नई दिल्ली। भारत को यूरोपीय संघ (ईयू) में इस्पात उत्पादों के निर्यात के लिए सालाना कुल 16.41 लाख टन का देश-विशिष्ट शुल्क दर कोटा (टीआरक्यू) मिलेगा। इसमें 6,94,853 टन का कोटा भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत होगा। ईयू द्वारा जारी समझौते के मसविदा पाठ में यह जानकारी दी गई है। कुल 16,41,470 टन के कोटे में 9,46,616 टन सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) प्रावधान के तहत और 6,94,853 टन एफटीए के तहत होगा। भारत फिलहाल हर साल करीब 40 लाख टन इस्पात का निर्यात ईयू को करता है।
यह कोटा ईयू के इस्पात की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता से निपटने के लिए बनाए गए नए नियमों के तहत दिया जाएगा। ये नियम इस साल एक जुलाई से लागू हुए हैं। इनका उद्देश्य दुनिया में इस्पात का उत्पादन जरूरत से अधिक होने के कारण ईयू के इस्पात उद्योग पर पड़ने वाले असर को कम करना है। इन नियमों के तहत ईयू में हर साल 1.83 करोड़ टन तक इस्पात का शुल्क मुक्त आयात किया जा सकता है। इस सीमा से अधिक आयात पर 50 फीसद शुल्क लगाया जाएगा। यह कोटा ईयू के इस्पात की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता से निपटने के लिए बनाए गए नए नियमों के तहत दिया जाएगा। ये नियम इस साल एक जुलाई से लागू हुए हैं। इनका उद्देश्य दुनिया में इस्पात का उत्पादन जरूरत से अधिक होने के कारण ईयू के इस्पात उद्योग पर पड़ने वाले असर को कम करना है।
है। इसमें एमएफएन के तहत 2,99,197 टन और एफटीए के तहत 2,10,408 टन शामिल हैं। मसविदे में कहा गया है कि भारत से ईयू में
आने वाले इस्पात उत्पादों से संबंधित ये टीआरक्यू ईयू के स्टील विनियमन के लागू होने की तारीख से प्रभावी होंगे। भारत और ईयू ने इस साल 27 जनवरी को इस समझौते के लिए वार्ता पूरी होने की घोषणा की थी। इसके इस साल के अंत तक हस्ताक्षरित होने और अगले साल से लागू होने की संभावना है।
यह कोटा ईयू के इस्पात की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता से निपटने के लिए बनाए गए नए नियमों के तहत दिया जाएगा। ये नियम इस साल एक जुलाई से लागू हुए हैं। इनका उद्देश्य दुनिया में इस्पात का उत्पादन जरूरत से अधिक होने के कारण ईयू के इस्पात उद्योग पर पड़ने वाले असर को कम करना है।














