ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।इसका आप पर क्या असर पड़ेगा? अगर आप बिहार, झारखंड, ओडिशा या छत्तीसगढ़ में हैं, तो अगले दो दिन आपके पूरे मौसम का हिसाब बदल सकते हैं — अच्छे तरीके से भी, और बुरे तरीके से भी।
देश में 17 अगस्त तक 557.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है, जबकि इस तारीख़ तक का औसत 596.2 मिलीमीटर होता है। यानी कुल मिलाकर करीब 6 प्रतिशत कम। यह आँकड़ा सुनने में मामूली लगता है। लेकिन बारिश का औसत निकालने से खेत नहीं भरता — और इस साल का नक़्शा बुरी तरह बँटा हुआ है।
उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से ज़्यादा पानी गिरा है। बाकी तीनों हिस्सों — पूर्व और पूर्वोत्तर, मध्य भारत, और दक्षिण प्रायद्वीप — में सामान्य से कम। राज्यों में देखें तो केरल 45 प्रतिशत, झारखंड 37 प्रतिशत और बिहार 30 प्रतिशत पीछे है। यानी एक ही देश में इस वक़्त तीन-चार अलग-अलग मौसम चल रहे हैं।
पानी का सवाल कितना नहीं, कब का है: झारखंड को अब तक 37 प्रतिशत कम पानी मिला, और अब दो दिन में बहुत भारी बारिश की चेतावनी है।
देश में 6 प्रतिशत की कमी, और केरल में 45 प्रतिशत की। किसान इनमें से पहले वाले आँकड़े पर खेती नहीं करता।
एक नज़र में
• 17 अगस्त तक बारिश: 557.7 मिमी
• इस तारीख़ तक का औसत: 596.2 मिमी
• कमी: करीब 6 प्रतिशत
• सामान्य से ज़्यादा: उत्तर-पश्चिम भारत
• सामान्य से कम: पूर्व और पूर्वोत्तर, मध्य भारत, दक्षिण प्रायद्वीप
• केरल: करीब 45 प्रतिशत कम
• झारखंड: करीब 37 प्रतिशत कम
• बिहार: करीब 30 प्रतिशत कम
• अभी का सिस्टम: बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम में दबाव
• चेतावनी: गांगेय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ में अत्यधिक भारी बारिश; झारखंड में 18 अगस्त को
अब मौसम विभाग की ताज़ा चेतावनी देखिए। बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से और पश्चिम बंगाल–उत्तरी ओडिशा तट के पास बने दबाव की वजह से गांगेय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड में भारी से बहुत भारी बारिश हो रही है। झारखंड में आज कहीं-कहीं अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी है। यानी जिस राज्य को आठ हफ़्ते में पानी नहीं मिला, उसे दो दिन में मिल रहा है।
किसान के लिए यह मिली-जुली ख़बर है, और सावधानी की भी। एक साथ गिरा पानी ज़मीन में उतरने के बजाय बह जाता है, और खड़ी फ़सल को गिरा भी सकता है। इसलिए दो काम अभी काम के हैं — खेत की मेड़ मज़बूत करना ताकि पानी रुके और सोखा जाए, और खेत से निकासी का रास्ता खुला रखना ताकि धान के अलावा बाकी फ़सलें डूबें नहीं। नुक़सान हो तो तस्वीर लेकर 72 घंटे के भीतर फ़सल बीमा में सूचना देना न भूलें; ज़्यादातर शिकायतें देर से दी गई सूचना पर अटकती हैं। मौसम अभी बाक़ी है, और सितंबर की बारिश कई साल हिसाब बराबर कर चुकी है।













