पशु मरा तो दावा अब अपनी भाषा में
नई दिल्ली। भैंस मरने के बाद जो सबसे मुश्किल काम होता है, वह भैंस का नहीं, कागज का होता है। दावा किस दफ्तर में जाएगा, फॉर्म किस भाषा में भरा जाएगा, और जवाब कब आएगा।
पशुपालन और डेयरी विभाग का पशुधन बीमा पोर्टल आज नई दिल्ली में शुरू हो रहा है। मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी और पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह इसका शुभारंभ करेंगे। यह बात मंत्रालय की 27 सितंबर की विज्ञप्ति में कही गई है।
क्या-क्या एक जगह आया
विभाग की पशुधन बीमा योजना में बीमित पशुओं के चार काम इसी एक मंच से होंगे —
•पॉलिसी जारी करना •दावों का निपटारा •निगरानी
•रिपोर्टिंग
पोर्टल हिंदी और अंग्रेजी के अलावा 11 क्षेत्रीय भाषाओं में चलेगा, यानी कुल तेरह भाषाओं में।
भाषाओं की यह गिनती कागजी नहीं है। जिस पशुपालक का नुकसान अपनी भाषा में हुआ है, वह दावा भी उसी भाषा में लिखेगा — योजना जिस भाषा में बनी थी, उसमें नहीं।
असली फर्क कहां पड़ेगा
पशुधन बीमा की सबसे बड़ी अड़चन आज तक आंकड़े की रही है। दावे कहां-कितने आए, कहां जल्दी निपटे, कहां अटके — यह ब्योरा एक जगह कभी नहीं रहा। ऐसे में बीमा कंपनी जोखिम की कीमत तय नहीं कर पाती। और जो कीमत तय नहीं होती, वह हमेशा ऊंची रखी जाती है।
रियल-टाइम निगरानी का मतलब यही है। भारत के पशुपालक को इससे सस्ता और तेज बीमा मिलने का रास्ता खुलता है। डेयरी सहकारी समितियों से बाहर का जो बड़ा हिस्सा अब तक बीमा के दायरे से बाहर था, उस तक पहुंचने की गुंजाइश भी बनती है।
ब्लिट्ज की सलाह
दावा निपटने में लगे दिनों का राज्यवार आंकड़ा हर तिमाही सार्वजनिक कर दिया जाए। पशुपालक को दिखेगा कि उसके राज्य में कितना वक्त लगता है, और काम तेज होगा।
बस्तर का चूरा अब पेलेट बनेगा
हैदराबाद। बैलाडीला की खदानों से निकलने वाला लौह अयस्क का महीन चूरा सालों तक बेकार पड़ा रहा। भट्ठी के लिए बहुत बारीक, और ट्रक से ढोने के लिए बहुत भारी।
एनएमडीसी लिमिटेड ने नगरनार में अपना 20 लाख टन सालाना क्षमता का पेलेट संयंत्र चालू कर दिया है। यह 5,427 करोड़ रुपये की उस एकीकृत परियोजना का आखिरी हिस्सा है जिसमें बचेली का नया प्रसंस्करण संयंत्र और 1.5 करोड़ टन सालाना क्षमता की स्लरी पाइपलाइन भी शामिल हैं। यह ब्योरा इस्पात मंत्रालय की 27 सितंबर की विज्ञप्ति में है।
पाइपलाइन 135 कि.मी. लंबी है और बस्तर और दंतेवाड़ा जिलों के 61 गांवों से होकर जाती है। विज्ञप्ति के मुताबिक इसे सड़क से ढुलाई का विकल्प देने और रेलवे पर निर्भरता घटाने के लिए बनाया गया है।
दो आंकड़े साथ रखिए तो नीयत दिखती है।
पाइपलाइन की क्षमता 1.5 करोड़ टन सालाना है और जो संयंत्र उससे चलता है, वह 20 लाख टन लेता है — साढ़े सात गुना ज्यादा। यह जगह उन लाइनों के लिए छोड़ी गई है जो अभी बनी ही नहीं हैं। 135 कि.मी. पर 5,427 करोड़ रुपये का मतलब है हर कि.मी. पर 40.2 करोड़ रुपये, और इतना खर्च अकेली एक लाइन के लिए नहीं होता।
अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अमिताभ मुखर्जी खराब मौसम के कारण मौके पर नहीं पहुंच सके और पहला उत्पादन हैदराबाद मुख्यालय से देखा। उन्होंने कहा, “एनएमडीसी में सभी के लिए आज अत्यंत गर्व का दिन है। इस परियोजना को पूरा करना आसान नहीं था।”
पेलेट सिर्फ गोल किया हुआ अयस्क नहीं होता। यह नापा हुआ, पका हुआ चारा है जिसका लोहा-अंश पता होता है, इसलिए भट्ठी ज्यादा स्थिर चलती है और हर टन धातु पर कोक कम लगता है। चूरे की जगह पेलेट बेचने का मतलब है कि बैलाडीला का वही लोहा राज्य से कच्चे खनिज की तरह नहीं, बने हुए माल की तरह बाहर जाएगा।
एक नजर में
•परियोजना लागत : 5,427 करोड़ रुपये।
•पेलेट संयंत्र की क्षमता : 20 लाख टन सालाना।
•स्लरी पाइपलाइन की क्षमता : 1.5 करोड़ टन सालाना।
•पाइपलाइन की लंबाई : 135 कि.मी., 61 गांवों से होकर।
•दीर्घकालिक अयस्क •क्षमता का लक्ष्य : 10 करोड़ टन।
तुलना
•पाइपलाइन की क्षमता : 1.5 करोड़ टन सालाना — बड़ा आंकड़ा, 100%।
•पेलेट संयंत्र की क्षमता : 20 लाख टन सालाना — पाइपलाइन का 13%।
पाइपलाइन उससे 650% ज्यादा ढो सकती है।
हमारा हिसाब
5,427 करोड़ रुपये ÷ 135 कि.मी. = 40.2 करोड़ रुपये प्रति कि.मी.।
1.5 करोड़ ÷ 20 लाख = 7.5 गुना।
भारत को क्या मिला
जो महीन चूरा अब तक बिकता नहीं था, उससे भारतीय भट्ठियों के लिए घरेलू पेलेट।
एक खनिज जिले से अब कच्चा पत्थर नहीं, बना हुआ माल बाहर जाएगा।
ब्लिट्ज की सराहना
एनएमडीसी लिमिटेड, अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अमिताभ मुखर्जी और इस्पात मंत्रालय।
आंकड़े इस्पात मंत्रालय की 27 सितंबर 2026 की विज्ञप्ति से; pib.gov.in पर जांचे।
साबरमती से चली पहली एलएनजी ट्रेन
अहमदाबाद। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने साबरमती रेलवे स्टेशन से देश की पहली एलएनजी ट्रेन को हरी झंडी दी। उसी मंच से उन्होंने 1,472 करोड़ रुपये के रेल विकास कार्यों का लोकार्पण भी किया। यह गृह मंत्रालय की 27 सितंबर की विज्ञप्ति में दर्ज है। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल मौजूद थे।
इन कामों में 700 करोड़ रुपये का डब्ल्यूएजी-12 मेंटेनेंस शेड और साबरमती-कलोल खंड पर 48 करोड़ रुपये की कवच प्रणाली शामिल है।
अहमदाबाद-पालनपुर और अहमदाबाद-सामाख्याली खंडों पर भी कवच और साबरमती-सरखेज मार्ग का दोहरीकरण शुरू हुआ है।
डब्ल्यूएजी-12 में 12,000 हॉर्सपावर की ट्विन-सेक्शन ताकत है और विज्ञप्ति के मुताबिक यह अकेला करीब 600 ट्रक का माल खींच सकता है। पहले इसी काम में दो इंजन लगते थे।
दो आंकड़े साथ पढ़ने लायक हैं।
•रेलवे ने 2015-16 में 293 करोड़ लीटर डीजल जलाया और 2024-25 में 108 करोड़ लीटर — 63.1 फीसदी की गिरावट। •विद्युतीकरण 2010-11 में साल भर में 75 कि.मी. होता था, 2023-24 में 7,188 कि.मी. हुआ, यानी 95.8 गुना रफ्तार।
•अब नेटवर्क 99.6 फीसदी विद्युतीकृत है।
कांडला में बनेगा जहाजों का ईंधन
गांधीधाम। देश के पहले बंदरगाह-आधारित ई-मेथनॉल संयंत्र की नींव दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी, कांडला में रखी गई। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने शिलान्यास किया। यह मंत्रालय की 26 सितंबर 2026 की विज्ञप्ति में है।
रोज 150 टन क्षमता का यह संयंत्र नवीकरणीय बिजली, पानी और जैविक कार्बन डाइऑक्साइड से हरा ईंधन बनाएगा और एशिया-यूरोप कारोबारी गलियारे पर चलने वाले जहाजों को देगा। मंत्रालय के मुताबिक कीमत करीब 750 डॉलर प्रति टन रहेगी, जबकि दुनिया की दर करीब 1,300 डॉलर है। यहीं निकाले गए हिसाब से यह 42.3 फीसदी कम है।
कुल लागत 2,300 करोड़ रुपये है। यह दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी और नामरूप की असम पेट्रो-केमिकल्स लिमिटेड का साझा काम है, पूंजी का अनुपात 76:24। पहले चरण में 1,200 करोड़ रुपये से रोज 50 टन की क्षमता जनवरी 2027 तक, दूसरे चरण में 1,100 करोड़ रुपये से रोज 100 टन मार्च 2027 तक। मंत्रालय को 3,500 से ज्यादा सीधे और अप्रत्यक्ष रोजगार की उम्मीद है।


एक शाम में छह पदक
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एशियाई खेल 2026 में पदक जीतने वाले छह भारतीय खिलाड़ियों को बधाई दी। छहों संदेश 27 सितंबर को पत्र सूचना कार्यालय की अलग-अलग विज्ञप्तियों के तौर पर जारी हुए।
तेजस्विन शंकर को पुरुष डेकाथलॉन में कांस्य मिला। पारुल चौधरी ने महिला 3000 मीटर स्टीपलचेज में कांस्य और हरिता भद्रा ने महिला 200 मीटर में कांस्य जीता। एंसी सोजन को महिला लंबी कूद में रजत मिला। स्क्वॉश में अनाहत सिंह ने महिला एकल और अभय सिंह ने पुरुष एकल में रजत जीता।
छह में से दो पदक स्क्वॉश के एकल से आए — वह खेल जिसमें भारत एक दशक से चुपचाप तैयारी कर रहा है। डीडी न्यूज ने 28 सितंबर 2026 को बताया कि नौवें दिन भारत का कार्यक्रम पुरुष क्रिकेट, भाला फेंक और स्टीपलचेज से शुरू होता है।
जोधपुर में सात देशों की वायुसेनाएं
जोधपुर। भारतीय वायुसेना ने जोधपुर वायुसेना स्टेशन पर अभ्यास तरंग शक्ति-2026 का परिचालन चरण शुरू किया। रक्षा मंत्रालय की 27 सितंबर की विज्ञप्ति के मुताबिक यह बहुपक्षीय अभ्यास 26 सितंबर से 12 अक्टूबर 2026 तक चलेगा, विषय है साझेदारी में शक्ति।
सात मित्र देश हिस्सा ले रहे हैं — ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, जर्मनी, श्रीलंका और बांग्लादेश। विदेशी विमानों में एफ-35 लाइटनिंग-2, राफेल, एफ-16, ए400एम, एमआरटीटी, सी-130, सी-130जे और केसी-30ए शामिल हैं। कई और देश पर्यवेक्षक के तौर पर आए हैं।
यह दूसरा संस्करण है, पहला 2024 में हुआ था। उड़ान के अलावा सेमिनार, विदेशी दलों के लिए औद्योगिक भ्रमण, सेखों मैराथन, विरासत भ्रमण और योग सत्र भी हैं। यही हिस्सा आई हुई वायुसेनाओं को भारत का एयरोस्पेस और औद्योगिक ढांचा दिखाता है, सिर्फ रनवे नहीं।
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दिल्ली में नैनोमेडिसिन की विश्व कांग्रेस
नई दिल्ली। विज्ञान भवन में विश्व नैनोमेडिसिन कांग्रेस 2026 शुरू हुई। मेजबानी दिल्ली विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संकाय के नैनो मेडिकल साइंसेज संस्थान ने की है और 2,000 से ज्यादा लोग शामिल हैं। यह ब्योरा उद्घाटन सत्र पर डीडी न्यूज की 27 सितंबर की रिपोर्ट में है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सत्र में बताया कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग नैनोमेडिसिन की 210 शोध परियोजनाओं को 174 करोड़ रुपये की मदद दे रहा है। यहीं निकाले गए भाग से यह औसतन 82.86 लाख रुपये प्रति परियोजना बैठता है — छोटी रकम, दूर तक फैली हुई।
ये परियोजनाएं लक्षित दवा पहुंचाने, कैंसर और संक्रामक रोगों की नैनोमेडिसिन, टीका पहुंचाने, नैनो जांच और इमेजिंग, पुनर्योजी चिकित्सा, नैनो-विषविज्ञान और मुंह से लेने वाले इंसुलिन नैनोकणों तक फैली हैं। कांग्रेस के अध्यक्ष स्टैनफोर्ड के नोबेल विजेता रोजर डी. कोर्नबर्ग हैं।
यह भी साफ कह देना चाहिए कि आंकड़े मंत्री के भाषण के हैं और विभाग की परियोजनावार सूची संस्करण बंद होने तक नहीं मिली।













