ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।पूरे मानसून की क़रीब 29 प्रतिशत बारिश अकेले अगस्त में होती है, और ख़रीफ़ की क़रीब पाँचवीं बुवाई भी इसी महीने। इस बार दोनों तरफ़ दबाव है।
जुलाई के अंत तक देश में ख़रीफ़ की बुवाई क़रीब 8.94 करोड़ हेक्टेयर पर पहुँची थी, जबकि पिछले साल इसी समय तक 9.21 करोड़ हेक्टेयर थी — यानी लगभग 26.5 लाख हेक्टेयर कम। सबसे कमज़ोर लाइन दालों की है: 31 जुलाई तक सामान्य रक़बे का 77.0 प्रतिशत, पिछले साल इसी दिन 82.2 प्रतिशत था। मोटे अनाज 86.4 प्रतिशत पर हैं, पिछले साल 93.4 थे। बाजरा, मक्का, अरहर, मूंग और धान — इन्हीं में कमी का बड़ा हिस्सा है।
एक महीना, दो हिसाब: पूरे मानसून की क़रीब 29 प्रतिशत बारिश अगस्त में होती है, और ख़रीफ़ की क़रीब 20 प्रतिशत बुवाई भी इसी महीने।
कुल बारिश का आँकड़ा तसल्ली देता है। फ़सल यह देखती है कि बारिश किस हफ़्ते और किस ज़िले में हुई।
एक नज़र में
• ख़रीफ़ बुवाई, जुलाई अंत: क़रीब 8.94 करोड़ हेक्टेयर
• पिछले साल इसी समय: क़रीब 9.21 करोड़ हेक्टेयर
• अंतर: लगभग 26.5 लाख हेक्टेयर
• दालें: सामान्य रक़बे का 77.0 प्रतिशत (पिछले साल 82.2)
• मोटे अनाज: 86.4 प्रतिशत (पिछले साल 93.4)
• मौसम विभाग का अनुमान: अगस्त और अगस्त-सितंबर में सामान्य से कम बारिश
• 1 अगस्त तक कुल कमी: सामान्य से 11.5 प्रतिशत कम
• अगस्त का हिस्सा: मानसून की क़रीब 29 प्रतिशत बारिश
• अगस्त में बुवाई: सीज़न की क़रीब 20 प्रतिशत
मौसम विभाग ने अगस्त के लिए, और अगस्त-सितंबर की पूरी दूसरी छमाही के लिए, सामान्य से कम बारिश का अनुमान दिया है — यानी दीर्घकालिक औसत के 94 प्रतिशत से कम। राहत की बात यह है कि 1 अगस्त तक मौसम की कुल कमी घटकर 11.5 प्रतिशत रह गई थी, यानी जुलाई में बारिश ने कुछ भरपाई की। पर खेत के लिए कुल आँकड़ा उतना मायने नहीं रखता जितना यह कि बारिश कब और कहाँ हुई। एक ही ज़िले में दो हफ़्ते सूखा और फिर तीन दिन की मूसलाधार — यह सामान्य बारिश के आँकड़े में ठीक दिखता है, फ़सल में नहीं।
आगे का रास्ता उसी दिशा में है जिस पर काम चल रहा है। दालों में कमी सबसे ज़्यादा है, और यही वह फ़सल है जिसकी थाली में क़ीमत सबसे तेज़ी से चढ़ती है — इसलिए जहाँ बारिश देर से आए वहाँ कम अवधि वाली दालों के बीज उपलब्ध कराना सीधा और असरदार क़दम है। दूसरा, तय तारीख़ पर आने वाली पीएम-किसान और राज्य की किस्तें इसी मौसम में सबसे ज़्यादा काम आती हैं। और तीसरा, ज़िले के स्तर पर मौसम की सलाह किसान के फ़ोन तक पहुँचे — बुवाई का फ़ैसला हफ़्ते भर आगे-पीछे करने से ही आधी लड़ाई जीती जा सकती है।














