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35,000 करोड़ रुपये के डिपॉजिट का कोई दावेदार नहीं

अनक्लेम्ड इनवेस्टमेंट्स में बैंक डिपॉजिट्स, शेयर और डिविडेंड्स, म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस पॉलिसीज में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी बैंक की

by ब्लिट्ज़ इंडिया
May 26, 2023
in दृष्टिकोण
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No claimant for Rs 35,000 crore deposits

अभिषेक अनेजा

नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं कि भारत में ऐसा बहुत बड़ा अमाउंट (अनक्लेम्ड डिपॉजिट) है, जिसका कोई दावेदार नहीं ? यह पैसा अरबों में है और बैंकों व वित्तीय संस्थानों में पड़ा हुआ है। इस पैसे को उन लोगों का इंतजार है, जिनका इस पर हक है। अक्सर लोग अपने पुराने बैंक अकाउंट्स, निवेश, शेयर और डिविडेंड को भूल जाते हैं। इसकी कई वजहें हो सकती हैं। 10 साल के बाद यह पैसा अनक्लेम्ड डिपॉजिट बन जाता है। ऐसा ज्यादातर निवेशक की मौत की वजह से होता है। उसके परिवार के सदस्यों को या तो इस निवेश की जानकारी नहीं होती या फिर कुछ मामलों में व्यक्ति के पैसों पर हक को लेकर परिवार के सदस्यों के बीच लड़ाई शुरू हो जाती है, जिसका लंबे समय तक कोई समाधान नहीं निकलता।

10.24 करोड़ अकाउंट्स में 35,000 करोड़ रुपये
हाल में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री भगवंत कराड ने लोकसभा को सरकारी बैंकों के 10.24 करोड़ अकाउंट्स आरबीआई को ट्रांसफर करने के बारे में बताया। फरवरी 2023 के अंत में इन अकाउंट्स में करीब 35,000 करोड़ रुपये पड़े हुए थे। ये ऐसे अकाउंट्स हैं, जिन्हें 10 साल से ज्यादा समय तक ऑपरेट नहीं किया गया है। अनक्लेम्ड इनवेस्टमेंट्स में कई तरह के फाइनेंशियल एसेट्स आते हैं। इनमें बैंक डिपॉजिट्स, शेयर और डिविडेंड्स, म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस पॉलिसीज शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा हिस्सेदारी बैंक डिपॉजिट की है।

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अनक्लेम्ड डिपॉजिट की क्या है वजह?
कई लोग जब नौकरी बदलते हैं या दूसरे शहर में चले जाते हैं तो वे पुराने बैंक अकाउंट में पड़े अपने पैसे छोड़ देते हैं। बैंकों के लिए इनएक्टिव अकाउंट्स होल्डर्स को रिमाइंडर भेजना जरूरी है। उन्हें अपने अकाउंट को एक्टिवेट करने या उसे ट्रांसफर कराने के लिए कहा जाता है।
किसी तरह का जवाब नहीं मिलने पर ऐसे अकाउंट्स को डोरमेंट कैटेगरी में डाल दिया दिया जाता है। 10 साल बाद इस पैसे को आरबीआई के डिपॉजिटर्स एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

कई लोग इनवेस्टमेंट्स ट्रैक नहीं करते
शेयरों में अपने निवेश और डिविडेंड्स के बारे में भी अक्सर लोग भूल जाते हैं। कई लोग शेयरों में निवेश करते हैं, लेकिन वे अपने इनवेस्टमेंट को ट्रैक नहीं कर पाते। कुछ मामले में लोगों को अपने शेयरों के बारे में पता नहीं होता या शेयर सर्टिफिकेट्स गुम हो जाने की वजह से वे उसके बारे में भूल जाते हैं। ऐसा म्यूचुअल फंड्स की यूनिट्स और इंश्योरेंस पॉलिसी के मामले में भी है। कई लोग भूल जाते हैं।

अनक्लेम्ड डिपॉजिट पर दावा पेश करने के नियम
अनक्लेम्ड डिपॉजिट पर दावा पेश करना मुश्किल है। पहला लोगों को अपने डोरमेंट अकाउंट के बारे में पता नहीं है। दूसरा, ऐसे पैसे का ट्रैक रखने वाला कोई सेंट्रलाइज्ड सिस्टम नहीं है। अभी व्यक्ति को अलग-अलग बैंकों की वेबसाइट पर जाना पड़ता है या वित्तीय संस्थाओं से संपर्क करना पड़ता है। इसमें काफी समय बर्बाद हो जाता है। साथ ही यह बहुत उबाऊ भी होता है।

अनक्लेम्ड डिपॉजिट्स पर दावा करने में कई तरह की कानूनी बातें भी शामिल होती हैं। व्यक्ति को अपनी पहचान और ओनरशिप का सुबूत पेश करना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान
सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले का संज्ञान लिया है। दरअसल, इस मामले में एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी। इसमें ऐसा सिस्टम बनाने की गुजारिश की गई जिसमें डोरमेंट बैंक अकाउंट में पड़े अनक्लेम्ड अमाउंट के बारे में उनके असली मालिक को सूचित करने की सलाह दी गई है। पीआईएल में इस काम में सरकार की मदद मांगी गई है। इसमें कहा गया है कि सरकार के पास पड़े अनक्लेम्ड अमाउंट को उसके कानूनी उत्तराधिकारी तक पहुंचाने की व्यवस्था होनी चाहिए।

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