ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।एक समय था जब भारत के उत्तर-पूर्व को देश का सबसे दूर-दराज और विकास में पीछे छूटा हुआ इलाका माना जाता था लेकिन आज वही उत्तर-पूर्व भारत की सबसे बड़ी विकास गाथाओं में से एक बन चुका है। पिछले 12 वर्षों में बेहतर नीतियों, आधुनिक बुनियादी ढांचे, मजबूत कनेक्टिविटी और लोगों के जीवन को बेहतर बनाने वाले प्रयासों ने इस पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है।
असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्कि म- ये आठों राज्य अपनी प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति और रणनीतिक स्थिति के कारण आज भारत के विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उत्तर-पूर्व अब केवल सीमावर्ती क्षेत्र नहीं बल्कि भारत की आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है।
सरकारी योजनाओं से मिली नई रफ्तार
वर्ष 2014 के बाद उत्तर-पूर्व के विकास को विशेष प्राथमिकता दी गई। उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडीओएनईआर) के माध्यम से हजारों विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी गई। इन योजनाओं का उद्देश्य केवल विकास करना नहीं बल्कि हर राज्य की जरूरत के अनुसार संतुलित और टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना है।
पीएम-डिवाइन (पीएम-डीईवीआईएनई) पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए प्रधानमंत्री की विकास पहल (पीएम डेवलपमेंट इनिशिएटिव फॉर नॉर्थ ईस्ट रीजन), एनईएसआईडीएस उत्तर पूर्व विशेष अवसंरचना विकास योजना (नॉर्थ ईस्ट स्पेशल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम), नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल (एनईसी) और असम-त्रिपुरा के लिए विशेष विकास पैकेज जैसी योजनाओं ने सड़क, पुल, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आजीविका के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है।
एक्ट ईस्ट नीति से बढ़ा दुनिया से जुड़ाव
भारत की एक्ट ईस्ट नीति ने उत्तर-पूर्व को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत–म्यांमार–थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसी परियोजनाएं व्यापार, पर्यटन और आर्थिक सहयोग को नई दिशा दे रही हैं। सीमा क्षेत्रों में भी आधुनिक सुविधाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है।
कनेक्टिविटी ने बदल दी विकास की रफ्तार
उत्तर-पूर्व में सड़क, रेल, हवाई और जल परिवहन के क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार हुआ है और रेल नेटवर्क लगातार नए क्षेत्रों तक पहुंच रहा है।
बोगीबील ब्रिज, ढोला-सादिया ब्रिज, नोने ब्रिज और सेला टनल जैसी परियोजनाओं ने लोगों की यात्रा को पहले से कहीं अधिक आसान, सुरक्षित और तेज बना दिया है।
उड़ान योजना के तहत नए हवाई अड्डे और क्षेत्रीय हवाई सेवाएं शुरू हुई हैं। वहीं ब्रह्मपुत्र नदी पर अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास से परिवहन और नदी पर्यटन को भी नई गति मिली है।
खुल रहे नए अवसर
अब विकास केवल सड़क और पुल तक सीमित नहीं है। भारतनेट और अन्य डिजिटल योजनाओं के माध्यम से हजारों ग्राम पंचायतों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाया गया है। मोबाइल टावरों के विस्तार से दूर-दराज के क्षेत्रों में भी डिजिटल सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं।
हर क्षेत्र में हो रहा समावेशी विकास
उत्तर-पूर्व में आज कृषि, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, युवाओं के कौशल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे क्षेत्रों में लगातार प्रगति हो रही है। स्थानीय ज़रूरतों को ध्यान में रखकर लागू की गई योजनाओं ने इस क्षेत्र को अधिक मजबूत, आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाया है।
एक नजर में
उत्तर-पूर्व के आठों राज्यों में तेज विकास
हजारों विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता
पीएम-डिवाइन और अन्य योजनाओं से आधारभूत ढांचे को मजबूती
सड़क, रेल, हवाई और जलमार्गों का तेज विस्तार
एक्ट ईस्ट नीति से दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ बेहतर संपर्क
और डिजिटल योजनाओं से गांवों तक इंटरनेट की पहुंच
शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आजीविका में लगातार सुधार














