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‘आम्रपाली में कब्जा नहीं लेने वाले खरीदारों के फ्लैट बेच दिए जाएं’

प्राधिकरणों को अतिरिक्त फ्लैट निर्माण की मंजूरी जल्द देने का निर्देश

by ब्लिट्ज़ इंडिया
January 15, 2025
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आम्रपाली बिल्डर्स की परियोजनाओं में नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (एनबीसीसी) की ओर से निर्मित फ्लैटों के खरीदार अगर कब्जा नहीं लेते, तो उनकी बुकिंग रद कर दूसरों को बेच दिया जाए। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी व जस्टिस सतीशचंद्र शर्मा ने आम्रपाली मामले में कोर्ट रिसीवर नियुक्त अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी से एनबीसीसी के प्रयासों के बावजूद कब्जा लेने नहीं पहुंचे खरीदारों के फ्लैटों की ताजा स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा है। नोएडा व ग्रेटर नोएडा प्राधिकरणों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रविंदर कुमार ने बताया कि ग्रेनो प्राधिकरण ने आम्रपाली के गोल्ड होम प्रोजेक्ट में अतिरिक्त फ्लैट बनाने की अनुमति दे दी है। पांच अन्य परियोजनाओं में ऐसी अनुमति के लिए एनबीसीसी को कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी हैं।

एनबीसीसी के वकील सिद्धार्थ दवे ने बताया, इन जरूरी औपचारिकताओं में पोर्टल पर नक्शे को अपलोड करना भी है। चार परियोजनाओं, सेंचुरियन पार्क, लीसर वैली, लीसर पार्क और ड्रीम वैली के नक्शे अपलोड कर दिए हैं। पीठ ने ग्रेनो प्राधिकरण को निर्देश दिया कि औपचारिकता पूरी होने पर चारों परियोजनाओं के लिए जरूरी अनुमति दे दी जाए। वहीं, सिलिकॉन सिटी प्रोजेक्ट के लिए पीठ ने नोएडा प्राधिकरण को निर्देश दिया कि अतिरिक्त फ्लैट बनाने के लिए मंजूरी की प्रक्रिया तेज की जाए। पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि परियोजनाओं के लिए जरूरी पर्यावरणीय मंजूरी जितनी जल्दी हो, उतनी जल्दी दें। पीठ ने बीते साल 29 अगस्त को नोएडा व ग्रेनो प्राधिकरणों को निर्देश दिए थे कि आम्रपाली को छह परियोजनाओं में अतिरिक्त फ्लैट बनाने की मंजूरी योजना मिलने के तीस दिन में दे दी जाए, ताकि परियोजनाएं पूरी करने में आ रही धन की दिक्क त दूर की जा सके।

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लंबित याचिकाओं का निपटारा
शीर्ष कोर्ट ने यह देखते हुए कि आम्रपाली की परियोजनाओं से जुड़ी मुख्य याचिका में कई मांगों का समाधान हो चुका है, कई लंबित याचिकाओं का निपटारा कर दिया। हालांकि पीठ ने यह भी कहा, इनके याचिकाकर्ता कानून के तहत उपलब्ध अन्य समाधान अपना सकते हैं।

500 करोड़ की और जरूरत
एनबीसीसी की ओर से दवे ने पीठ को सूचित किया, परियोजना पूरी करने के लिए एनबीसीसी को और 500 करोड़ रुपये की जरूरत है। यह राशि उस 343 करोड़ के अतिरिक्त है, जो कॉरपोरेशन पहले ही निवेश कर चुका है। वहीं, घर खरीदारों की ओर से एमएल लाहोटी ने कहा कि उनके मुवक्कि ल और राशि नहीं दे सकते क्योंकि बैंकों का समूह एनबीसीसी को पहले ही 1,600 करोड़ रुपये दे चुका है। इसके अलावा, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 650 करोड़ रुपये परियोजनाएं पूरा करने के लिए दिए हैं। लाहोटी ने आरोप लगाया कि एनबीसीसी ने 20 हजार फ्लैट पूरे करने का दावा किया, लेकिन अब तक खरीदारों को सिर्फ सात हजार फ्लैट ही दिए गए है। बाकी फ्लैटों का कोई पता नहीं है।

गलत तथ्य मत रखिए : वेंकटरमणी
वेंकटरमणी ने लाहोटी से अनुरोध किया कि ऐसी सूचना पीठ के सामने न रखें क्योंकि इसमें तथ्यात्मक गलती है। उन्होंने कहा, तीन से चार हजार घर खरीदार अपने फ्लैटों का कब्जा लेने पहुंचे ही नहीं हैं। इन खरीदारों तक पहुंचने के लिए लगातार प्रयास किए गए। उन्होंने अलग-अलग परियोजनाओं के हिसाब से ऐसे फ्लैटों की जानकारी देने के लिए विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में देने का प्रस्ताव भी रखा।

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