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मिशन मून का आगाज चंद्रयान-3 की कामयाबी का इंतजार

by ब्लिट्ज़ इंडिया
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आस्था भट्टाचार्य

नई दिल्ली। अंतरिक्ष मिशन में भारत ने एक और ऊंची छलांग लगाई है। इसरो के एलवीएम 3-एम4 रॉकेट ने चंद्रयान-3 को लेकर श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से 14 जुलाई को दोपहर 2.35 पर ऐतिहासिक उड़ान भरी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी के वैज्ञानिक खुशी से झूम उठे।
करीब 40 दिनों की यात्रा पूरी करके चंद्रयान-3 का रोवर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा। इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने कहा कि चंद्रयान-3 का मकसद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करना है। पृथ्वी से चांद की दूरी करीब 3.84 लाख किलोमीटर है। चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग 23 अगस्त को शाम 5 बजकर 47 मिनट पर किये जाने की योजना है। चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास 23 अगस्त को किया जाएगा। सॉफ्ट लैंडिंग को तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण कार्य माना जाता है।
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कक्षा में स्थापित करने की योजना
इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ ने बताया कि 600 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत वाले चंद्रयान-3 मिशन को एक अगस्त से चंद्रमा की कक्षा में स्थापित करने की योजना है। इसके बाद प्रणोदन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल 17 अगस्त को अलग होंगे। इसके बाद अगर सब कुछ सही रहा तो 23 अगस्त की शाम 5 बजकर 47 मिनट पर सफल लैंडिंग की योजना है।

– 23 अगस्त की शाम 5 बजकर 47 मिनट पर चांद की सतह पर होगी लैंडिंग
-16 मिनट में पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा चंद्रयान-3
– सफल लैंडिंग होते ही भारत ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश बन जाएगा
– दक्षिणी ध्रुव के पास सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला दुनिया का पहला मिशन

22दिन बाद बदलेगा कक्षा
चंद्रयान-3 16 मिनट में पृथ्वी की कक्षा में पहुंच गया। 22 दिन पृथ्वी के आसपास घूमने के बाद चंद्रयान कक्षा बदलकर चांद की ओर बढ़ेगा। 6 दिनों में चांद की कक्षा में आने के बाद 13 दिन चंद्रमा के चक्क र लगाएगा। फेज-3 में चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करना है। इसके बाद लैंडिंग फेज की बारी आएगी। चांद पर चंद्रयान-3 की सॉफ्ट-लैंडिंग होते ही भारत एक खास क्लब में शामिल हो जाएगा। इसरो का पिछला मून मिशन ‘चंद्रयान-2’ आखिरी दौर में फेल हो गया था। चंद्रयान-3 को पिछली गलतियों से सबक लेकर डिजाइन किया गया है। चांद पर सफल लैंडिंग के साथ ही भारत ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश बन जाएगा। अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ही चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कर पाए हैं। इसरो ने चंद्रयान-3 को कई तरह के टेस्ट से गुजारा है।

‘चंद्रयान’ भारत का महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष प्रोजेक्ट है। इसके जरिए भारतीय वैज्ञानिक चांद के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी हासिल करना चाहते हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने चांद से जुड़े मिशन की घोषणा की थी।

2003 में शुरू हुई थी मिशन चांद की तैयारी

15 अगस्त, 2003 : तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने चंद्रयान कार्यक्रम की घोषणा की थी।
22 अक्टूबर, 2008: चंद्रयान-1 ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी।
8 नवंबर, 2008 : चंद्रयान-1 ने चंद्र स्थानांतरण प्रक्षेप पथ में प्रवेश किया।
14 नवंबर, 2008 : मून प्रोब चंद्रयान -1 से बाहर निकला और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
28 अगस्त, 2009 : इसरो के अनुसार चंद्रयान 1 कार्यक्रम का अंत।
22 जुलाई, 2019 : चंद्रयान-2 को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया।
20 अगस्त, 2019 : चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान चंद्रमा की कक्षा में स्थापित हुआ।
2 सितंबर, 2019 : विक्रम लैंडर 100 किमी की चंद्रमा की परिक्रमा करते समय अलग हुआ, बाद में लैंडर से कनेक्शन टूट गया।
14 जुलाई, 2023 : चंद्रयान-3 की सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लांिचंग हुई।
23 अगस्त, 2023 : अस्थायी रूप से लैंडर की चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग तय की गई है।

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