ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।पूर्वोत्तर भारत अब केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा और हरित विकास के क्षेत्र में भी देश के लिए एक नई मिसाल बनकर उभर रहा है। केंद्र सरकार की निरंतर नीतिगत पहल और लक्षित निवेश के परिणामस्वरूप यह क्षेत्र ऊर्जा की कमी से निकलकर सुरक्षित, स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।
जलविद्युत परियोजनाओं से मिली नई रफ्तार
पूर्वोत्तर भारत देश की जलविद्युत क्षमता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रखता है। पिछले कुछ वर्षों में यहां कई बड़ी और छोटी जलविद्युत परियोजनाओं पर तेजी से काम हुआ है जिससे क्षेत्र के ऊर्जा विकास को नई गति मिली है।असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित 2,000 मेगावाट क्षमता वाली सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना इस क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। इसके साथ ही, क्षेत्र की अपार संभावनाओं को देखते हुए छोटे जलविद्युत परियोजनाओं का भी लगातार विस्तार किया जा रहा है।
गैस ग्रिड से मजबूत होगी व्यवस्था
नॉर्थ ईस्ट गैस ग्रिड पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा का मजबूत नेटवर्क तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस परियोजना से प्राकृतिक गैस आधारित स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और पूरे क्षेत्र की ऊर्जा व्यवस्था और अधिक मजबूत तथा विश्वसनीय बनेगी।
सौर ऊर्जा बन रही है विकास की नई ताकत
पूर्वोत्तर भारत में अब सौर ऊर्जा और विकेन्द्रीकृत ऊर्जा प्रणालियां तेजी से विकसित हो रही हैं। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की विशेष नीतिगत सहायता से इस क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।
मिजोरम के चम्फाई जिले में 20 मेगावाट क्षमता वाले सौर ऊर्जा पार्क का संचालन शुरू हो चुका है। यह ग्रिड से जुड़ी सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि आम नागरिक भी स्वच्छ, सस्ती और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा का लाभ उठा सकें।
हरित ऊर्जा के क्षेत्र में बन रहा है नया मॉडल
जलविद्युत, गैस ग्रिड और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में लगातार हो रहे निवेश और विकास के कारण पूर्वोत्तर भारत आज ऊर्जा सुरक्षा और हरित विकास का एक मजबूत मॉडल बनकर उभर रहा है। इन पहलों से न केवल क्षेत्र की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल रही है, बल्कि स्वच्छ, टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल विकास की दिशा में भी नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
मुख्य बातें
पूर्वोत्तर में स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा विकास को तेजी मिली।
जलविद्युत परियोजनाओं के विस्तार पर विशेष जोर।
2,000 मेगावाट की सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना सबसे प्रमुख परियोजनाओं में शामिल।
नॉर्थ ईस्ट गैस ग्रिड से स्वच्छ ऊर्जा नेटवर्क को मिलेगी मजबूती।
मिजोरम के चम्फाई में 20 मेगावाट क्षमता वाला सौर ऊर्जा पार्क शुरू।
प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर को बढ़ावा।
ऊर्जा सुरक्षा और हरित विकास की दिशा में पूर्वोत्तर लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।
स्वच्छ गांव, स्वस्थ जीवन: बदल रहा पूर्वोत्तर भारत
एक समय था जब पूर्वोत्तर भारत के ग्रामीण इलाकों में स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी लोगों के लिए बड़ी चुनौती थी लेकिन पिछले 12 वर्षों में यह तस्वीर तेजी से बदली है। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के प्रभाव से आज पूर्वोत्तर के गांव पहले से अधिक स्वच्छ बन रहे हैं और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध हो रही हैं।
स्वच्छ भारत मिशन से खुले में शौच की समस्या हुई समाप्त
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया जा चुका है। वर्ष 2014 से 2026 के बीच पूरे क्षेत्र में लगभग 57 लाख व्यक्तिगत घरेलू शौचालय बनाए गए जिससे लाखों परिवारों को स्वच्छ और सुरक्षित जीवन जीने की सुविधा मिली।
अब लक्ष्य है स्वच्छता को बनाए रखना और बेहतर कचरा प्रबंधन
वर्ष 2020 से शुरू हुए स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के दूसरे चरण में केवल शौचालय बनाने पर ही नहीं बल्कि उनके नियमित उपयोग और कचरे के बेहतर प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इस चरण के तहत ओडीएफ प्लस गांवों का विकास किया जा रहा है जहां ठोस और तरल कचरे का प्रबंधन, प्लास्टिक कचरे का निपटान और मल-कीचड़ (फीकल स्लज) के सुरक्षित उपचार जैसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस दिशा में सिक्कि म और त्रिपुरा ने सभी गांवों को 100 प्रतिशत ओडीएफ प्लस बनाकर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वहीं मिजोरम और सिक्कि म घरों से ही कचरे को अलग-अलग एकत्र करने की व्यवस्था में अग्रणी राज्यों के रूप में उभरे हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं को भी मिली नई मजबूती
पिछले 12 वर्षों में पूर्वोत्तर में स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास पर बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सा ढांचे को लगातार मजबूत बनाया गया है।
अब पूरी तरह से कार्यरत एम्स गुवाहाटी पूर्वोत्तर का प्रमुख सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य संस्थान बन चुका है जहां लोगों को आधुनिक और उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। इसके अलावा, केंद्र प्रायोजित योजना के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र में 12 नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है। इससे चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं दोनों को नई मजबूती मिली है।
आयुष्मान भारत से लाखों लोगों को मिला स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जेएवाई) के तहत अप्रैल 2026 तक पूर्वोत्तर क्षेत्र में 2.43 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं।
इस योजना के माध्यम से 900 से अधिक सूचीबद्ध अस्पतालों में 46 लाख से अधिक मरीजों को उपचार का लाभ मिला है जिससे क्षेत्र के लाखों परिवारों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हुई हैं।
स्वच्छ भारत मिशन, एम्स गुवाहाटी, नए मेडिकल कॉलेजों और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं ने पूर्वोत्तर भारत के विकास को नई दिशा दी है।













