ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।मिडिल ईस्ट में तनाव और युद्ध के कारण एलपीजी सप्लाई पर पड़े असर से सबक लेते हुए केंद्र सरकार ने पहली बार देश की सरकारी और प्राइवेट रिफाइनरीज व अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए एलपीजी उत्पादन के अधिकतम टारगेट तय कर दिए हैं।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने विगत सप्ताह जारी आदेश में 21 कंपनियों के लिए कुल 63,810 टन प्रतिदिन एलपीजी उत्पादन की क्षमता और टारगेट निर्धारित किया है।
यह लक्ष्य वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश में हुए कुल घरेलू एलपीजी उत्पादन (35,900 टन प्रतिदिन) से दोगुने से भी अधिक है और देश की कुल रोजाना खपत का लगभग 70% कवर करता है। जब भी बाजार में गैस की कमी या सप्लाई बाधित होगी, यह नया नियम तुरंत लागू हो जाएगा।
रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी को सबसे बड़ा 18,000 टन का टारगेट
सरकार के आदेश के अनुसार, सबसे बड़ा हिस्सा प्राइवेट सेक्टर की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को दिया गया है। रिलायंस की गुजरात स्थित जामनगर की डोमेस्टिक-टैरिफ एरिया रिफाइनरी को रोजाना 18,000 टन एलपीजी तैयार करने का लक्ष्य मिला है।
प्राइवेट सेक्टर की ही रूस के रोसनेफ्ट समर्थित नायरा एनर्जी की वाडीनार रिफाइनरी को रोजाना 4,480 टन एलपीजी उत्पादन करने का लक्ष्य दिया गया है।
देश में 64% एलपीजी इम्पोर्ट पर निर्भरता
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में कुल 33.2मिलियन टन एलपीजी की खपत हुई थी (लगभग 91,000 टन प्रतिदिन)। इसमें से केवल 13.1 मिलियन टन (35,900 टन प्रतिदिन) का उत्पादन ही देश में हुआ था, जबकि 21.3 मिलियन टन (58,400 टन प्रतिदिन) एलपीजी विदेश से मंगवानी पड़ी थी।
इम्पोर्ट पर 64% से ज्यादा निर्भरता के कारण जब ईरान युद्ध के चलते स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का रास्ता बाधित हुआ, तो भारत में सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई थी। भारत अपनी जरूरत का 90% इम्पोर्ट इसी समुद्री रास्ते से सऊदी अरब जैसे देशों से करता है।
मार्च में संकट के दौरान उठानी पड़ी थीं इमरजेंसी पाबंदियां
मिडिल ईस्ट संकट के दौरान मार्च में सरकार को पेट्रोकेमिकल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली गैस को एलपीजी बनाने में डायवर्ट करना पड़ा था। उस समय डोमेस्टिक प्रोडक्शन बढ़ाकर 55,000 टन प्रतिदिन तक किया गया था। संकट के समय कमर्शियल और इंडस्टि्रयल यूजर्स को बिक्री रोकनी पड़ी थी, घरों में एलपीजी रीफिल बुकिंग का समय बढ़ा दिया गया था और लोगों को पीएनजी पर शिफ्ट होने के लिए प्रेरित किया गया था। जून के मध्य में स्थिति सामान्य होने पर ये पाबंदियां हटाई गई थीं।
कंपनियों को इन्फ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी अपग्रेड करें
मंत्रालय ने अपने आदेश में साफ किया है कि सभी सरकारी और प्राइवेट रिफाइनरीज व अपस्ट्रीम कंपनियों को एलपीजी स्टोरेज, निकासी और ट्रांसपोर्टेशन (रेल/सड़क टैंकर) के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित और मेंटेन करना होगा।
6 महीने में रिव्यू होगा प्रोडक्शन शेड्यूल
सरकार ने जरूरत पड़ने पर रिफाइनरीज को उत्पादन बढ़ाने और इनपुट स्ट्रीम के अन्य इस्तेमाल पर रोक लगाने के अधिकार अपने पास सुरक्षित रखे हैं। नया फ्रेमवर्क हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को अपडेट किया जाएगा। इसमें नई रिफाइनरीज, नए अपस्ट्रीम गैस फील्ड्स और तकनीक व इंफ्रास्ट्रक्चर में हुए सुधारों के हिसाब से नए लक्ष्य जोड़े जाएंगे।














