा वेबसाइट के लिए अपने लॉगइन क्रेडेंशियल दिए थे? ताकि वो इसका इस्तेमाल अपने निजी फायदे के लिए कर सकें। इस सब के बीच एथिक्स कमेटी को दिया गया हीरानंदानी का एफिडेविट भी सामने आ गया था। इस हलफनामे में हीरानंदानी ने कबूल किया था कि महुआ ने उनके साथ अपनी संसदीय लॉग इन आईडी और पासवर्ड शेयर किया था जिससे वो (हीरानंदानी) महुआ की तरफ से सवाल कर सकें। स्वयं महुआ ने भी एक पत्रिका को दिए इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने अपना लॉगइन आईडी दर्शन को दिया था। हालांकि, महुआ ने ये भी कहा था कि सवालों को टाइप करने के बाद मेरे मोबाइल पर एक ओटीपी आता था। मेरे ओटीपी देने के बाद ही सवाल सब्मिट होता था। इसलिए यह कहना कि दर्शन मेरी आईडी से लॉगइन करता था और खुद से सवाल टाइप करता था ये हास्यास्पद है।

हालांकि अब सवाल यह है कि क्या कोई सांसद या विधायक अपना लॉगइन आईडी किसी बाहरी व्यक्ति को दे सकता है और क्या यह देश की गोपनीयता को खतरे में डालना एवं संसद अथवा विधायिका की गरिमा को भंग करना नहीं है? संसद की आचार समिति की रिपोर्ट में भी पैसे लेकर सवाल पूछने के मामले में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को गंभीर रूप से गलत आचरण के लिए दंड देने की मांग की गई थी और 17वीं लोकसभा की सदस्यता से निष्कासित करने की भी सिफारिश की गई थी। संसद की आचार समिति की सिफारिशों के आधार पर ही संसद में पैसा लेकर सवाल पूछने के मामले में तृणमूल सांसद के संसद से निष्कासन का निर्णय हुआ। अब इस प्रकरण से यह संदेश साफ है कि कोई भी सांसद संसद की गरिमा के साथ समझौता नहीं कर सकता क्योंकि यह मामला संसदीय शुचिता से भी जुड़ा है।
सवाल एक सांसद की विश्वसनीयता का भी है। एक जनप्रतिनिधि के तौर पर एक सांसद के कुछ कर्तव्य होते हैं। इन कर्तव्यों के निर्वहन में उससे ईमानदारी बरतने की आशा भी की जाती है। एक सांसद के रूप में मिलने वाली शक्तियों को तदर्थ रूप से किसी बाहरी व्यक्ति को सौंपा नहीं जा सकता क्योंकि वह वस्तुत: विधायिका की शक्तियां होती हैं। अत: संसदीय परंपराओं की सर्वोच्चता एवं गरिमा को बरकरार रखने के लिए कड़े कदम और फैसले लिए जाना सर्वथा उचित है। ऐसा नहीं होने पर संसद ही नहीं, देश की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation