राजेश दुबे
नई दिल्ली। विकास और पर्यावरण के संतुलन को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गत दिवस एक अहम फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने कहा कि भविष्य में किसी भी नई परियोजना को शुरू करने से पहले ही पर्यावरण मंजूरी लेनी होगी। काम शुरू होने के बाद मंजूरी नहीं मिलेगी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जायमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने कहा कि यह फैसला केवल आगे से लागू होगा। पहले पर्यावरणीय मंजूरी पा चुकी परियोजनाएं इससे प्रभावित नहीं होंगी।
इसके साथ ही पीठ ने वर्ष 2021 के उस सरकारी आदेश को रद कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार को परियोजनाओं को काम होने के बाद या परियोजनाओं की समाप्ति के बाद पर्यावरणीय मंजूरी देने का अधिकार दिया गया था।
पीठ ने कुल 49 याचिकाओं पर अपना यह फैसला सुनाया है। ये याचिकाएं उन परियोजनाओं से जुड़ी थीं। जिन्होंने पर्यावरण के नियम तोड़े थे और उन्हें बाद में मंजूरी दी गई थी।
केंद्र सरकार के वर्ष 2021 के आदेश के तहत कंपनियां बिना पर्यावरण मंजूरी के भी अपनी परियोजना शुरू कर सकती थीं और बाद में सरकार से मंजूरी ले लेती थीं। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के इस 2021 वाले आदेश को पूरी तरह खत्म कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के बाद माफी मांगने की यह व्यवस्था गलत है। आगे से कोई भी कंपनी बिना पहले इजाजत लिए अपना काम शुरू नहीं कर पाएगी।














