ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने जीएसटी और सीमा शुल्क अधिनियम के तहत अधिकारियों को दी गई गिरफ्तारी की शक्ति पर अहम फैसला दिया। कोर्ट ने कहा कि इन कानूनों के तहत मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत का हक है। वह राहत पाने के लिए अदालत का रुख कर सकता है, भले ही उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई हो। मुख्य न्यायाधीश संजय खन्ना न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति बेल्या की पीठ ने यह फैसला दिया। मुख्य न्यायाधीश खन्ना ने फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को जीएसटी या सीमा शुल्क कानून के तहत गिरफतारी का डर है, तो वह अग्रिम जमानत के लिए संबंधित अदालत में अर्जी दाखिल कर सकता है, भले ही प्राथमिकी दर्ज न हुई हो। कोर्ट ने कहा कि अग्रिम जमानत से जुड़ा कानून (बीएनएसएस) के प्रावधान जीएसटी अधिनियम और सीमा शुल्क अधिनियम के मामले में भी लागू होंगे।
…तो गिरफ्तारी अवैध
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संज्ञेय और असंज्ञेय अपराधों के मामले में गिरफ्तारी का आदेश पारित करने के लिए अधिकारी को विश्वसनीय कारण बताने के साथ और संतोषजनक रूप से यह दिखाना कि गिरफ्तार व्यक्ति ने गैर-जमानती अपराध किया है। ऐसा नहीं करने पर गिरफ्तारी अवैध मानी जाएगी। पीठ ने कहा कि गिरफ्तारी केवल शक के आधार पर नहीं बल्कि प्रमाणों पर आधारित होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी स्थिति तय करते हुए, अब सभी मामलों में आगे की सुनवाई के लिए 17 मार्च को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।
जीएसटी भुगतान के लिए गिरफ्तारी की धमकी स्वीकार्य नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए इस आरोप में कुछ दम है कि अधिकारी गिरफ्तारी की धमकी देकर जीएसटी का भुगतान करने के लिए मजबूर करते हैं। अदालत ने साफ किया कि अधिकारियों की इस प्रवृत्ति को स्वीकार नहीं किया जा सकता।













