• Latest
  • Trending

जस्टिस चंद्रचूड़ की आलोचना भी हो रही है और प्रशंसा भी

November 15, 2024
नार्को-सिंडिकेट पर महाप्रहार

नार्को-सिंडिकेट पर महाप्रहार

October 31, 2026
नशे पर सर्जिकल स्ट्राइक

नशे पर सर्जिकल स्ट्राइक

October 31, 2026
युवाओं के आइडिया और उत्पादों को पंख देने की तैयारी

युवाओं के आइडिया और उत्पादों को पंख देने की तैयारी

October 31, 2026
केविन पीटरसन ने बताया, कैसे बदल रहा है भारत

नया भारत, जिसे दुनिया देख रही है

October 31, 2026
यूपी सरकार 1,000 एकड़ में डेटा सेंटर और आईटी हब करेगी विकसित

यूपी सरकार 1,000 एकड़ में डेटा सेंटर और आईटी हब करेगी विकसित

October 31, 2026
यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए दिल्ली के 70 घाटों पर उतरे हजारों लोग

यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए दिल्ली के 70 घाटों पर उतरे हजारों लोग

October 31, 2026
फिर बदला भदोही का नाम

फिर बदला भदोही का नाम

October 31, 2026
'मोदी-आबे की दोस्ती पद से नहीं, विश्वास से बनी थी'

‘मोदी-आबे की दोस्ती पद से नहीं, विश्वास से बनी थी’

October 31, 2026
गुजरात लगातार पांचवीं बार स्टार्टअप के लिए सर्वश्रेष्ठ राज्य बना

गुजरात लगातार पांचवीं बार स्टार्टअप के लिए सर्वश्रेष्ठ राज्य बना

October 31, 2026
बेलापुर में भूमि के दाम आसमान पर

बेलापुर में भूमि के दाम आसमान पर

October 31, 2026
हवा सुधारने को बीएमसी का 'डीप क्लीन प्लान'

हवा सुधारने को बीएमसी का ‘डीप क्लीन प्लान’

October 31, 2026
बंगाल में चुनाव से पहले हुआ खेला लाखों फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट हुए थे जारी

पश्चिम बंगाल के स्कूलों में मोबाइल पर लगेगा बैन

October 31, 2026
Saturday, October 31, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

जस्टिस चंद्रचूड़ की आलोचना भी हो रही है और प्रशंसा भी

by ब्लिट्ज़ इंडिया
November 15, 2024
in the blitz
0

नई दिल्ली। हाल के वर्षों में देश के सबसे प्रभावशाली मुख्य न्यायाधीशों में से एक रहे जस्टिस चंद्रचूड़ के कार्यकाल की कई वजहों से आलोचना हो रही है।

लोगों को उनसे उम्मीदें थीं कि वो सर्वोच्च न्यायालय के कामकाज का तरीका बदलेंगे, आम नागरिकों के लिए इंसाफ हासिल करना आसान बनाएंगे और “बहुसंख्यकवादी सरकार” पर संवैधानिक नियंत्रण रखेंगे।

YOU MAY ALSO LIKE

नार्को-सिंडिकेट पर महाप्रहार

नया भारत, जिसे दुनिया देख रही है

शायद उनसे उम्मीदें ही इतनी ज़्यादा थीं कि न्यायपालिका पर नजर रखने वाले बहुत से लोग चीफ जस्टिस के तौर पर उनके कार्यकाल को निराशा के साथ देख रहे हैं।

उनके न्यायिक फैसलों के साथ-साथ उनके निजी बर्ताव पर भी चर्चा हो रही है। जस्टिस चंद्रचूड़, अपने भाषणों और इंटरव्यू से मीडिया की सुर्खियों में बने रहे, ऐसा इतिहास में उनसे पहले शायद ही देखा गया हो। हाल की दो बातों की वजह से एक न्यायाधीश के तौर पर उनके व्यवहार की आलोचना की गई।

उन्होंने कहा कि जब अयोध्या मामले की सुनवाई चल रही थी, तो उन्होंने ‘भगवान के सामने बैठकर मदद की गुहार’ लगाई थी।
दूसरा विवाद उस समय पैदा हुआ, जब जस्टिस चंद्रचूड़ के घर पर गणेश पूजा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी का एक वीडियो वायरल हुआ। दोनों ही बातें ऐसी थीं जिनकी न्यायाधीशों से उम्मीद नहीं की जाती है।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने गणेश पूजा को एक ‘निजी आयोजन’ बताया और कहा कि इसमें ‘कुछ भी ग़लत नहीं’ था।
कुछ घटनाओं के अलावा, जस्टिस चंद्रचूड़ अपने पीछे एक पेचीदा विरासत छोड़कर जा रहे हैं। ऐसे में उनके कार्यकाल को स्पष्ट रूप से किसी खांचे में रख पाना मुश्किल है।

जस्टिस चंद्रचूड़ ऐसे कई मकसद हासिल करने में असफल रहे, जो खुद उन्होंने अपने लिए तय किए थे। लेकिन उन्होंने ऐसे भी कई फ़ैसले सुनाए, जो सरकार के दबदबे के खिलाफ थे और जिनसे जनता के अधिकारों का दायरा बढ़ा, मगर साथ ही चंद्रचूड़ ने ऐसे भी कई निर्णय दिए, जिनसे नागरिकों के अधिकारों पर ऐसा असर पड़ा जिसे कई लोग प्रतिकूल मानते हैं।
जस्टिस चंद्रचूड़ के कुछ फ़ैसलों ने भविष्य के लिए एक आदर्शवादी बुनियाद रखी, लेकिन उनमें से कई मामलों में वो फौरी तौर पर कोई राहत नहीं दे सके।

इसके अलावा, सरकार पहले की तरह लगातार न्यायपालिका में नियुक्तियों के लिए दबाव डालती रही और राजनीतिक रूप से संवेदनशील कई मामलों की लिस्टिंग को लेकर भी उनकी आलोचनाएं हुईं।

‘मास्टर ऑफ द रोस्टर’ के तौर पर जस्टिस चंद्रचूड़ का व्यवहार
भारत में न्यायपालिका के शिखर पर बैठने वाले चीफ़ जस्टिस के पास बहुत व्यापक अधिकार होते हैं। एक जज के तौर पर जस्टिस चंद्रचूड़ शांत रहकर हर वकील को पूरे धैर्य से अपनी बात कहने का मौक़ा देने के लिए जाने जाते थे। भले ही वकील सीनियर हों या नहीं। ‘मास्टर ऑफ द रोस्टर’ के नाते उनके पास ये तय करने का पूरा अख़्तियार होता है कि किसी केस की किस बेंच के सामने सुनवाई हो। कौन से जज किस मामले को सुनें। अक्सर किसी केस के फैसले पर इस बात का असर होता है कि उसकी सुनवाई कौन से जज कर रहे हैं। कुछ जज रूढ़िवादी होते हैं, वहीं कुछ उदारवादी होते हैं और अक्सर न्यायाधीशों के इन वैचारिक झुकावों के बारे में सुप्रीम कोर्ट के गलियारों में घूमने वालों को पता होता है।

ऐसे में मुख्य न्यायाधीश ‘मास्टर ऑफ द रोस्टर’ की ताक़त का इस्तेमाल करके, कुछ मामलों के अंतिम निर्णय को भी प्रभावित कर सकते हैं।
2017 में जब जस्टिस दीपक मिश्रा मुख्य न्यायाधीश थे, तो सुप्रीम कोर्ट के चार जजों की एक बेंच ने एक ऐतिहासिक प्रेस कांफ्रेंस की, और ये शिकायत की थी कि मुख्य न्यायाधीश राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों को कुछ चुनिंदा बेंचों को ही आवंटित कर रहे हैं।
तब से ही ये एक संवेदनशील विषय माना जाता रहा है कि किस मामले की सुनवाई किस बेंच में होगी।

लिस्टिंग की आलोचना हुई
जस्टिस चंद्रचूड़ के कार्यकाल में भी कुछ अहम मामलों की किसी खास बेंच के सामने लिस्टिंग की आलोचना हुई। जब वो चीफ जस्टिस बने थे, तो उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि वो अदालतों को और पारदर्शी बनाना चाहते हैं। हालांकि, जब अहम मुक़दमों की लिस्टिंग का सवाल आया, तो उनकी ये बात व्यावहारिक तौर पर पूरी तरह लागू होती नहीं दिखी। चंद्रचूड़ ने अनुच्छेद 370 ख़त्म करने जैसे कई अहम मामलों की सुनवाई के लिए 5, 7 और 9 जजों की बेंच का गठन किया।

कार्यकाल की एक अहम बात
उनके कार्यकाल की एक अहम बात ये रही कि संविधान पीठ से जुड़े 33 मामलों का निपटारा हुआ। ये वो मामले हैं, जो क़ानून के व्यापक प्रश्नों से जुड़े थे, और उनके लिए पांच या फिर उससे भी ज़्यादा जजों की बेंच की ज़रूरत थी।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने अनुच्छेद 370 ख़त्म करने जैसे कई अहम मामलों की सुनवाई के लिए 5, 7 और 9 जजों की बेंच का गठन किया। संविधान पीठ के गठन के मामले में कुछ मुकदमों को दूसरों के ऊपर तरजीह देने पर भी सवाल उठे। मसलन, समलैंगिक जोड़ों की शादी से जुड़े मामले।

चंद्रचूड़ उन बेंचों में शामिल रहे थे, जिसने निजता के अधिकार को मूल अधिकार घोषित किया था और समलैंगिकता को अपराध मानना खत्म किया था। इसी वजह से उनसे बड़ी उम्मीदें थीं कि अब वो समलैंगिकों के शादी करने के अधिकार के मसले पर भी ध्यान देंगे। ये मामला लिस्ट हुआ और रिकॉर्ड तेजी के साथ इसे पांच जजों की बेंच के हवाले कर दिया गया।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में चल रहे ऐसे सारे मामले अपने पास मंगा लिए, हालांकि समलैंगिक समुदाय के लिए इस मामले का आख़िरी नतीजा वैसा नहीं निकला, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। सभी पांच जजों ने आम राय से ये फैसला दिया कि विवाह करना कोई बुनियादी अधिकार नहीं है। वैसे तो कुछ मामलों की सुनवाई बड़ी तेजी से हुई पर दूसरे कई अहम माने जाने वाले मामले अदालत में लटके रहे। मिसाल के तौर पर नागरिकता संशोधन क़ानून से जुड़े मामले और शादीशुदा जिंदगी में रेप का सवाल।

ज़मानत के मामले
चंद्रचूड़ के कार्यकाल में ही भीमा कोरेगांव मामले में अभियुक्त महेश राउत पिछले पांच साल से भी ज़्यादा वक़्त से जेल में बंद हैं। नागरिकों की स्वतंत्रता के कुछ मामलों में जस्टिस चंद्रचूड़ ने बड़ी तेजी दिखाई। मिसाल के तौर पर जब सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को गुजरात हाई कोर्ट ने ज़मानत देने से इनकार कर दिया, तो सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार के दिन विशेष सुनवाई करके जमानत दी थी। लेकिन, जस्टिस चंद्रचूड़ के कार्यकाल में ही भीमा कोरेगांव मामले के अभियुक्त महेश राउत पिछले पांच साल से भी ज़्यादा वक्त से जेल में बंद हैं। इस मामले में 16 कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी जाति पर आधारित हिंसा को बढ़ावा देने और प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) से रिश्तों के आरोप में जेल में बंद हैं। 2023 में महेश राउत को बॉम्बे हाई कोर्ट से ज़मानत मिल गई थी, फिर भी उनकी ज़मानत पर रोक लगा दी गई और मामला अब तक सुप्रीम कोर्ट में अटका हुआ है।
आमतौर पर हाई कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट उस पर रोक नहीं लगाता है, लेकिन ये मामला जस्टिस बेला त्रिवेदी की बेंच में अब तक अटका हुआ है।

आलोचक तो यहां तक कहते हैं कि ये मामला दो जजों की एक बेंच के सामने सुनवाई के लिए लिस्ट हुआ था, जिसमें जूनियर जज के तौर पर जस्टिस बेला त्रिवेदी भी शामिल थीं।

लेकिन, लिस्टिंग के नियमों के उलट ये मामला उस बेंच में चला गया जहां बेला त्रिवेदी सीनियर जज थीं।
ज़मानत से जुड़ा एक और मामला उमर ख़ालिद का है, जो दिल्ली दंगों में अभियुक्त हैं। वो पिछले चार साल से ज़्यादा वक़्त से जेल में बंद हैं।

ShareTweetSend

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation