ब्लिट्ज ब्यूरो
मंडी। पड़ोसी को सबक सिखाने के लिए भारत ने सिंधु जल मामले में काफी आगे कदम बढ़ा दिए हैं। अब चिनाब का रुख मोड़ा जाएगा। इसके लिए गहन सर्वे भी हो चुका है। भू-विज्ञानियों के गहन तकनीकी सर्वेक्षण ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी चिनाब-ब्यास लिंक सुरंग परियोजना को मजबूती प्रदान की है। विशेषज्ञों के अनुसार कोकसर और रोहतांग क्षेत्र की चट्टानें इस निर्माण को संभालने के लिए प्राकृतिक रूप से बेहद परिपक्व और ठोस हैं। यहां की घाटी ऊबड़-खाबड़ और यू आकार की है, जिसकी चोटियां 3095 मीटर से लेकर 6517 मीटर के बीच फैली हैं।
इन पहाड़ियों में रोहतांग नीस सम्मिश्रण की क्वार्टजो-फेल्डस्पैथिक नीस और बायोटाइट नीस चट्टानें हैं। ये चट्टानें इतनी मजबूत हैं कि सुरंग और बांध निर्माण के दौरान भूगर्भीय खतरे या भूस्खलन की आशंका न के बराबर है। चंद्रा नदी का पानी इन चट्टानों को चीरते हुए ब्यास में मिलाया जाएगा। यह परियोजना पानी का रुख मोड़ने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन कर देश की तकदीर बदलेगी।
पाकिस्तान की होगी दुर्गति
यह सिंधु जल समझौते के दायरे में भारत के रणनीतिक हितों को साधते हुए पाकिस्तान को पानी की कमी का सामना कराएगी। गर्मियों में जब उत्तर भारत में पानी की कमी रहती है तो चिनाब का पानी टनल के माध्यम से ब्यास से होते हुए भाखड़ा बांध में मिलाया जाएगा।
चंद्रा नदी का प्रवाह नियंत्रित करने के लिए बनेगा बैराज
परियोजना के केंद्र में चिनाब नदी की सहायक चंद्रा के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए 19 मीटर ऊंचे और 96.05 मीटर लंबे बैराज का निर्माण किया जाएगा। नदी के 20 मीटर गहरे मलबे के ऊपर बनने वाले इस बैराज का पूर्ण जलाशय स्तर समुद्रतल से 3105 मीटर तय किया है। सुरक्षा के मद्देनजर बैराज के शीर्ष को 3107 मीटर पर रखा है।
बांध से ब्यास तक जाएगा पानी
बांध से पानी को ब्यास बेसिन तक ले जाने के लिए 8610 मीटर लंबी और 7.2 मीटर चौड़ी कंक्रीट की गोलाकार जल परिवहन सुरंग बनाई जाएगी। जलग्रहण के लिए बायें किनारे पर बत्तख की गर्दन के आकार के दो विशेष इनटेक मार्ग भी तैयार किए जाएंगे।
आपदा को भी झेल सकेगा प्रोजेक्ट
परियोजना को इस तरह डिजाइन किया है कि किसी भी भीषण प्राकृतिक आपदा या बाढ़ को झेल सके। बैराज में 9.5 मीटर चौड़े और 12 मीटर ऊंचे पांच विशाल स्पिलवे गेट बनाए जाएंगे। आपात स्थिति में यदि कोई गेट तकनीकी रूप से खराब हो जाए, तो बाकी के चार गेट भारी बाढ़ को सुरक्षित बाहर निकालने में सक्षम होंगे।
प्रथम चरण में 673 क्यूमेक्स बाढ़ के पानी को मोड़ने के लिए 13 मीटर चौड़ी और 5.2 मीटर गहरी डाइवर्जन नहर बनाई जाएगी। रिसाव रोकने के लिए मिट्टी के तटबंध के बीच 0.5 मीटर मोटी अभेद्य कंक्रीट की दीवार खड़ी की जाएगी।












