नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ राग फिर शुरू हो गया है। दरअसल, अमेरिका के ‘हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स’ में एक अहम कानून पास हो गया है, जो प्रेसिडेंट ट्रंप को रूस से कच्चा तेल और नेचुरल गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक का शुल्क लगाने का अधिकार देता है। हालांकि, भारत भी इसके मुकम्मल जवाब की तैयारी में जुट गया है। केंद्र सरकार का कहना है कि वह इस कानून के असर से निपटने के लिए भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी।
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, भारत ने अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का अपना इरादा साफ कर दिया है। सरकार इन घटनाक्रमों के असर से निपटने के लिए भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी।
क्या है अमेरिका का नया कानून?
अमेरिकी कांग्रेस ने रूस और ईरान पर प्रतिबंध बढ़ाने वाला कानून पास किया है। इस कानून के तहत अमेरिकी प्रशासन उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगा सकता है जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं। अगस्त में सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद, अमेरिकी हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स ने 16 सितंबर को यह बिल पास किया। अब इस कानून पर अमेरिकी प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार है।
भारत पर क्या असर होगा?
भारत इस अमेरिकी कानून पर बारीकी से नजर रख रहा है क्योंकि इसका असर उसके व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर पड़ सकता है। रूसी कच्चा तेल भारत के तेल आयात का एक अहम जरिया बन गया है, क्योंकि भारतीय रिफाइनर छूट पर मिलने वाले रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ा रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने इन उपायों के संभावित नतीजों को लेकर अमेरिका के सामने अपनी चिंताएं पहले ही जाहिर कर दी हैं। मंत्रालय ने कहा, हाल के महीनों में अमेरिका के अलग-अलग अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर उच्च स्तर पर बातचीत हुई है। भारत ने बहुत साफ तौर पर बताया है कि इसके असर न सिर्फ दोनों देशों के आपसी रिश्तों पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकते हैं।
भारत ने यह भी दोहराया है कि ऊर्जा की आपूर्ति से जुड़े फैसले इस बात को ध्यान में रखकर लिए जाते रहेंगे कि देश की 1.4 अरब आबादी के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। विदेश मंत्रालय ने कहा, जैसा कि पहले भी कई बार कहा जा चुका है, भारत अपने 1.4 अरब लोगों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वह अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा हासिल करके और बदलते बाज़ार के हालात के आधार पर ऐसा करना जारी रखेगा।














