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ई20: आत्मनिर्भर भारत की नई क्रांति

भारत ने बचाई ₹1.98 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 10, 2026
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E20 पेट्रोल

विनोद शील

नई दिल्ली। ई20 सिर्फ नया पेट्रोल नहीं बल्कि नए भारत की दूरदर्शी सोच का प्रतीक है। यह आत्मनिर्भर भारत की नई क्रांति है जो अन्नदाता के ऊर्जादाता बनने का शुभारंभ है। भारत ने ऐसे ही इसकी घोषणा नहीं की बल्कि पूरी तैयारी के बाद ई20 ईंन्धन (20 फीसद एथेनॉल और 80 फीसद पेट्रोल का मिश्रण) लागू किया गया है।

इसके लिए एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाई गई। डिस्टिलरी विस्तार को वित्तीय सहायता दी गई। ऑयल कंपनियों ने एथेनॉल की सुनिश्चित खरीद की। एआरएआई (ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया, भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय के तहत एक प्रमुख ऑटोमोटिव अनुसंधान और प्रमाणन संगठन है जिसकी स्थापना 1966 में हुई थी। यह भारत में बिकने वाले सभी वाहनों के परीक्षण, सुरक्षा मानकों और माइलेज को प्रमाणित करता है), ऑटो कंपनियों और विशेषज्ञों के साथ व्यापक परीक्षण किए गए।

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ईंन्धन की उपलब्धता, इंजन की तैयारी और वैज्ञानिक परीक्षण सफल होने के बाद ही ई20 ईंन्धन को चरणबद्ध तरीके से देशभर में लागू किया गया। इसलिए जरूरी है कि अफवाहों पर ध्यान न देकर सही का चयन किया जाए क्योंकि भारत ही नहीं; अन्य देशों में भी एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का प्रयोग किया जा रहा है।

ई20 ईंन्धन भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, विदेशी मुद्रा बचाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने का एक दूरदर्शी कदम है। इससे किसानों और डिस्टिलरी उद्योगों को ₹1.66 लाख करोड़ से अधिक का लाभ हुआ है। भारत ने ₹1.98 लाख करोड़ से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाई है। तथ्य यह है कि भारत को आज भी अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करना पड़ रहा है। यही कारण है कि जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, विदेशी मुद्रा भंडार और आम नागरिक की जेब पर पड़ता है। ई20 भारत की पेट्रोल आयात पर निर्भरता घटाने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ाने की ओर एक बड़ा कदम है।

क्या बोली सरकार

ई20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने संसद में अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने कहा है कि ई20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित, स्वच्छ और आधुनिक ईंन्धन है। साथ ही यह भी साफ कर दिया गया कि बिना एथेनॉल वाले पुराने या ‘शुद्ध’ पेट्रोल को दोबारा लागू करने की कोई योजना नहीं है और यह कार्यक्रम व्यापक वैज्ञानिक परीक्षण के बाद ही लागू किया गया है। संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन राज्यसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने संसद में लिखित जवाब के जरिए यह जानकारी दी। केंद्र सरकार ने संसद में कहा है कि ई20 पेट्रोल को लेकर उसे वाहनों की परफॉर्मेंस से जुड़ी कोई व्यापक या पुष्ट शिकायत नहीं मिली है। सरकार ने इसके लिए देशभर में 23 करोड़ से ज्यादा गाड़ियों के असल इस्तेमाल के अनुभव और कई स्टडीज का हवाला दिया।

इस बीच जहां एकतरफ एथेनॉल के खिलाफ सड़क पर विरोध हो रहा है, तो दूसरी तरफ केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से मुलाकात कर एथेनॉल के समर्थन में आवाज बुलंद की है।

किसानों के अनेक संगठनों ने कहा कि एथेनॉल से किसानों की आमदनी बढ़ेगी और देश की ऊर्जा भी सुरक्षित होगी। शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात में किसानों ने कहा कि एथेनॉल खेती के लिए नया मौका है। अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति ने कहा कि एथेनॉल को लेकर गलत नैरेटिव को तोड़ने के लिए किसान और सरकार मिलकर काम करें। विभिन्न राज्यों से आए किसान नेताओं ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से कहा कि पेट्रोल नहीं, खेत से निकला एथेनॉल देश का भविष्य है।

ई20 क्रांति के मुख्य लाभ

आयात में कमी : एथेनॉल ब्लेंडिंग से 310 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के आयात को प्रतिस्थापित किया गया है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों के झटकों से देश की अर्थव्यवस्था सुरक्षित रही है।

सृजन : ग्रामीण क्षेत्रों में डिस्टिलरी और बायोफ्यूल परियोजनाओं के विस्तार से स्थानीय स्तर पर नए रोजगार और निवेश के अवसर पैदा हुए हैं।
प्रदूषण में कमी : ई20 ईंन्धन के प्रयोग से कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में 54 मिलियन टन से ज्यादा की कमी आई है।

वाहन अनुकूलन : ऑटोमोबाइल उद्योगों और शोध संस्थाओं (जैसे एआरएआई) के साथ व्यापक वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद इसे अपनाया गया है, जहां अप्रैल 2023 से नए वाहन मटेरियल-कंपैटिबल व अप्रैल 2025 से पूरी तरह इंजन-कंपैटिबल बनाए गए हैं।

अन्नदाता से ऊर्जादाता : गन्ने, मक्के और अन्य कृषि उत्पादों से एथेनॉल तैयार किया जाता है। इससे देश का अन्नदाता किसान अब ऊर्जा उत्पादक भी बन रहा है।

ई20 ईंन्धन पेट्रोल में 20फीसद एथेनॉल और 80 फीसद पेट्रोल का एक मिश्रण है, जो भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने, किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण को स्वच्छ रखने की एक अनूठी क्रांति है।

25 वर्षों की सुनियोजित तैयारी का परिणाम है ई20

इसे देश का दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है कि जिस पहल को उसके व्यापक राष्ट्रीय संदर्भ में समझा जाना चाहिए था वह सोशल मीडिया पर फैली अधूरी जानकारियों और भ्रामक दावों तथा चंद नेताओं के राजनीतिक हितों की चाहतों के कारण विवाद का विषय बनती जा रही है।

दरअसल किसी भी नई पहल का विरोध होना आम बात है पर जब समय उसे सही साबित कर देता है तब सभी को उसके लाभ का अहसास होता है। भारत की विकास यात्रा का इतिहास भी गवाह है कि लगभग हर बड़ा परिवर्तन शुरुआत में संदेह और विरोध का शिकार बना। जब हरित क्रांति शुरू हुई, तब भी अनेक विशेषज्ञों ने संदेह किया था कि नए किस्म के बीज और रासायनिक उर्वरक भारतीय खेती को नुकसान पहुंचाएंगे। श्वेत क्रांति के लिए भी यह कहा गया कि गांवों में संगठित दुग्ध उत्पादन संभव नहीं होगा। डिजिटल भुगतान प्रणाली आई तो अनेक लोगों ने इसे अव्यावहारिक करार दिया पर अब यही भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल भुगतान नेटवर्क का संचालन कर रहा है और दुनिया के अनेक देश इसे अपना रहे हैं।

इसी तरह ई20 को लेकर भी बातें की जा रही हैं। कहा जा रहा है कि इससे वाहन का माइलेज घट जा रहा है। सरकार भी मानती है कि कुछ वाहनों में 3 से 5 प्रतिशत तक माइलेज घट सकता है किंतु क्या किसी ईंन्धन का मूल्यांकन केवल माइलेज के आधार पर किया जा सकता है? सच तो यह है कि एथेनॉल की ऑक्टेन रेटिंग अधिक होती है। इससे वाहन के इंजन में बेहतर दहन होता है, एंटी-नॉक क्षमता बढ़ती है, इंजन की कार्यक्षमता बेहतर होती है और प्रदूषण भी कम होता है जो सभी के स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है। भविष्य में जैसे-जैसे वाहन निर्माता ई20 को ध्यान में रखकर वाहनों के इंजन डिजाइन करेंगे; वैसे-वैसे गाड़ियों का प्रदर्शन और बेहतर होते जाने की संभावना है। ई20 कोई नया प्रयोग नहीं है। यह गत 25 वर्षों की सुनियोजित तैयारी का परिणाम है।

ऐसा प्रचार किया जा रहा है कि भारत ने अचानक पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का निर्णय ले लिया जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल परे है। इस दिशा में काम वर्ष 2001 में शुरू हुआ था। सबसे पहले सीमित स्तर पर एथेनॉल मिश्रण का परीक्षण हुआ। वर्ष 2004 में इसे औपचारिक कार्यक्रम का स्वरूप मिला और 2006 तक कई राज्यों में पांच प्रतिशत मिश्रण वाला ईंन्धन उपलब्ध कराया जाने लगा था। सरकार ने इसमें कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई। करीब दो दशक तक इस दिशा में अनेक स्तर पर काम किया गया।

वर्ष 2018 की राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति और 2021 में जारी ई20 रोडमैप इस पूरी प्रक्रिया के महत्वपूर्ण पड़ाव बने। यानी जिस निर्णय को आज लोग अचानक लागू हुई नीति समझ रहे हैं उसके पीछे 25 वर्षों की तैयारी, हजारों करोड़ रुपये का निवेश और हजारों वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, कृषि विशेषज्ञों तथा उद्योग जगत का संयुक्त प्रयास है।

अतः ई20 को केवल माइलेज आदि के नजरिये से ही देखना और उसके व्यापक लाभों की अनदेखी करना; किसी भी दृष्टि से न्याय एवं तर्कसंगत नहीं कहा जा सकता।2004 में इसे औपचारिक कार्यक्रम का स्वरूप मिला और 2006 तक कई राज्यों में पांच प्रतिशत मिश्रण वाला ईंधन उपलब्ध कराया जाने लगा था। सरकार ने इसमें कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई।

करीब दो दशक तक इस दिशा में अनेक स्तर पर काम किया गया। वर्ष 2018 की राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति और 2021 में जारी ई20 रोडमैप इस पूरी प्रक्रिया के महत्वपूर्ण पड़ाव बने। यानी जिस निर्णय को आज लोग अचानक लागू हुई नीति समझ रहे हैं उसके पीछे 25 वर्षों की तैयारी, हजारों करोड़ रुपये का निवेश और हजारों वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, कृषि विशेषज्ञों तथा उद्योग जगत का संयुक्त प्रयास है।
अतः ई20 को केवल माइलेज आदि के नजरिये से ही देखना और उसके व्यापक लाभों की अनदेखी करना; किसी भी दृष्टि से न्याय एवं तर्कसंगत नहीं कहा जा सकता।

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