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मजबूरी में घर चलाने के लिए शुरू किया काम, आज 55 लाख का है टर्नओवर

क्षेत्र की कई महिलाओं को दिया रोजगार

by ब्लिट्ज़ इंडिया
November 22, 2024
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ब्लिट्ज ब्यूरो

मेरठ। जीवन में कई बार कठिन परिस्थितियां आती हैं, जिनसे उबरने का कोई साफ रास्ता नहीं दिखता लेकिन जो व्यक्ति इन परिस्थितियों के बीच भी अपनी राह बनाकर आगे बढ़ता है, वही सफलता हासिल कर दूसरे लोगों के लिए मिसाल बन जाता है।

मेरठ की रहने वाली ममता गर्ग ने भी ऐसी ही मिसाल पेश की है। उन्होंने जीवन के अनेक उतार-चढ़ाव का सामना करते हुए कभी हिम्मत नहीं हारी। आज वे महिला उद्यमी के रूप में एक विशिष्ट पहचान रखती हैं। एक विशेष साक्षात्कार में ममता गर्ग ने अपने सफर के बारे में बात की।’

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एमएससी तक पढ़ाई
ममता गर्ग बताती हैं कि उन्होंने एमएससी तक पढ़ाई की है। उनका भी सपना था कि वह नौकरी करके आगे बढ़े लेकिन उनकी ससुराल में नौकरी करना पसंद नहीं किया गया। ऐसे में उन्होंने घर पर ही बच्चों की हैंडीक्राफ्ट की क्लास लेनी शुरू की। इससे न केवल उनका शौक पूरा हुआ, बल्कि वे नई-नई चीजें भी बनाकर घर को सजाती रहीं, जिससे घर खूबसूरत दिखने लगा।

घर की पूरी जिम्मेदारी
ममता गर्ग ने बताया कि साल 2010 में उनके पति का निधन हो गया, जिससे घर की पूरी जिम्मेदारी उन पर आ गई। उन्होंने अपने शौक को ही व्यवसाय में बदलने का निश्चय किया और धीरे-धीरे काम शुरू किया। इसी बीच उनके देवर ने बताया कि उनके पति ने काफी कर्ज लिया हुआ था, जिसे चुकाने में उनकी सारी जमा पूंजी चली गई। इस घटना के बाद वे बीमार भी पड़ गईं, लेकिन हार नहीं मानी। बीमारी से ठीक होने के बाद किराए की दुकान लेकर अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया। उनकी सास ने इस दौरान उनका भरपूर सहयोग किया, जिसकी बदौलत आज वे एक सफल उद्यमी के रूप में जानी जाती हैं।

सजावटी उत्पाद
ममता बताती हैं कि उन्होंने हैंडीक्राफ्ट के साथ बैग मैन्युफैक्चरिंग और शादी-विवाह से संबंधित सजावटी उत्पाद बनाने शुरू कर दिए, जिनकी अच्छी मांग आने लगी पर उनके पास उतनी पूंजी नहीं थी कि वे व्यवसाय को बड़ा रूप दे सकें। इसी बीच एक दिन उनकी दुकान पर एक लोन मैनेजर सामान खरीदने आई, जिसने प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई स्टार्टअप योजना के बारे में बताते हुए उन्हें लोन दिलाने में मदद की।

पीछे मुड़कर नहीं देखा
ममता कहती हैं कि इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब वे शादी-विवाह से संबंधित हर प्रकार का सामान तैयार करती हैं और त्योहारों के लिए पारंपरिक आइटम भी बनाती हैं। ममता गर्ग बताती हैं कि उनके बेटे-बहू उनके बनाए हुए उत्पादों को सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर शेयर करते हैं, जिससे विदेशों में भी उनके सामान की डिमांड रहती है।

उनके साथ 10 महिलाएं स्थायी रूप से काम करती हैं और अन्य कई महिलाओं को भी उनके घर पर रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। अपनी मेहनत के बलबूते पर वे सालाना 50 से 55 लाख रुपये का टर्नओवर कर लेती हैं। ममता गर्ग को नोएडा में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में भी बड़े ऑर्डर मिले थे। उनके द्वारा तैयार किए गए सभी सजावटी उत्पाद पूरी तरह हैंडीक्राफ्ट पर आधारित होते हैं।

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