ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। आज हर तरफ स्टार्टअप ही चर्चा में है। कभी किसी को फंडिंग मिलने की खबर आती है तो कभी किसी की सक्सेस स्टोरी सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती है। हालांकि बहुत सारे ऐसे छोटे-छोटे बिजनेस भी हैं, जो खुद को स्टार्टअप कहते हैं, लेकिन असल में वह स्टार्टअप हैं नहीं। क्या स्टार्टअप बिजनेस का एक छोटा रूप है यानी छोटा बिजनेस है या फिर कुछ और है? आइए जानते हैं स्टार्टअप कैसे दूसरे बिजनेस से होता है अलग।
क्या होता है छोटा बिजनेस
एक छोटा बिजनेस पहले दिन से ही मुनाफा कमाने लगता है या कम से कम मुनाफा कमाने की कोशिश तो करता ही है। वहीं जब-जब उसे पैसों की जरूरत होती है तो वह कर्ज लेकर उससे निपटने की कोशिश करता है। जब वह काफी बड़ा हो जाता है तब जाकर वह शेयर बाजार में लिस्ट होता है और अपनी हिस्सेदारी बेचता है। एक सामान्य बिजनेस में अधिकतर हिस्सेदारी बिजनेस शुरू करने वाले के ही पास रहती है।
समझिए स्टार्टअप की खूबियां
स्टार्टअप में एक-दो नहीं, बल्कि कई खूबियां होती हैं।
– तमाम स्टार्टअप में एक खास बात ये होती है कि वे किसी न किसी बड़ी समस्या का समाधान ढूंढ़ने की कोशिश करते हैं।
– स्टार्टअप की खासियत यह भी है कि वह सिर्फ मुनाफा कमाने के मकसद से काम नहीं करता। इसी के चलते अधिकतर स्टार्टअप कई सालों तक मुनाफा नहीं कमा पाते।
– एक स्टार्टअप का पहला फोकस होता है पूरे मार्केट पर कब्जा करना। अगर पेटीएम, फ्लिपकार्ट, अमेजन, क्रेड का उदाहरण लें तो पूरे बाजार पर कब्जा करने के बावजूद ये स्टार्टअप मुनाफा नहीं कमा पाए हैं।
– स्टार्टअप की एक खूबी यह भी होती है कि वह तेजी से बड़ा होना चाहता है। स्टार्टअप के फाउंडर बाजार को अपने आइडिया से डिसरप्ट कर देना चाहते हैं यानी खलबली मचा देना चाहते हैं।
– स्टार्टअप को बहुत बड़ा बनना होता है, इसलिए उसे शुरुआत से ही बहुत सारे पैसों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में स्टार्टअप समय-समय पर कई राउंड की फंडिंग लेता है और अपनी पैसों की जरूरत को पूरा करता है। हालांकि, हर राउंड की फंडिंग के साथ स्टार्टअप फाउंडर या को-फाउंडर्स को अपनी कुछ इक्विटी देनी पड़ती है। शुरुआत से ही धीरे-धीरे स्टार्टअप फाउंडर की हिस्सेदारी कम होती है। लंबी अवधि में स्टार्टअप फाउंडर इतने राउंड की फंडिंग ले लेता है कि उसकी हिस्सेदारी बहुत ज्यादा कम हो जाता है, लेकिन कंपनी बहुत बड़ी बन जाती है।



















