• Latest
  • Trending
vikram

एक साल में सात मिशन: इसरो अंतरिक्ष का सबसे मुश्किल काम कर रहा है — लय बनाना

July 29, 2026
Sarbananda Sonowal

तीन साल में आधी सिफ़ारिश पर हुआ अमल

August 27, 2026
दिल्ली लक्ष्मी योजना: 4,000 महिलाओं को स्वीकृति पत्र, 1 सितंबर से मिलेंगे ₹2,500

लक्ष्मी योजना: पैसा 1 सितंबर से, पर 2.61 लाख फॉर्म अधूरे

August 26, 2026
UPI

यूपीआई के दस साल: अब औसत भुगतान सिर्फ़ ₹1,300 का

August 26, 2026
भारत उच्च शिक्षा

एच-1बी पर एक लाख डॉलर की नई फ़ीस का प्रस्ताव

August 26, 2026
hospital

मौसमी बुखार सामान्य है, पर इन चार को इंतज़ार नहीं करना

August 26, 2026
ई-श्रम पोर्टल के 5 साल: 31.89 करोड़ श्रमिक जुड़े, जानें रजिस्ट्रेशन और योजनाओं का लाभ

ई-श्रम के पाँच साल: 31.89 करोड़ नाम, और आपका हक़

August 26, 2026
daily-news

26 अगस्त की बड़ी खबरें: पंजाब में चीनी स्टॉक, शिमला भूकंप, खेलो इंडिया, बाजार और इसरो लॉन्च

August 26, 2026
दिल्ली लक्ष्मी योजना 2026

दिल्ली लक्ष्मी योजना: पहले 4,000 पत्र आज

August 26, 2026
सुप्रीम कोर्ट

क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट में विशेष पीठ

August 26, 2026
Amit Sah

तीन नए कानून, और एक साल की समयसीमा

August 26, 2026
गेहूँ के आटा-मैदा निर्यात से हटी रोक, किसानों और मंडी भाव पर क्या होगा असर?

बारिश 13% कम, पर दाल का रकबा बढ़ गया

August 26, 2026
farmer

चार साल बाद गेहूं और आटे का निर्यात खुला

August 26, 2026
Thursday, August 27, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

एक साल में सात मिशन: इसरो अंतरिक्ष का सबसे मुश्किल काम कर रहा है — लय बनाना

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 29, 2026
in the blitz
0
vikram

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने इस वित्त वर्ष में सात मिशन का लक्ष्य रखा है। इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन के मुताबिक़ अगली उड़ान क़रीब दो महीने के भीतर होनी है। संख्या के तौर पर यह सिर्फ़ एक कार्यक्रम लगता है, पर तकनीकी तौर पर यह कहीं कठिन चीज़ है — लय। कोई भी सक्षम एजेंसी एक शानदार उड़ान भर सकती है। तय समय पर, बार-बार, भरोसे के साथ उड़ान भरना वह अनुशासन है जो ‘उपलब्धियों की सूची’ को ‘कार्यक्रम’ में बदलता है।

इस साल की सूची जानबूझकर मिली-जुली है — संचार उपग्रह, धरती पर नज़र रखने वाले उपग्रह जो मानसून, समुद्र तट और खेतों की तस्वीर देते हैं, तकनीक की परख करने वाले पेलोड, और गगनयान से जुड़े पूर्व-परीक्षण मिशन। आगे के पेलोड में 6,500 किलोग्राम का एक अमेरिकी संचार उपग्रह भी है — यानी भारत की भारी उपग्रह छोड़ने की क्षमता अब सिर्फ़ अपने काम के लिए नहीं, दुनिया के व्यावसायिक बाज़ार के सामने है। और यह सब स्काईरूट एयरोस्पेस की सफल विक्रम-1 उड़ान के बाद हो रहा है, जिसका मतलब है कि सरकारी कैलेंडर अब एक बड़े निजी तंत्र के भीतर बैठा है।

YOU MAY ALSO LIKE

तीन साल में आधी सिफ़ारिश पर हुआ अमल

लक्ष्मी योजना: पैसा 1 सितंबर से, पर 2.61 लाख फॉर्म अधूरे

लय ही असली क्षमता है: तय समय पर चलने वाला लॉन्च कैलेंडर ही मौसम विज्ञानियों, किसानों, मछुआरों और दूरसंचार कंपनियों को भारतीय उपग्रहों के भरोसे योजना बनाने देता है।

एक उड़ान सुर्ख़ी होती है। बारह महीने में सात उड़ानें उद्योग होती हैं — और नीचे बैठे इस्तेमाल करने वाले सिर्फ़ दूसरी चीज़ पर कुछ बना सकते हैं।

एक नज़र में

• लक्ष्य: इस वित्त वर्ष में इसरो के सात मिशन
• अगली उड़ान: क़रीब दो महीने में — अध्यक्ष वी. नारायणन
• मिशन का मिश्रण: संचार उपग्रह, भू-अवलोकन, तकनीक परीक्षण, गगनयान से जुड़े मिशन
• बड़ा पेलोड: 6,500 किलोग्राम का अमेरिकी संचार उपग्रह
• भू-अवलोकन का उपयोग: मानसून, समुद्र तट और कृषि की निगरानी
• निजी क्षेत्र: स्काईरूट एयरोस्पेस की सफल विक्रम-1 उड़ान के बाद

लय बनाना असल में रॉकेट से ज़्यादा आपूर्ति शृंखला की समस्या है। हर उड़ान में ईंधन, एवियोनिक्स, कंपोज़िट ढांचे, बारीक मशीनी पुर्ज़े और सबसे बढ़कर असेंबली बे का समय तथा प्रशिक्षित टीमें ख़र्च होती हैं। उड़ानों की संख्या दोगुनी करने से इंजीनियर दोगुने नहीं हो जाते। इसके लिए ज़रूरी है कि वेंडर तय समय पर उड़ान-योग्य हार्डवेयर दें, लॉन्च कॉम्प्लेक्स में गुंजाइश बची रहे, और मिशन को सुरक्षित रखने वाली समीक्षा प्रक्रिया ख़ुद रुकावट न बन जाए। इसी वजह से दूसरा लॉन्च पैड और तीसरे पर चल रहा काम किसी इंजन परीक्षण जितना ही अहम है।

इसलिए इस साल की सही कसौटी ‘सात में से सात’ नहीं होगी। कसौटी यह होगी कि दो उड़ानों के बीच का अंतर घटे और अनुमान लगाने लायक़ बने, और निजी कंपनियां छोटे उपग्रह, राइडशेयर और उप-प्रणालियों जैसा रोज़मर्रा का काम बढ़ते हुए संभालें, ताकि इसरो की अपनी क्षमता उसी काम के लिए बचे जो सिर्फ़ राष्ट्रीय एजेंसी कर सकती है — मानव अंतरिक्ष उड़ान, ग्रह विज्ञान और रणनीतिक उपग्रह। अगले बारह महीने का लॉन्च कैलेंडर सार्वजनिक करना, और तारीख़ खिसके तो खुलकर वजह बताना, भारत को व्यावसायिक लॉन्च बाज़ार में किसी एक सफल उड़ान से ज़्यादा भरोसा दिलाएगा। ग्राहक रिकॉर्ड नहीं ख़रीदता। वह तारीख़ ख़रीदता है।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation