• Latest
  • Trending
How many Ram devotees were sacrificed?

कितने रामभक्त हुए बलिदान ?

January 19, 2024
QR-code

अर्थव्यवस्था की पटरियां: कैसे यूपीआई ने रोज़मर्रा के भारत को बदल दिया

July 21, 2026
द ओडिसी बॉक्स ऑफिस

सिनेमाघरों में रौनक: जुलाई का बॉक्स ऑफ़िस 450 करोड़ के पार

July 21, 2026
Agriculture

पहाड़ों पर रेड अलर्ट कायम, महीने के आख़िर तक जमा रहेगा मानसून

July 21, 2026
export

बस आख़िरी एक फ़ीसदी बाकी, और 24 जुलाई की घड़ी टिक-टिक करती हुई

July 21, 2026
इसरो सात प्रक्षेपण

आसमान की ओर सात कदम: भारत के सबसे व्यस्त अंतरिक्ष वर्ष की तैयारी

July 21, 2026
parliament

कानून की किताब आकार लेने लगी: सुधारों से भरा सत्र काम पर उतरा

July 21, 2026
सुप्रीम कोर्ट

बड़ी बेंच: उच्चतम न्यायालय में जजों की संख्या 38 करने वाला विधेयक

July 21, 2026
export

समझौता अब ज़मीन पर: भारत–ब्रिटेन मुक्त व्यापार से क्या बदलेगा

July 21, 2026
monsoon

पहाड़ों पर रेड अलर्ट बरकरार, बारिश अपने सबसे तीखे दौर में

July 21, 2026
semiconductor

चिप पर दांव: भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का दूसरा अध्याय शुरू

July 21, 2026
इंग्लैंड ने जीती सीरीज़, लॉर्ड्स में रोहित ने रचा इतिहास

एक कठिन दौरा, और एक साफ़ सबक: इंग्लैंड में भारत की युवा टीम की परीक्षा

July 21, 2026
solar

खामोश बुनियाद: कैसे भारत का ऊर्जा-बदलाव हर साल थोड़ा और मज़बूत होता है

July 21, 2026
Wednesday, July 22, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

कितने रामभक्त हुए बलिदान ?

by ब्लिट्ज़ इंडिया
January 19, 2024
in the blitz
0
How many Ram devotees were sacrificed?
ब्लिट्ज ब्यूरो

अयोध्या। अयोध्या में कारसेवकों पर फायरिंग के अगले दिन अखबारों में छपी खबर में बलिदानियों की संख्या 40 बताई गई थी। साथ ही लिखा गया था कि 60 बुरी तरह जख्मी हैं और घायलों का कोई हिसाब नहीं है। मौके पर रहे एक पत्रकार ने मृतकों की संख्या 45 बताई थी।

एक अखबार ने 100 की मौत की बात कही थी तो दूसरे ने यह संख्या 400 बताई थी। आधिकारिक तौर पर बाद में मृतकों की संख्या 17 बताई गई। हालांकि घटना के चश्मदीदों ने कभी भी इस संख्या को सही नहीं माना। घटना के फौरन बाद प्रशासन ने अपनी ओर से कोई आंकड़े तो नहीं दिए थे, लेकिन मीडिया के आंकड़ों का खंडन भी नहीं किया था। यहां तक कि फैजाबाद के तत्कालीन आयुक्त मधुकर गुप्ता तो फायरिंग के घंटों बाद तक यह नहीं बता पाए थे कि कितने राउंड गोली चलाई गई थी। उनके पास मृतकों और जख्मी लोगों का आंकड़ा भी नहीं था।

YOU MAY ALSO LIKE

अर्थव्यवस्था की पटरियां: कैसे यूपीआई ने रोज़मर्रा के भारत को बदल दिया

सिनेमाघरों में रौनक: जुलाई का बॉक्स ऑफ़िस 450 करोड़ के पार

एक अखबार ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट शब्दों में लिखा था, “निहत्थे कारसेवकों पर गोली चलाकर प्रशासन ने जलियांवाले से भी जघन्य कांड किया है।” कुछ महीने पहले तक एक समुदाय विशेष के लोगों को देश की राजधानी की सड़क पर डेरा जमाए बैठे देखने वाले लोगों को शायद यकीन न हो कि 1990 में इस घटना को तब अंजाम दिया गया था, जब प्रशासन को काफी पहले से अयोध्या में कारसेवकों के जुटान और निश्चित तारीख को कारसेवा की पहले से सूचना थी। यहां तक कि 30 अक्टूबर 1990 के दिन भी कारसेवकों पर गोलियां बरसाई गई थी। आधिकारिक आंकड़े 30 अक्टूबर को 5 रामभक्तों के बलिदान की पुष्टि करते हैं।

असल में 25 सितंबर 1990 को एक रथ यात्रा शुरू हुई थी। सोमनाथ से शुरुआत हुई और 30 अक्टूबर को अयोध्या पहुंच यात्रा खत्म होनी थी। मकसद था- रामजन्मभूमि को वापस पाने के संघर्ष को जन-जन का संघर्ष बनाना। हिंदुओं को अपने गौरव और अपनी पहचान को लेकर जिंदा करना।
उस समय के प्रधानमंत्री वीपी सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के बीच एक-दूसरे को नीचा दिखाने का खेल चल रहा था। यात्रा शुरू होते ही मुलायम ने इसे खुद को खास मजहब का सबसे बड़ा मसीहा साबित करने के मौके के तौर पर देखा। लिहाजा रथ के पहियों के साथ ही हिंदुओं को उनका धमकाना शुरू हो गया था। उन्होंने बकायदा एलान किया था कि आडवाणी अयोध्या में घुस कर दिखाएं, फिर वे बताएंगे कानून क्या होता है। उनकी इस बयानबाजी का एक मकसद उत्तेजना पैदा करना भी था।

वीपी, मुलायम की सियासत
इधर वीपी सिंह नहीं चाहते थे कि मुलायम अकेले मजहब के मसीहा बनें। सो उनके इशारे पर तब के बिहार के मुख्यमंत्री लालू यादव ने आडवाणी को समस्तीपुर में 23 अक्टूबर की सुबह गिरफ्तार करवाया। इससे एक दिन पहले वीपी सिंह की सरकार ने 20 अक्टूबर की रात लागू किया गया अध्यादेश वापस लिया था।

आडवाणी की गिरफ्तारी ने मुलायम का खेल बिगाड़ा
इस अध्यादेश में विवादित ढांचे और उसके चारों तरफ 30 फीट जमीन छोड़कर अधिग्रहित जमीन रामजन्मभूमि न्यास को सौंपने की बात कही थी। हालांकि इसके लिए भी समुदाय के नुमाइंदे राजी नहीं थे और उनका हीरो बनने के लिए मुलायम ने भी अध्यादेश को लागू नहीं करने की धमकी दी थी लेकिन आडवाणी की गिरफ्तारी ने मुलायम का खेल बिगाड़ दिया।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation