भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार इस मौसम में अब तक दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से लगभग 38% कम रहा है, क्योंकि अल नीनो की स्थितियाँ उस वर्षा को कमज़ोर कर रही हैं जो देश की अधिकांश खेती को सींचती है।
जुलाई में वर्षा दीर्घावधि औसत के लगभग 95% रहने का अनुमान है, और क्षेत्रीय अंतर स्पष्ट है: पूर्वी भारत — ओडिशा, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल — में बेहतर वर्षा की संभावना है, जबकि उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत (राजस्थान, गुजरात, पंजाब, मध्य प्रदेश) में कमी रह सकती है।
पर्याप्त अनाज भंडार, व्यापक सिंचाई और फसल बीमा के कारण भारत इस शुष्क दौर का सामना पहले से कहीं बेहतर तैयारी के साथ कर रहा है।
एक नज़र में
- मौसम में अब तक: ~38% कम वर्षा
- जुलाई अनुमान: दीर्घावधि औसत का ~95%
- बेहतर वर्षा: ओडिशा, झारखंड, बिहार, प. बंगाल
- कमी वाले क्षेत्र: राजस्थान, गुजरात, पंजाब, मप्र
रचनात्मक प्रतिक्रिया यह है कि पहले से जारी उपायों को तेज़ किया जाए — व्यापक ड्रिप सिंचाई, जलाशयों की गाद निकासी, जल-संचयन और जलवायु-सक्षम बीज — और साथ ही वास्तविक-समय सलाह को सशक्त किया जाए ताकि किसान बुआई के निर्णय शीघ्र ले सकें।
रिकॉर्ड अनाज भंडार और विविध ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ, एक कठिन मौसम भारत की बढ़ती कृषि-सहनशीलता का प्रमाण बन सकता है, न कि झटका।














