• Latest
  • Trending
sansad-bhawan

मैं संसद हूं ! आजादी की गूंज से लेकर शक्ति संपन्न देश बनने तक की साक्षी

September 23, 2023
ब्रिक्स से किसान आईडी तक भारत की 10 बड़ी खबरें

ब्रिक्स देशों की संसदें दिल्ली में जुटीं

October 27, 2026
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन

ब्रिक्स मंच से निर्यात और जीएसटी तक भारत की बड़ी खबरें

October 26, 2026
daily-news

साप्ताहिक समाचार डायरी 19–25 अक्टूबर 2026: 11 करोड़ फार्मर आईडी | Blitz India Media

October 25, 2026
सरिया एक साल में 26% महंगा, बढ़ी निर्माण लागत

सरिया एक साल में 26 फीसदी महंगा

October 24, 2026
नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क, 22 अक्टूबर 2026 · फोटो : पीएमओ इंडिया

पोलैंड से दोगुना कारोबार, 12.7 अरब डॉलर

October 23, 2026
village

गांव-घर तक पहुंचा विकास, रफ्तार की परीक्षा बाकी

October 22, 2026
गन्ने की तौल और रिकवरी जांचेगी समिति

गन्ने की तौल और रिकवरी जांचेगी नई समिति

October 21, 2026
export

यूएई से कारोबार 100 अरब डॉलर पार

October 20, 2026
न्यूजीलैंड एफटीए

न्यूजीलैंड में भारतीय सामान पर अब ड्यूटी नहीं

October 20, 2026
ब्लूमबर्ग ने देखा सशक्त भारत का ट्रेलर

ब्लूमबर्ग ने देखा सशक्त भारत का ट्रेलर

October 19, 2026
वैश्विक 'सैटकॉम' जंग के दबाव में नहीं आएंगे

भारत बनेगा डिजिटल महाशक्ति

October 19, 2026
तंबाकू- सिगरेट छोड़ो अभियान

तंबाकू- सिगरेट छोड़ो अभियान

October 19, 2026
Tuesday, October 27, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

मैं संसद हूं ! आजादी की गूंज से लेकर शक्ति संपन्न देश बनने तक की साक्षी

by ब्लिट्ज़ इंडिया
September 23, 2023
in the blitz
0
sansad-bhawan
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। मैं संसद हूं। मेरी उमर 95 बरस हो चुकी है। अब वक्त आ गया है, जब अपने सभी अधिकार नई-नवेली संसद को सौंप दूं। मेरे लिए यह क्षण जितना सुखद है, उतना ही भावुक भी। आज वो हर लम्हा याद आ रहा है, जब मेरी गोद बैठकर कानून निर्माताओं ने देश की तस्वीर बदलने वाले फैसले लिए। मेरी पैदाइश 1927 में हुई।

मुझे डिजाइन करने वाले हर्बर्ट बेकर और उद्घाटन करने वाले ब्रिटिश गवर्नर लॉर्ड इरविन ने सपने में भी नहीं सोचा था कि दो बरस बाद 8 अप्रैल 1929 को देश की आजादी के दीवाने भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त, बहरी अंग्रेज सरकार को देशवासियों की आवाज विस्फोट करके सुनाएंगे। उस वक्त मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया था। हालांकि, मेरे कानों में छेद हो गया, वंदे मातरम की गूंज सुनने के लिए 18 साल इंतजार करना पड़ा। आखिर, 15 अगस्त 1947 को वो दिन आ ही गया।

YOU MAY ALSO LIKE

ब्रिक्स देशों की संसदें दिल्ली में जुटीं

ब्रिक्स मंच से निर्यात और जीएसटी तक भारत की बड़ी खबरें

पं. जवाहरलाल नेहरू का संबोधन पूरी दुनिया के दिलोदिमाग को संवेदनाओं से भर देने वाला था। 26 जनवरी, 1950 को जब भारतीय गणराज्य की घोषणा हुई तो मेरा रोम-रोम खिल उठा। वहीं मेरे जेहन में दर्द और वेदना के वो क्षण भी जस के तस हैं, जब तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष जीवी मावलंकर ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के निधन की घोषणा की। युद्धकाल में लाल बहादुर शास्त्री द्वारा देशवासियों से एक समय का भोजन बचाने की अपील वाला दिन भी याद है। वह भी गर्व का पल था जब इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश को आजाद कराने और सिक्कि म के भारत में विलय का एलान किया। मुझे 21 जुलाई 1975 की वो तारीख भी अच्छी तरह याद है, जब इसी लोकसभा में आपातकाल की घोषणा हुई।

यह भी याद है जब अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत को ‘परमाणु हथियार संपन्न देश’ से गौरवान्वित किया। हर संस्कृति व परंपराओं को सहेजने वाली मैं संसद, कैसे भूल सकती हूं उन दिनों को जब वीपी सिंह, एचडी देवेगौड़ा और अटल विहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री के रूप में संसद का विश्वास खोना पड़ा था। यह सही है कि इनमें से अटल बिहारी अकेले ऐसे प्रधानमंत्री रहे, जो बाद में चुनाव जीतकर फिर मेरा साथ पाने में कामयाब रहे। 13 दिसंबर 2001 की वो मनहूस घड़ी याद करके मैं आज भी सिहर जाती हूं, जब आतंकियों ने मुझ पर हमला किया और मुझे बचाने के लिए मेरे गार्ड समेत 9 लोगों को शहीद होना पड़ा। 21वीं सदी का वह दिन भी मेरी यादों में तरोताजा रहेगा, जब पक्ष-विपक्ष की जोरदार बहस के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने कश्मीर को अनुच्छेद 370 से मुक्त करा दिया। मैं 144 खम्भों वाली इमारत हूं और आज मैं लगभग 143 करोड़ लोगों की आवाज हूं।

अपनी लंबी यात्रा में मैंने देश-दुनिया में कई बदलाव देखे हैं और आगे भी हर बदलाव के लिए तैयार हूं। सच यही है कि वर्षों से अपने केंद्रीय सभाकक्ष के प्रवेश द्वार पर लिखे इस वाक्य ‘अयं निजः परोवेति गणना लघुचेतसाम ्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम ्।।’ (यानी यह मेरा है, यह पराया है, ऐसी गणना छोटी मानसिकता वाले करते हैं, जबकि उदार चित्त वाले तो पूरे विश्व को ही अपना परिवार मानते हैं) को चरितार्थ करते हुए देशवासियों के साथ-साथ दुनिया की बेहतरी की कामना करती हूं और आगे भी करती रहूंगी। जय हिन्द, जय भारत ।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation