वाशिंगटन। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती साबित करते हुए देश के आम नागरिकों के हितों की रक्षा की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शिकागो में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने वैश्विक घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखने के साथ-साथ अपनी घरेलू आवश्यकताओं को केंद्र में रखा। इसी का परिणाम है कि दुनिया भर के संकटों के बावजूद भारतीय किसान, घरेलू परिवार और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित रहे हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि जहां कई देशों के आर्थिक अनुमान लड़खड़ा गए, वहीं भारत ने अपनी सीमाओं के बावजूद चुनौतीपूर्ण माहौल में अपने नागरिकों को सुरक्षित रखा। वित्त मंत्री के अनुसार, भारत की सफलता का आधार वैश्विक बदलावों को लगातार ट्रैक करने के साथ-साथ घरेलू जरूरतों को समझना रहा है। इसी नीतिगत सूझबूझ ने देश को बड़े आर्थिक झटकों से बचाए रखा है।
हर माह 30 लाख की इंटर्नशिप
नई दिल्ली। भारत में हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (एचएफटी’) कंपनियां इंटर्न्स को रिकॉर्ड तोड़ पैसा ऑफर कर रही हैं। शेयर बाजार में सुस्ती और डेरिवेटिव्स के कड़े नियमों के बीच, ये कंपनियां गणित और डेटा के माहिर युवाओं को अपने साथ जोड़ने के लिए भारी-भरकम सैलरी दे रही हैं।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गुड़गांव की कंपनी क्वाडेये इंटर्न्स को महीने के करीब 30 लाख रुपये ऑफर कर रही है। यानी दो महीने की इंटर्नशिप के लिए छात्र को 60 लाख रुपये मिलेंगे। यह रकम पिछले साल के मुकाबले करीब चार गुना ज्यादा है। वहीं, ग्रेविटॉन रिसर्च कैपिटल दो महीने की इंटर्नशिप के लिए करीब 50 लाख रुपये दे रही है, जबकि पहले यह रकम 16 लाख रुपये के आसपास थी। विदेशी ट्रेडिंग कंपनियां भी पीछे नहीं हैं। एम्सटर्डम की आईएमसी ट्रेडिंग ने दो महीने की इंटर्नशिप का पैकेज दोगुना कर 50 लाख रुपये कर दिया है। ऑप्टिवर नाम की कंपनी तो दो महीने के लिए करीब 60 लाख रुपये ऑफर कर रही है।
जियो के आईपीओ को मंजूरी
नई दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की डिजिटल और टेलीकॉम ब्रांच, जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के आईपीओ को मार्केट रेगुलेटर सेबी से मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के ऑफिशियल पोर्टल पर भी जियो के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस का स्टेटस ‘अप्रूव्ड’ दिखाने लगा है। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि आईपीओ मार्केट में कब आएगा। लेकिन, जानकारों का अनुमान है कि दीपावली के आसपास इसे लॉन्च किया जा सकता है।
भारतीय कंपनियों की भरमार
नई दिल्ली। दुबई और भारत के बीच आर्थिक एवं व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। दुबई चेंबर्स के अध्यक्ष मोहम्मद अली राशिद लूता ने बताया कि एक रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 के अंत तक दुबई चेंबर के सक्रिय सदस्यों के रूप में पंजीकृत भारतीय कंपनियों की संख्या बढ़कर 85,841 हो गई है। वर्ष 2026 की पहली छमाही के दौरान ही 7,579 नई भारतीय कंपनियां दुबई चैंबर से जुड़ीं। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। दुबई आधारित प्रकाशन अरेबियन बिजनेस की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक संबंधों में लगातार विस्तार देखा जा रहा है। वर्ष 2025 में भारत और दुबई के बीच गैर-तेल व्यापार 60.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 15 प्रतिशत अधिक है।













