भारत के निर्यात ने पकड़ी रफ्तार, पांच महीने में करीब 400 अरब डॉलर का कारोबार
नई दिल्ली। वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिशों के बीच चालू वित्त वर्ष की शुरुआत उत्साहजनक रही है। अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान भारत का वस्तु एवं सेवा निर्यात बढ़कर 399.27 अरब डॉलर होने का अनुमान है। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 345.55 अरब डॉलर था। इस तरह निर्यात में करीब 15.55 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
इस दौरान वस्तुओं का निर्यात 17.85 प्रतिशत बढ़कर 215.91 अरब डॉलर पहुंच गया। इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के निर्यात में विशेष तेजी देखने को मिली। अगस्त में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात सालाना आधार पर 89.82 प्रतिशत बढ़कर 5.55 अरब डॉलर हो गया।
इंजीनियरिंग उत्पाद, रसायन, पेट्रोलियम उत्पाद और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों ने भी निर्यात वृद्धि में योगदान दिया है। ये आंकड़े संकेत देते हैं कि भारत की निर्यात क्षमता अब परंपरागत उत्पादों से आगे बढ़कर उच्च मूल्य वाले विनिर्माण क्षेत्रों तक फैल रही है।
ग्वालियर बनेगा टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग का नया केंद्र ₹5,500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव
नई दिल्ली। भारत में दूरसंचार उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में विकसित किए जा रहे देश के पहले एकीकृत टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन के लिए 24 कंपनियों ने लगभग ₹5,500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव दिए हैं।
इस परियोजना में विनिर्माण के साथ अनुसंधान एवं विकास तथा इनोवेशन से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने की योजना है। केंद्र सरकार पहले चरण के लिए ₹493 करोड़ उपलब्ध करा रही है, जबकि मध्य प्रदेश सरकार ने करीब 170 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई है।
मौजूदा निवेश प्रस्तावों से लगभग 18,000 रोजगार पैदा होने की संभावना है। बेंगलुरु में आयोजित निवेशक बैठक में भी ₹700 से ₹800 करोड़ तक के अतिरिक्त निवेश के संकेत मिले हैं।
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता: भारतीय निर्यातकों के लिए खुलेगा शुल्क-मुक्त बाजार
नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता 20 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने जा रहा है। इसके लागू होते ही भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में व्यापक शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी।
वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, समझौते के लागू होने के पहले दिन से ही न्यूजीलैंड भारत से होने वाले 100 प्रतिशत निर्यात को शून्य शुल्क की सुविधा देगा।
टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा, फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद और प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्र को इससे विशेष अवसर मिलने की उम्मीद है। भारतीय उद्योग को लकड़ी, कोकिंग कोल और मेटल स्क्रैप जैसे कुछ महत्वपूर्ण कच्चे माल की शुल्क-मुक्त उपलब्धता का भी लाभ मिल सकता है।
यह समझौता खासतौर पर उन भारतीय एमएसएमई के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है जो विकसित अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपना कारोबार बढ़ाना चाहते हैं।
दुनिया में तेजी से पैर पसार रही इंडिया इंक, विदेशी अधिग्रहण करीब 24 अरब डॉलर
मुंबई। भारतीय कंपनियां अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं हैं। टेक्नोलॉजी, ऊर्जा संसाधनों, महत्वपूर्ण खनिजों और मजबूत सप्लाई चेन तक पहुंच बनाने के लिए भारतीय कॉरपोरेट जगत विदेशों में अधिग्रहण के अवसर तलाश रहा है।
रॉयटर्स द्वारा उद्धृत जेपी मॉर्गन के आंकड़ों के अनुसार, 2026 में अब तक भारतीय कंपनियों के विदेशी विलय एवं अधिग्रहण सौदे करीब 24 अरब डॉलर तक पहुंच चुके हैं।
वहीं, 2026 की पहली छमाही में भारत से जुड़े कुल एम एंड ए सौदों का मूल्य 680 लेनदेन में 100 अरब डॉलर से अधिक रहा।
यह रुझान भारतीय कंपनियों की बढ़ती वित्तीय क्षमता और वैश्विक महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। कंपनियां अब केवल निर्यात के जरिये नहीं, बल्कि विदेशी परिसंपत्तियों और व्यवसायों में रणनीतिक हिस्सेदारी के माध्यम से भी वैश्विक उपस्थिति मजबूत कर रही हैं।
सौर ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा एकीकरण, इंडोसोलर का वारी एनर्जीज में होगा विलय
मुंबई। भारत के तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण कॉरपोरेट घटनाक्रम सामने आया है। वारी एनर्जीज ने समूह की कंपनी इंडोसोलर का अपने साथ विलय करने की योजना घोषित की है। इस सौदे का मूल्य लगभग ₹950 करोड़ बताया गया है।
यह कदम ऐसे समय आया है जब भारतीय सौर ऊर्जा कंपनियां घरेलू मांग के साथ वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए उत्पादन क्षमता का विस्तार कर रही हैं।
उद्योग में इस तरह के एकीकरण से कंपनियों को उत्पादन क्षमता, तकनीक, वितरण नेटवर्क और पूंजी का बेहतर उपयोग करने में मदद मिल सकती है। भारत के महत्वाकांक्षी स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को देखते हुए सौर विनिर्माण आने वाले वर्षों में बड़े औद्योगिक अवसर के रूप में उभर रहा है।
आठ प्रमुख उद्योगों में 4.8 प्रतिशत की वृद्धि, सीमेंट और बिजली उत्पादन ने दिखाई मजबूती
नई दिल्ली। भारत के औद्योगिक क्षेत्र से सकारात्मक संकेत मिले हैं। अगस्त 2026 में देश के आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों के उत्पादन में सालाना आधार पर 4.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
सीमेंट उत्पादन में 12.5 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हुई, जबकि बिजली उत्पादन 11.6 प्रतिशत बढ़ा। लौह अयस्क उत्पादन में 5.5 प्रतिशत, इस्पात में 3.4 प्रतिशत और रिफाइनरी उत्पादों में 2.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अप्रैल से अगस्त की अवधि में आठ प्रमुख उद्योगों की संचयी वृद्धि 4.3 प्रतिशत रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 2.4 प्रतिशत थी।
सीमेंट और बिजली उत्पादन में वृद्धि का विशेष महत्व है क्योंकि इन दोनों क्षेत्रों की मांग का सीधा संबंध निर्माण, बुनियादी ढांचे और व्यापक औद्योगिक गतिविधियों से है।
ईसीजीसी का नया रिकॉर्ड, ₹9.70 लाख करोड़ के भारतीय निर्यात को मिला संरक्षण
मुंबई। भारतीय निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के जोखिम से सुरक्षा प्रदान करने वाली सरकारी संस्था ईसीजीसी ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड ₹9.70 लाख करोड़ के निर्यात को सहायता एवं बीमा संरक्षण प्रदान किया। यह पिछले वर्ष की तुलना में 13.46 प्रतिशत अधिक है।
ईसीजीसी ने वर्ष के दौरान भारत के कुल वस्तु निर्यात के लगभग 25 प्रतिशत हिस्से को कवर किया। संस्था का सकल प्रीमियम भी रिकॉर्ड ₹1,459.11 करोड़ रहा, जबकि ₹811.02 करोड़ के दावों का भुगतान किया गया।
निर्यात ऋण बीमा विशेष रूप से छोटे और मध्यम निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण है। इससे विदेशी खरीदारों के भुगतान न करने जैसे व्यावसायिक जोखिमों को कम करने और नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रवेश करने में मदद मिलती है।
बदल रही भारत की मैन्युफैक्चरिंग तस्वीर, कैपिटल गुड्स उत्पादन में 16.1 प्रतिशत की छलांग
नई दिल्ली। भारत के विनिर्माण क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा उपकरण और अक्षय ऊर्जा जैसी नई अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में कैपिटल गुड्स का उत्पादन सालाना आधार पर 16.1 प्रतिशत बढ़ा। इसी अवधि में इंटरमीडिएट गुड्स का उत्पादन 10 प्रतिशत तथा इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स का उत्पादन 6.9 प्रतिशत बढ़ा। औद्योगिक उत्पादन में कुल 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
कैपिटल गुड्स में तेज वृद्धि महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि मशीनरी और औद्योगिक उपकरणों का बढ़ता उत्पादन भविष्य की उत्पादन क्षमता में निवेश का संकेत देता है।
निर्यातकों के लिए ‘ट्रेड कनेक्ट’ बनेगा डिजिटल साथी, एफटीए का लाभ लेना होगा आसान
नई दिल्ली। भारत अपने बढ़ते मुक्त व्यापार समझौतों का वास्तविक लाभ देश के छोटे-बड़े निर्यातकों तक पहुंचाने के लिए डिजिटल व्यवस्था को मजबूत कर रहा है। सरकार का ट्रेड कनेक्ट प्लेटफॉर्म इसी दिशा में महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।
प्लेटफॉर्म के माध्यम से निर्यातकों को उत्पाद और एच शएसएन कोड के आधार पर विभिन्न देशों में लागू शुल्क, प्रक्रियाओं और मुक्त व्यापार समझौतों से उपलब्ध अवसरों की जानकारी देने की व्यवस्था विकसित की जा रही है।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जिला और राज्य स्तर पर निर्यातकों को बेहतर सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है।
इस व्यवस्था का सबसे अधिक फायदा एमएसएमई को हो सकता है, जिनके पास अलग-अलग देशों के नियम, टैरिफ, ‘रूल्स ऑफ ओरिजिन’ और दस्तावेजी प्रक्रियाओं को समझने के लिए बड़ी विशेषज्ञ टीमें उपलब्ध नहीं होतीं।
एआई की वैश्विक दौड़ ने खोला नया बाजार, अब चिप से आगे बिजली और कूलिंग तक बड़ा कारोबार
लंदन। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वैश्विक क्रांति अब केवल सॉफ्टवेयर और सेमीकंडक्टर कंपनियों तक सीमित नहीं रही। तेजी से बन रहे विशाल एआई डेटा सेंटर बिजली, कूलिंग सिस्टम, ट्रांसफॉर्मर और दूसरे विशेष औद्योगिक उपकरणों की मांग में भी बड़ा बदलाव ला रहे हैं।
मीडिया के विश्लेषण के अनुसार, वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटरों में हो रहे भारी निवेश से बिजली और कूलिंग समाधान उपलब्ध कराने वाली कंपनियां भी तेजी से उभर रही हैं।
भारत के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण कारोबारी अवसर पैदा कर सकता है। डेटा सेंटर, अक्षय ऊर्जा, पावर ग्रिड, कूलिंग सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी भारतीय कंपनियों के लिए एआई अर्थव्यवस्था एक नया बाजार खोल सकती है।
एआई के अगले चरण की सफलता केवल बेहतर चिप और सॉफ्टवेयर से तय नहीं होगी। ऊर्जा की उपलब्धता, बिजली की लागत, कूलिंग और मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी इस नई अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार होंगे।













