अफसर चुनने वाला आयोग सौ साल का हुआ
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026जिस परीक्षा की तैयारी में देश के लाखों नौजवान अपने सबसे अच्छे साल लगाते हैं, वह आज सौ साल पूरे कर रही है। संघ लोक सेवा आयोग का शताब्दी समारोह आज भारत मंडपम में है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वहां एक सिक्का, एक डाक टिकट और एक किताब जारी करेंगे।
किताब ही सबसे दिलचस्प चीज है। प्रधानमंत्री कार्यालय की 28 सितंबर की घोषणा के मुताबिक उसका नाम है- ‘100 लैंडमार्क जजमेंट्स- शेपिंग द पालिसीज
आफ यूपीएससी
एंड पब्लिक सर्विस कमीशंज इन इंडिया’ यानी सौ ऐसे अदालती फैसले, जिन्होंने आयोग को बताया कि उसका अधिकार कहां खत्म होता है।
सौ साल में क्या-क्या
आयोग 1926 में बना। शताब्दी वर्ष 1 अक्टूबर 2025 को शुरू हुआ था, यह आयोग की अपनी विज्ञप्ति में दर्ज है। समापन का दो दिन का कार्यक्रम 30 सितंबर 2026 को शताब्दी समारोह — मंथन से शुरू हुआ, उसी जगह।
हॉल में राज्यों के लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्य भी हैं, और यही हिस्सा सबसे काम का है। राज्यों के आयोग मिलकर हर साल केंद्र से कहीं ज्यादा भर्तियां करते हैं। आयोग पर जो फैसला लागू होता है, वह उन सब पर भी लागू होता है। सवाल बनाने का तरीका हो, दिव्यांगता के प्रमाणपत्र का बरताव हो, या वेटिंग लिस्ट कितने दिन जिंदा रहे — हर बात पर।
परीक्षा क्यों मायने रखती है
खुली प्रतियोगी परीक्षा का मतलब है यह तय करना कि शासन कौन करेगा। 1926 से पहले इस देश की बड़ी नौकरियां लंदन में भरी जाती थीं। आयोग के ये सौ साल वही सौ साल हैं जिनमें वह भर्ती लंदन से दिल्ली आई। फिर वह एक ऐसे पाठ्यक्रम पर आई जो कोई भी पढ़ सकता है। और आज किसी कस्बे का लड़का या लड़की टॉप कर जाती है।
भारत को इससे क्या मिला, यह सिक्के में नहीं है। सौ साल पुरानी एक भर्ती संस्था अपने मौके पर वही कानून छाप रही है जो उसे बांधता है। हॉल में बैठे हर राज्य के आयोग के लिए यह एक इशारा है — ये बंधन ही संस्था हैं, उसके रास्ते का रोड़ा नहीं।
एक नजर में
•संघ लोक सेवा आयोग की स्थापना : 1926
•शताब्दी वर्ष शुरू : 1 अक्टूबर 2025
•समापन कार्यक्रम : 30 सितंबर और 1 अक्टूबर , भारत मंडपम, नई दिल्ली
•प्रधानमंत्री जारी करेंगे : एक स्मारक सिक्का, एक स्मारक डाक टिकट, एक किताब
•किताब : ‘100 लैंडमार्क जजमेंट्स- शेपिंग द पालिसीज आफ यूपीएससी
एंड पब्लिक सर्विस कमीशंज इन इंडिया’
तुलना
आयोग के बीते बरस : •100 — पूरा फासला, 100%
•किताब जितने बरस समेटती है : 100 — •वही फासला, साल में एक फैसला।
किताब में आयोग के हर बीते साल के हिसाब से औसतन एक बड़ा फैसला है।
हमारा हिसाब
1926 से 2026 = 100 साल। 100 फैसले ÷ 100 साल = साल में एक। यह हिसाब आयोग के स्थापना वर्ष और किताब के नाम से यहीं निकाला गया; घोषणा में यह औसत नहीं है।
भारत को क्या मिला
सौ साल पुरानी भर्ती संस्था अपने ही अधिकार की हद तय करने वाले फैसले छाप रही है, और वह भी हर राज्य के आयोग के सामने।
ब्लिट्ज की सराहना
संघ लोक सेवा आयोग, जिसने अपनी तारीफ की किताब के बजाय अपने खिलाफ आए फैसलों की किताब चुनी।
आंकड़े प्रधानमंत्री कार्यालय की 28 सितंबर की घोषणा और शताब्दी वर्ष की शुरुआत वाली पीआईबी विज्ञप्ति से; pmindia.gov.in और pib.gov.in पर जांचे।
सरकारी रुपये पर करीब दो रुपये निजी
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर। नई दवा बनाने में जो पैसा लगता है, वह आम तौर पर सरकार का नहीं होता और भारत में आम तौर पर लगता भी नहीं। औषधि विभाग की 30 सितंबर की विज्ञप्ति के मुताबिक अब 41 प्रोजेक्ट मंजूर हुए हैं। इनमें सरकारी सहायता करीब 1,600 करोड़ रुपये है। उसके पीछे 3,020 करोड़ रुपये निजी निवेश आने की उम्मीद है।
यानी हर सरकारी रुपये पर 1.89 रुपये निजी। यह हिसाब हमने विज्ञप्ति के दो आंकड़ों से निकाला है; विज्ञप्ति खुद यह अनुपात नहीं छापती।
पैसा कहां गया
41 में से 27 प्रोजेक्ट नई दवाओं के हैं, नौ नए चिकित्सा उपकरणों के और पांच कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स और बायोसिमिलर्स के — यह विभाग ने लिखा है। हमारे हिसाब से नई दवाएं 65.9 फीसदी मंजूरियां ले गईं। 19 प्रोजेक्ट स्टार्टअप और छोटे-मंझोले उद्यम चला रहे हैं और 22 बड़ी कंपनियां, यानी छोटी कंपनियों के पास 46.3 फीसदी काम है। औसत सरकारी सहायता निकलती है 39 करोड़ रुपये प्रति प्रोजेक्ट।
नाम भी छपे हैं : बायोकॉन, भारत बायोटेक, सन फार्मा, वॉकहार्ट, जाइडस और मैनकाइंड फार्मा के साथ पांडोरम टेक्नोलॉजीज, सेलोजेन थेरेप्यूटिक्स, ऑरिजीन ऑन्कोलॉजी और बगवर्क्स रिसर्च।
टीबी का टीका देखिए
छह प्रोजेक्ट विभाग के रणनीतिक प्राथमिकता ढांचे में आए, जिसमें नजरअंदाज की गई उष्णकटिबंधीय बीमारियों, दुर्लभ बीमारियों, दवा-प्रतिरोध और टीकों पर ज्यादा मदद मिलती है। ये छह हैं — बैक्टीरियल निमोनिया और मेनिन्जाइटिस, डेंगू, इन्फ्लूएंजा, और अगली पीढ़ी का टीबी का टीका।
इनमें टीबी का टीका सबसे बड़ी बात है। टीबी का सबसे बड़ा बोझ भारत पर है और जांच की किटें तथा नई दवाएं हम बाहर से खरीदते हैं। घर में बना एक उम्मीदवार टीका अगर ट्रायल तक पहुंचा, तो कार्यक्रम की सप्लाई ही नहीं, उसकी कीमत भी बदलेगी।
बाकी सूची में दवा-प्रतिरोधी संक्रमण की एंटीबैक्टीरियल दवा है, आंख के कॉर्निया के लिए एक्सोसोम आधारित इलाज, और इन-विवो सीएआर-टी प्लेटफॉर्म। साथ में मरीज से लिए ब्रेस्ट कैंसर ऑर्गेनॉइड, आरएनए को निशाना बनाने वाली एंटीवायरल तकनीक, और टीबी पकड़ने का माइक्रोफ्लुइडिक प्लेटफॉर्म।
पहले दौर के बाकी आवेदन अभी जांचे जा रहे हैं और विभाग कहता है कि नतीजे आने वाले महीनों में आएंगे। तो 1,600 करोड़ रुपये पहले दौर की पहली किस्त है, पूरा दौर नहीं।
एक नजर में
•सरकारी सहायता, पहला दौर : करीब 1,600 करोड़ रुपये
•निजी निवेश की उम्मीद : 3,020 करोड़ रुपये
•कुल शोध और विकास निवेश : करीब 4,620 करोड़ रुपये
•मंजूर प्रोजेक्ट : 41 — 12 शुरुआती चरण में, 29 बाद के चरण में
•प्राथमिकता के हिसाब से : 27 नई दवाएं, नौ चिकित्सा उपकरण, पांच कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स और बायोसिमिलर्स
•कंपनी के आकार से : 19 स्टार्टअप और एमएसएमई, 22 बड़ी कंपनियां
•रणनीतिक प्राथमिकता ढांचे में : छह
तुलना
•निजी निवेश की उम्मीद : 3,020 करोड़ रुपये — बड़ा हिस्सा, 100%
•मंजूर सरकारी पैसा : 1,600 करोड़ रुपये — •निजी हिस्से का 53%
•निजी निवेश सरकारी सहायता से 88.8% ज्यादा है।
हमारा हिसाब
3,020 ÷ 1,600 = हर सरकारी रुपये पर 1.89 रुपये निजी। 1,600 ÷ 41 = 39 करोड़ रुपये औसत सरकारी सहायता प्रति प्रोजेक्ट। 27 ÷ 41 = 65.9% मंजूरियां नई दवाओं में। 19 ÷ 41 = 46.3% स्टार्टअप और एमएसएमई के पास। 1,600 + 3,020 = 4,620, जो विज्ञप्ति के छपे कुल से मिलता है।
भारत को क्या मिला
मात्रा पर बढ़ा दवा उद्योग अब मूल खोज के पीछे निजी पूंजी लगा रहा है, और सबसे ऊंची प्राथमिकता के छह में एक घरेलू टीबी टीका है।
ब्लिट्ज की सराहना
औषधि विभाग, जिसने निजी निवेश का आंकड़ा सरकारी आंकड़े के साथ छापा — इसी से अनुपात जांचा जा सकता है।
आंकड़े औषधि विभाग की 30 सितंबर 2026 की विज्ञप्ति, रिलीज आईडी 2317296 से; pib.gov.in पर जांचे।
परिधान निर्यातकों की छूट तीन महीने बढ़ी
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर। तिरुपुर, लुधियाना और नोएडा के छोटे निर्यातक को जनवरी की खेप का भाव आज बताना है, और अब वह जान गया है कि छूट बीच में नहीं हिलेगी। वस्त्र मंत्रालय की 30 सितंबर की विज्ञप्ति के मुताबिक आरओएससीटीएल योजना मौजूदा दरों पर 31 दिसंबर तक बढ़ा दी गई है — 92 दिन और।
योजना 7 मार्च 2019 से चल रही है। यह उन राज्य और केंद्रीय करों की भरपाई करती है जो कीमत में छिपे रह जाते हैं और किसी और रास्ते से वापस नहीं मिलते। सोच सीधी है — घरेलू टैक्स भारतीय कमीज की कीमत के अंदर बैठकर विदेश नहीं जाना चाहिए।
पहुंच वाला आंकड़ा सबसे काम का है। मंत्रालय लिखता है कि 2025-26 में योजना से 444 से ज्यादा जिलों के 15,400 से ज्यादा निर्यातकों को फायदा हुआ, और लाभार्थी मुख्य रूप से छोटे-मंझोले उद्यम थे। हमारे हिसाब से यह जिले में करीब 35 निर्यातक बैठता है — यानी यह उद्योग उतने क्लस्टरों में सिमटा नहीं है जितना लोग मान लेते हैं।
पांच साल में सबसे साफ सितंबर
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर दिल्ली में इस सितंबर में सांस लेना पिछले पांच सितंबरों से बेहतर रहा। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की 30 सितंबर की विज्ञप्ति के मुताबिक सितंबर 2026 का मासिक औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 102 रहा। मुकाबले में 2025 में 105, 2024 में 105, 2023 में 108 और 2022 में 104 था।
नौ महीने की कतार ज्यादा मजबूत बात कहती है। जनवरी से सितंबर 2026 तक दिल्ली में 194 दिन ऐसे रहे जब दैनिक औसत सूचकांक 200 से नीचे था, जबकि 2022 में ऐसे 146 दिन थे। यानी उतने ही महीनों में 48 दिन ज्यादा — हमारे हिसाब से एक-तिहाई की बढ़त। ‘खराब से अत्यंत खराब+’ वाले दिन 127 से घटकर 79 रह गए, 37.8 फीसदी कम।
एक आंकड़ा कहानी में फिट नहीं बैठता, और उसे कहना जरूरी है। 28 सितंबर 2026 तक औसत पीएम2.5 69 µg/m³ रहा, जो 2025 के बराबर है। सूचकांक सुधरा, धूल के महीन कण वहीं रह गए। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग कहता है कि वह हितधारकों के साथ काम कर रहा है और आगे कोशिश और तेज होगी।
एक नजर में
•दिल्ली का मासिक औसत सूचकांक, सितंबर 2026 : 102
•सूचकांक 200 से नीचे वाले दिन, जनवरी से सितंबर 2026 : 194
•’खराब से अत्यंत खराब+’ वाले दिन, जनवरी से सितंबर 2026 : 79
•औसत पीएम 2.5, 1 जनवरी से 28 सितंबर 2026 : 69 µg/m³
तुलना
•सूचकांक 200 से नीचे वाले दिन, 2026 : 194 — पांच साल में सबसे अच्छा, 100%
•वही दिन, 2023 : 193 — सबसे अच्छे का 99%
•वही दिन, 2024 : 188 — सबसे अच्छे का 97%
•वही दिन, 2025 : 187 — सबसे अच्छे का 96%
• वही दिन, 2022 : 146 — सबसे अच्छे का 75%
•2026 की गिनती 2022 से 32.9% ज्यादा है।
हमारा हिसाब
194 − 146 = 48 दिन ज्यादा। (127 − 79) ÷ 127 = 37.8% कम खराब दिन। (81 − 69) ÷ 81 = 2024 से 14.8% कम PM2.5। यह विज्ञप्ति की पांच साल की कतार से यहीं निकाला गया; विज्ञप्ति इनमें से कोई फर्क नहीं छापती।
भारत को क्या मिला
चार साल पहले के मुकाबले राजधानी के काम के साल में 48 दिन ज्यादा, जब सांस लेना ठीक रहा — वही सूचकांक, वही केंद्र।
ब्लिट्ज की सराहना
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग, जिसने इस सितंबर का अकेला आंकड़ा नहीं, पांच साल की पूरी कतार छापी — इसी से पाठक रुझान जांच सकता है।
आंकड़े पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की 30 सितंबर 2026 की विज्ञप्ति, रिलीज आईडी 2317308 से; pib.gov.in पर जांचे।
135 साल पुराना बैंक कानून बदला
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर। बैंक धोखाधड़ी का मुकदमा अब थोड़ा छोटा होगा। बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 2026 आज से लागू हो गया और 1891 का कानून हट गया, यह आकाशवाणी ने 1 अक्टूबर को बताया। पुराना कानून 135 साल किताब पर रहा, और वह स्याही से लिखे बही-खातों के जमाने का था।
नया कानून तकनीक को लेकर निरपेक्ष है। वह भौतिक, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल और क्लाउड पर रखे बैंक रिकॉर्ड को मानता है। और साफ कहता है कि बैंक की बही का इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड सबूत के तौर पर ग्राह्य, वैध और लागू करने योग्य है। प्रमाणन मैनुअल, डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर से हो सकेगा। राष्ट्रपति की मंजूरी 13 अगस्त 2026 को मिली थी, यानी लागू होने से 49 दिन पहले।
आम आदमी को इससे क्या — वह शाखा का रिकॉर्ड जिसे पहले अदालत में मनवाना पड़ता था, अब सीधे ग्राह्य होकर पहुंचता है।
तटीय मिशन 2.0 के नियम जारी
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर।समुद्र किनारे बसे गांव-कस्बों के लिए अब एक ही नियम-किताब होगी। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 30 सितंबर को नई दिल्ली में राष्ट्रीय तटीय मिशन 2.0 के दिशानिर्देश जारी किए। यह मंत्रालय की उसी तारीख की विज्ञप्ति में है। यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, मंजूर रकम 767 करोड़ रुपये, और यह नौ तटीय राज्यों तथा चार केंद्र शासित प्रदेशों में 2030-31 तक चलेगी।

मिशन में जोखिम का आकलन, पारिस्थितिकी की बहाली और प्रदूषण पर काबू आते हैं। साथ में जैव विविधता का संरक्षण, टिकाऊ पर्यटन, स्थानिक योजना, शोध और क्षमता निर्माण। यह मंत्री ने विमोचन पर कहा। 13 तटीय इकाइयों में बंटकर यह रकम हमारे हिसाब से औसतन 59 करोड़ रुपये प्रति इकाई, या पांच साल में 153 करोड़ रुपये सालाना बनती है। इतनी लंबी तटरेखा के लिए यह कम है, और इसीलिए दिशानिर्देश पहले से चल रही योजनाओं के साथ तालमेल पर जोर देते हैं।
भारत को इससे मिला
एक ही अमल का ढांचा, जहां 13 तटीय सरकारें अपना-अपना जुगाड़ कर रही थीं।
मोदी-ट्रंप बातचीत, गोयल की बैठक
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 30 सितंबर को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की, यह प्रधानमंत्री कार्यालय की उसी तारीख की विज्ञप्ति में दर्ज है। दोनों ने व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में सहयोग की प्रगति देखी। उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई, और संपर्क में रहने पर सहमति जताई।
फोटो नहीं — यह खाना खाली रखें : फोन पर हुई बातचीत का कोई आयोजन नहीं होता। प्रधानमंत्री कार्यालय की 30 सितंबर 2026 की विज्ञप्ति में कोई तस्वीर नहीं है। खबर हैशटैग पर खत्म होती है। दोनों नेताओं की अगली आमने-सामने मुलाकात पर पीआईबी की फोटो गैलरी देखें।
काम के स्तर पर भी वही चल रहा है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मिल्वॉकी में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीयर से मुलाकात की। यह जी-20 व्यापार मंत्रिस्तरीय बैठक के इतर हुई, और आकाशवाणी ने 1 अक्टूबर को यह बताया। मकसद है संतुलित और परस्पर लाभकारी व्यापार समझौता।
नेता फोन पर चार पटरियों का जायजा लें और उसी वक्त व्यापार मंत्री आमने-सामने बैठें — बातचीत इस शकल में तब आती है जब वह नतीजे के पास हो। भारत को जो चाहिए, वह उन लाइनों पर तय शुल्क है जिनमें सबसे ज्यादा लोग काम करते हैं — कपड़ा, चमड़ा, रत्न।
सुनील कुमार को एशियाई खेलों में कांस्य
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर। सुनील कुमार ने एशियाई खेलों में पुरुषों की ग्रीको-रोमन 87 किग्रा स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसे 30 सितंबर की विज्ञप्ति और उसी दिन @PMOIndia की पोस्ट में दर्ज किया।

प्रधानमंत्री की पोस्ट में लिखा है : “सुनील कुमार को एशियाई खेलों में कांस्य पदक! उन्होंने पुरुषों की ग्रीको-रोमन 87 किग्रा स्पर्धा में शानदार जीत दर्ज कर कांस्य पदक हासिल किया और अपने 2022 के प्रदर्शन को दोहराया। सुनील, बहुत-बहुत बधाई!”
2022 की बराबरी करना उससे आगे निकलने से मुश्किल है। ग्रीको-रोमन में भारतीय कुश्ती की बेंच सबसे पतली है। जो पहलवान लगातार दो खेलों में उसी भार वर्ग में पदक लाता है, उसने यह उस मैदान के सामने किया है। और उस मैदान को उसे पढ़ने के लिए चार साल मिले थे। इन्हीं खेलों में पहले मनीषा कीर, नीरू और आशिमा अहलावत ने महिला ट्रैप टीम में रजत जीता था, यह भी प्रधानमंत्री कार्यालय ने दर्ज किया।
शोध डेस्क : क्वांटम का आधा लक्ष्य जल्दी
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर। भारत ने क्वांटम-सुरक्षित संचार की 1,000 किलोमीटर लाइन करीब तीन साल में बना ली, जबकि आठ साल के मिशन का लक्ष्य 2,000 किलोमीटर था। यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने 30 सितंबर 2026 को प्रगति क्यू-फाउंड्री 2026 में कहा। मंत्रालय की उसी तारीख की विज्ञप्ति में यह दर्ज है। आधा फासला, समय के 37.5 फीसदी में — यह हिसाब हमारा है।

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असल में क्या दिखाया गया
विज्ञप्ति में एक नतीजा इतना ठोस है कि जांचा जा सके। आईआईटी मद्रास के क्वांटम संचार केंद्र के एक तकनीकी समूह ने चेन्नई और बेंगलुरु के बीच हाइब्रिड पीक्यूसी-क्यूकेडी लिंक चलाकर दिखाया। लाइन बीएसएनएल के मौजूदा फाइबर नेटवर्क पर चली, 17 सुरक्षित नोड से होकर। 50 पिकोसेकंड की डेजी-चेन टाइमिंग तकनीक शोध समुदाय के लिए ओपन-सोर्स जारी कर दी गई।
इस वाक्य में दो बातें खोज हैं। लाइन उसी फाइबर पर चली जो बीएसएनएल के पास पहले से है — यानी देशभर में क्वांटम-सुरक्षित रीढ़ बनाने का खर्च उपकरण का खर्च है, खुदाई का नहीं। और टाइमिंग की तकनीक बेचने के बजाय दे दी गई, जो पेटेंट वाली प्रयोगशाला का बरताव नहीं है।
कहां पहुंचा, और कहां नहीं
मिशन के चार विषयगत केंद्र हैं — भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु, और आईआईटी मद्रास, बॉम्बे तथा दिल्ली। उनमें 17 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों के 43 संस्थानों के 152 शोधकर्ता काम कर रहे हैं। मिशन से मदद पाए स्टार्टअप 17 से बढ़कर 26 हुए, इस कार्यक्रम में नौ नए जुड़े — 52.9 फीसदी की बढ़त।
प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने बैठक में बताया कि चार केंद्रों से करीब 52 प्रौद्योगिकियां निकली हैं, अलग-अलग तकनीकी तैयारी के स्तरों पर। आखिरी बात ही सारा काम करती है। तैयारी का स्तर प्रयोगशाला की मेज से तैनात उत्पाद तक की सीढ़ी है, और “अलग-अलग” उसका बड़ा हिस्सा ढक लेता है। विज्ञप्ति 52 को स्तरवार तोड़कर नहीं बताती, और हम यह तय नहीं कर सके कि इनमें से कितनी नमूने के चरण से आगे हैं।
मंत्री की बात विज्ञान से ज्यादा कारोबार की थी। उन्होंने राज्यों से कहा कि स्टार्टअप की बनाई स्वदेशी तकनीक को परखें और खरीदने की राह देखें। क्वांटम में पूंजी बड़ी लगती है और इंतजार लंबा। सूद ने भी खरीद पर वही जोर दिया। जब मंत्री और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार दोनों कहें कि कमी खरीदार की है, तो कमी खरीदार की है।
एक नजर में
•बनी क्वांटम-सुरक्षित लाइन : 1,000 किलोमीटर
•मिशन का लक्ष्य : आठ साल में 2,000 किलोमीटर
•अब तक लगा समय : •करीब तीन साल
विषयगत केंद्र : चार — आईआईएससी बेंगलुरु, आईआईटी मद्रास, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली
•शोधकर्ता : 152, 43 संस्थानों से, 17 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में
•मदद पाए स्टार्टअप : 26, पहले 17 थे
•केंद्रों से निकलीं प्रौद्योगिकियां : करीब 52, अलग-अलग तैयारी स्तरों पर।
तुलना
•लक्ष्य का पूरा हुआ हिस्सा : 50%
•मिशन की अवधि का बीता हिस्सा : 37.5% •आठ में तीन साल
बनी लाइन बीते समय से 33.3% आगे चल रही है।
हमारा हिसाब
1,000 ÷ 2,000 = लक्ष्य का 50%। तीन ÷ आठ = अवधि का 37.5%। 50 ÷ 37.5 = 1.33, यानी तय गति से एक-तिहाई आगे। 26 − 17 = नौ स्टार्टअप ज्यादा, 52.9% की बढ़त। यह सब यहीं निकाला गया; विज्ञप्ति इनमें से कोई अनुपात नहीं छापती।
भारत को क्या मिला
देश के पास पहले से मौजूद टेलीकॉम फाइबर पर जांची गई क्वांटम-सुरक्षित लाइन, जिससे देशभर में इसे फैलाना निर्माण का काम नहीं, खरीद का काम बन जाता है।
ब्लिट्ज की सराहना
आईआईटी मद्रास का क्वांटम संचार केंद्र, जिसने 50 पिकोसेकंड की टाइमिंग तकनीक अपने पास रखने के बजाय ओपन-सोर्स जारी कर दी।
आंकड़े विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की 30 सितंबर 2026 की विज्ञप्ति, रिलीज आईडी 2317241 से; pib.gov.in पर जांचे।
निगरानी डेस्क : कैग का नया अनुवादक
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के कार्यालय और डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन ने कैग-भाषिणी अनुवाद शुरू किया। यह दस्तावेज अनुवाद का एआई आधारित प्लेटफॉर्म है, और 30 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुआ। यह इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वक्तव्य में है, जो आकाशवाणी ने 30 सितंबर 2026 को दिया।













