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गमले में उगाएं तोरई, आसान है तरीका

बाजार से खरीदने की नहीं पड़ेगी जरूरत

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 24, 2026
in कृषि
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Torai Farming

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। सीजन कोई भी हो, हरी सब्जियों का मौसम कभी नहीं जाता। गर्मियों में तो वैसे भी हरी सब्जियों के ज्यादा से ज्यादा सेवन की सलाह दी जाती है। हरी सब्जियों में शुमार तोरई (तुरई) स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होती है। यह सब्जी औषधीय गुणों से भरपूर होती है। खून साफ करती और पेट से जुड़ी समस्याएं भी दूर करती है। तोरई को घर की छत या किचन गार्डन में लगाना बहुत आसान है। 45 से 60 दिनों में पौधे फल देने लगते हैं। यानी तोरई तोड़ने लायक हो जाती है।

कैसे उगाएं: तोरई की सब्जी हर घर में की जरूरत है। हर सीजन में बनती है। बाजार में मिलने वाली तोरई की क्वालिटी को लेकर भी चिंता रहती है। ऐसे में घर की छत पर गमले में भी ऑर्गेनिक तरीके से इसे उगाया जा सकता है। बिना केमिकल वाली तोरई को खाने का मजा भी अलग ही है। घर की उगाई तोरई हेल्दी भी होती है। गमले में या ग्रो बैग में तोरई उगाने के लिए मिट्टी कैसी होनी चाहिए, ज्यादा पैदावार लेने के लिए कई बातों का ध्यान रखना चाहिए।

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तीन बार तोड़ाई
वैसे तो तरई (तुरई) की खेती मुख्य रूप से साल में तीन बार की जाती है। फरवरी से मार्च (गर्मी के मौसम के लिए), जून से जुलाई (बरसात या खरीफ के मौसम के लिए), और अक्टूबर से नवंबर (रबी के मौसम के लिए)। तोरई की बेल आप खुद से भी तैयार कर सकते हैं। शर्त यह है कि अच्छी क्वालिटी का बीज खरीद लें। बीज लगाने से पहले मिट्टी तैयार करनी होती है। मिट्टी जितनी अच्छे से हम तैयार करेंगे, जर्मिनेशन उतना ही अच्छा होगा। बीज को पहले डिस्पोजल गिलास में बो सकते हैं। जर्मिनेशन के बाद बेल को बड़े गमले में ट्रांसफर किया जा सकता है।

बेल वाले पौधों को लगाने के लिए बड़े गमले या ग्रो बैग की जरूरत होती है। ग्रो बैग 18×18 का या फिर 21×21 का होना चाहिए। अगर आप नई मिट्टी तैयार कर रहे हैं तो गोबर की खाद या वर्मिपोस्ट, मिट्टी और कोकोपीट तीनों को बराबर-बराबर मिला लें। थोड़ी सी नीम की खली और थोड़ा सा जिप्सम मिला लें। किसी तरह का फंगस न लगे, इसलिए मिट्टी में थोड़ा सा ट्राइकोडर्मा मिला लें। सभी को अच्छे से मिक्स कर लें।

बीज लगाने से पहले उन्हें 10-12 घंटे के लिए पानी में भिगो लें। अगर आप बारिश के सीजन में लगा रहे हैं तो सूखे बीज भी लगा सकते हैं। एक इंच का गड्ढा बनाएं और उसमें बीज रख दें। थोड़ा सा दबाएं और ऊपर से मिट्टी ढंक दे। बड़े ग्रो बैग में 3-4 बीज ही लगाए जा सकते हैं। बीज लगाने के बाद अगर धूप खिली हो तो पानी डाल दें। अगर बारिश होने की संभावना हो तो पानी ना डालें। अगर बीज लगाने के बाद दो-तीन दिन बारिश हो रही हो तो गमले/ग्रो बैग को प्लास्टिक शीट से ढंक दें ताकि बीज गल नल जाए।

लगभग 10 दिन में जर्मिनेशन होने लगता है

जर्मिनेशन के बाद बेल तेजी से बढ़ती है। एक माह में ही बेल को सपोर्ट चाहिए होता है। बेल वाले पौधों की अच्छी पैदावार के लिए क्रीपर नेट जरूरी होता है। क्रीपर नेट ना हो तो बेल को सपोर्ट देने के लिए बांस की लकड़ी का इस्तेमाल करें। या फिर रस्सी के सहारे बेल को बांध दें और दीवार पर चढ़ा दें। नेट भी लगा सकते हैं। सबसे ज्यादा ध्यान इस बात का भी रखें कि ग्रो बैग/गमला ऐसी जगह रखें जहां धूप आए।

गोबर की खाद का कम इस्तेमाल करें

बरसात के समय में तोरई लगाते समय इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि गोबर की खाद का कम इस्तेमाल करें। वर्मिपोस्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं। जब भी धूप निकले और गमले की मिट्टी सूख जाए तो गोबर की खाद डाल सकते हैं। 10-15 दिन में खाद जरूर डालें। इससे पौधे की ग्रोथ बढ़ जाएगी। समय-समय पर हल्की निराई करते रहें। इससे फ्रूटिंग भी ज्यादा होगी। करीब 50-55 दिन बाद बेल में तोरई लगने लगती है।

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