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मोदी के मास्टर स्ट्रोक

अमेरिका व मिस्र की यात्रा में अभूतपूर्व समझौतों का अंबार

by ब्लिट्ज़ इंडिया
June 30, 2023
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Modi's master stroke
विनोद शील

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जितना भारतीय जनता में लोकप्रिय हैं उतना ही वह विदेश में रह रहे भारतीय नागरिकों के मन में बसते हैं। जब भी वे किसी विदेश यात्रा पर जाते हैं, हर जगह भारतीय समुदाय उनके स्वागत में पलक पांवड़े बिछाए नजर आता है और माहौल मोदी-मोदी के नारों से गूंजता दिखाई देता है। ऐसा ही इस बार पीएम मोदी की हाल ही में संपन्न हुई अमेरिका और मिस्र की राजकीय यात्रा में भी दिखाई दिया। पीएम मोदी की इन दोनों देशों की यात्रा को अब तक के किसी भी प्रधानमंत्री की सबसे सफलतम यात्रा की संज्ञा दी जा सकती है।
इस यात्रा में पीएम मोदी जहां भारत के चहुंमुखी विकास के लिए अनेक प्रकार के समझौतों के रूप में बहुत कुछ अपने साथ लेकर आए, वहीं उन देशों के विकास में भी भारत की ओर से सक्रिय साझेदारी का हाथ भी बढ़ाया और सबका साथ, विश्व का विकास व विश्व का विश्वास की अपनी मूल अवधारणा का भी प्रतिष्ठापन करने में सफल रहे जो किसी भी तरह से उनके ‘मास्टर स्ट्रोक’ से कम नहीं था क्योंकि वह ‘वसुधैव कुटुंबकम ्’ मंत्र में आस्था रखने वाले नेताओं में हैं। अगर यूं कहा जाए कि अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने एक बार नहीं, अनेक बार ‘मास्टर स्ट्रोक’ लगाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

यही नहीं, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर पूरी दूनिया का नेतृत्व करके उन्होंने भारत का जो मान बढ़ाया, वह अतुल्य है। 191 देशों के प्रतिनिधियों के साथ योग करने से यह दिन गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी शामिल हो गया। इसके अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के लॉन में आयोजित हुए इस कार्यक्रम में योग को मैत्री, शांति एवं समन्वय के साथ जी20 की थीम ‘एक विश्व, एक परिवार, एक भविष्य’ से जोड़ना तथा इसके जरिए भारत के सर्वमान्य सिद्धांत ‘वसुधैव कुटुम्बकम ्’ के संदेश की महत्ता को स्थापित करना भी पीएम मोदी के ‘मास्टर स्ट्रोक’ से कम नहीं था। 21 जून, 2015 और 21 जून, 2023 के बीच क्या फर्क है? आठ साल पहले जब योग दिवस के तहत पीएम मोदी ने हजारों लोगों के साथ योगाभ्यास किया था, तब कुछ लोगों ने इसे एक ‘सियासी शो’ की संज्ञा दे डाली थी। राजनीति, कूटनीति और सार्वजनिक जीवन में ऐसे ‘सियासी शो’ की क्या महत्ता है, इसका जीता जागता दृश्य न्यूयॉर्क में 21 जून, 2023 को यूएन मुख्यालय के लॉन में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में देखने को मिला।

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यह कहना गलत न होगा कि पीएम मोदी ने भारतीय अप्रवासियों और हिन्दुस्तानी परंपराओं की ताकत को समझा जबकि पूर्ववर्ती भारतीय प्रधानमंत्री संभवत: इसको नहीं पहचान सके।

इसका एक अन्य दृष्टांत 22 सितंबर, 2019 को अमेरिका के टेक्सास में हुआ ‘हाउडी मोदी’ का आयोजन भी है जिसमें तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में हजारों भारतीयों को पीएम मोदी ने संबोधित किया था। मोदी जानते थे कि अमेरिका में लगभग 45-46 लाख अप्रवासी भारतीय वहां के सियासी, सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य में अहम भागीदारी निभाते हैं। यही वजह है कि पहले ट्रंप और अब बाइडन मोदी के सहारे इन मतदाताओं में अपनी दखल और मजबूत बनाने की इच्छा रखते हैं। इस लिहाज से अमेरिका सहित तमाम देशों में भारत और भारतवंशी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसकी एक बानगी हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में भी तब देखने को मिली थी जब पीएम मोदी क्वाड बैठक के बाद वहां गए थे। वस्तुत: भारतवंशी इस समय आत्मविश्वास के भाव से परिपूर्ण हैं। बीते तीन दशकों से भारत की अर्थव्यवस्था का काफी विस्तार हुआ है और हम दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का यह भी अनुमान है कि जल्द ही भारत की अर्थव्यवस्था तीसरे स्थान पर पहुंच जाएगी। भारतीय बाजार और अर्थव्यवस्था कोरोना काल और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भी अपनी दृढ़ रफ्तार से आगे बढ़ रही है जिसे विश्व के अन्य विकसित व विकासशील देश भी देख और समझ रहे हैं। कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आगामी वर्ष भारत के हैं और पीएम मोदी ने इन आठ-नौ सालों में देश की साख को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए उल्लेखनीय प्रयास भी किए हैं।

आज विश्व व्यवस्था में बड़ा बदलाव आ रहा है। भारतवंशी ऋषि सुनक आज उस ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चुने गए हैं जिसने कभी भारत पर ही सदियों तक राज किया था। इससे समूची दुनिया के भारतवंशियों को गर्व की अनुभूति होना भी स्वाभाविक ही है। दुनिया की शीर्ष 500 कंपनियों में से 25 के सीईओ भारतीय मूल के हैं। हर महाद्वीप की महत्वपूर्ण संसदों, मंत्रिमंडलों और महाकाय संस्थानों में भी भारतवंशियों का बोलबाला है। उद्योग के कई क्षेत्रों में भारत का लोहा अब दुनिया मानने लगी है। सूचना-प्रौद्योगिकी में तो हमने एक विशेष स्थान बनाया है। भारतीय कंपनियां अब दुनिया के विभिन्न भागों में निवेश कर रही हैं। मिस्र को भी अपनी बढ़ती आबादी के कारण निवेश की दरकार है। इसलिए आज मिस्र को भी भारत की जरूरत है और उसके साथ भी भारत ने कई अहम समझौते हुए हैं। मिस्र में भी पीएम मोदी भारतवंशियों को उनकी मेहनत का श्रेय देना नहीं भूले। पीएम ने कहा कि भारत की सफलता में सबका योगदान है और विश्व में रह रहे समस्त भारतवासी नायक हैं। उनका यह वक्तव्य भी दुनिया के लिए मास्टर स्ट्रोक से कम नहीं था। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी को मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी ने मिस्र के सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द नाइल’ से भी सम्मानित किया। अमेरिका में एक सवाल उठाने वाले अमेरिकियों के समूह को भी पीएम मोदी ने अपने इस मास्टर स्ट्रोक से खामोश कर दिया कि ‘भारत लोकतंत्र की जननी है’ और ‘लोकतंत्र भारत के डीएनए’ में है। आज दुनिया जानना चाह रही है कि भारत क्या कर रहा है। सभी भारत के विकास, लोकतंत्र और विविधता को समझना चाह रहे हैं। भारत की शक्ति और गति दोनों बढ़ रहे हैं क्योंकि जब भारत बढ़ता है, तब दुनिया बढ़ती है।

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