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पहले पदक के बाद: आज ग्लासगो में उतरेंगी भारत की जिम्नास्ट

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 25, 2026
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का खाता खुल चुका है और शनिवार को उम्मीदों का दायरा भी चौड़ा है। ओलंपियन प्रणति नायक ग्लासगो इंटरनेशनल एरिना में महिला कलात्मक जिम्नास्टिक टीम की अगुवाई कर रही हैं, जिसमें निष्का अग्रवाल, प्रतिष्ठा सामंत और ईशिता रेवाले भी शामिल हैं — चारों टीम स्पर्धा के पदक के साथ-साथ अलग-अलग उपकरणों के फ़ाइनल में जगह बनाने के लिए भी उतर रही हैं। तैराकी में दक्षण शशिकुमार और आर्यन नेहरा पुरुषों की 400 मीटर फ़्रीस्टाइल में हैं, और मुक्केबाज़ी में पूर्व राष्ट्रमंडल यूथ चैंपियन सचिन सिवाच 60 किग्रा के राउंड ऑफ़ 32 में कनाडा के अल-अहमदीह केओमा से भिड़ेंगे।

खाता शुक्रवार को पैरा पावरलिफ़्टर झंडू कुमार ने खोला, जिन्होंने पुरुषों के हैवीवेट वर्ग में कांस्य जीता। दूसरे प्रयास में 190 किलोग्राम उठाकर उन्होंने 130.9 अंक बनाए; पहली कोशिश में 181 किलो उठाया, फिर उसे सुधारा, और आख़िरी प्रयास में 196 किलो पर दांव लगाया जो पूरा नहीं हुआ — तब तक पदक पक्का था। 28 साल के झंडू कुमार एक सब्ज़ी विक्रेता के बेटे हैं, ऑटो-रिक्शा चलाते थे, और 2023 में राष्ट्रीय चैंपियनशिप तक पहुंचने के लिए उन्होंने वही ऑटो बेच दिया जो उनकी रोज़ी थी। साथी खिलाड़ी क़रीब पहुंचकर चूके — सुधीर इसी वर्ग में छठे और अशोक कुमार मलिक लाइटवेट में चौथे रहे।

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ग्लासगो में तीसरा दिन: प्रणति नायक की अगुवाई में चार सदस्यीय भारतीय जिम्नास्टिक टीम टीम और उपकरण फ़ाइनल की दौड़ में, तैराक 400 मीटर फ़्रीस्टाइल में और सचिन सिवाच मुक्केबाज़ी में — झंडू कुमार के 190 किलो वाले कांस्य से खाता खुलने के बाद।

जिस गाड़ी से घर चलता था, उसे बेचकर वह राष्ट्रीय मुक़ाबले तक पहुंचे थे। ग्लासगो उसी टिकट का नतीजा है — और इस बात की याद कि कितनी प्रतिभा सिर्फ़ सफ़र के ख़र्च पर अटकी है।

एक नज़र में

• पहला पदक: झंडू कुमार, कांस्य, पुरुष हैवीवेट पैरा पावरलिफ़्टिंग (190 किग्रा)
• शनिवार: पांच खेल — जिम्नास्टिक, तैराकी, मुक्केबाज़ी, लॉन बॉल्स, व्हीलचेयर बास्केटबॉल
• जिम्नास्टिक: प्रणति नायक, निष्का अग्रवाल, प्रतिष्ठा सामंत, ईशिता रेवाले
• ऐतिहासिक: किसी टीम खेल में भारत के पहले पैरा खिलाड़ी मैदान में

शनिवार के कार्यक्रम में पदक तालिका से परे एक ऐतिहासिक पड़ाव भी है। किसी टीम खेल में भारत के पहले पैरा खिलाड़ी 3×3 व्हीलचेयर बास्केटबॉल से अपना अभियान शुरू कर रहे हैं — नतीजा चाहे जो हो, यह इन खेलों में भारतीय भागीदारी का दायरा चौड़ा करता है। पदक तालिका में फ़िलहाल ऑस्ट्रेलिया आगे है, उसके पीछे नाइजीरिया और मेज़बान स्कॉटलैंड। भारत की आज की उम्मीदें काफ़ी हद तक जिम्नास्टिक और तैराकी के फ़ाइनल में जगह बनाने पर टिकी हैं।

सकारात्मक बात पदक तालिका से ज़्यादा उस रास्ते की है जो इन पदकों तक पहुंचाता है। भारत का पहला पदक पैरा खेल से आना उस बदलाव का सबूत है जिसमें बीते एक दशक में पैरा खिलाड़ी हाशिये से उठकर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र तक आए हैं। आगे का काम है झंडू कुमार की कहानी को अपवाद न रहने देना, ताकि किसी राष्ट्रीय चैंपियनशिप तक पहुंचने के लिए फिर कभी घर की कमाई का साधन न बेचना पड़े। छोटे शहरों में प्रतिभा की पहचान, यात्रा और उपकरण की मदद, और लगातार कोचिंग — यही वे साधारण से दिखने वाले निवेश हैं जो एक कांस्य को पदकों की आदत में बदलते हैं।

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