• Latest
  • Trending
पीएम-किसान अब 2031 तक चलेगी

पीएम-किसान अब 2031 तक

August 5, 2026
ब्लूमबर्ग ने देखा सशक्त भारत का ट्रेलर

फास्ट-ट्रैक अदालतों को 2031 तक मिला फंड

November 6, 2026
solar

सौर बिजली रात तक सहेजने को ₹14,500 करोड़ मंजूर

November 6, 2026
स्वदेशी एआई

अब 22 भारतीय भाषाओं में बोलेगा देसी एआई

November 4, 2026
स्वच्छ ऊर्जा से मजबूत हो रही भारत की ऊर्जा सुरक्षा

21 लाख सोलर घरों का बिजली बिल शून्य

November 3, 2026
श्रीहरिकोटा से एनवीएस-03 लेकर उड़ान भरता जीएसएलवी-एफ18। एजेंसी जांच: तस्वीर पर एएनआई, पीटीआई या रॉयटर्स का नाम हो तो न लगाएं।

नाविक को मिला तीसरा नया उपग्रह

November 2, 2026
नार्को-सिंडिकेट पर महाप्रहार

नार्को-सिंडिकेट पर महाप्रहार

October 31, 2026
नशे पर सर्जिकल स्ट्राइक

नशे पर सर्जिकल स्ट्राइक

October 31, 2026
युवाओं के आइडिया और उत्पादों को पंख देने की तैयारी

युवाओं के आइडिया और उत्पादों को पंख देने की तैयारी

October 31, 2026
केविन पीटरसन ने बताया, कैसे बदल रहा है भारत

नया भारत, जिसे दुनिया देख रही है

October 31, 2026
यूपी सरकार 1,000 एकड़ में डेटा सेंटर और आईटी हब करेगी विकसित

यूपी सरकार 1,000 एकड़ में डेटा सेंटर और आईटी हब करेगी विकसित

October 31, 2026
यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए दिल्ली के 70 घाटों पर उतरे हजारों लोग

यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए दिल्ली के 70 घाटों पर उतरे हजारों लोग

October 31, 2026
फिर बदला भदोही का नाम

फिर बदला भदोही का नाम

October 31, 2026
Friday, November 6, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

पीएम-किसान अब 2031 तक

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 5, 2026
in the blitz, कृषि
0
पीएम-किसान अब 2031 तक चलेगी

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।सरकार ने पीएम-किसान योजना को पांच साल और बढ़ा दिया है — 2026-27 से 2030-31 तक, और इसके लिए ₹3.15 लाख करोड़ रखे गए हैं। रकम वही है, साल के ₹6,000, तीन किस्तों में। सवाल यह है कि इतनी छोटी रकम से होता क्या है।

सीधी बात यह है कि ₹6,000 सालाना का मतलब है महीने के करीब ₹500। कोई भी यह नहीं कहता कि इससे घर चल जाएगा। इस पैसे की ताक़त रकम में नहीं, समय में है। खेती में ख़र्च पहले होता है और कमाई बाद में — बीज, खाद, डीज़ल और मज़दूरी बुवाई के वक़्त देनी पड़ती है, और फ़सल का पैसा कटाई के बाद आता है। बीच के इन हफ़्तों में किसान अक्सर गांव के साहूकार से उधार लेता है, और उस उधार का ब्याज सीज़न की आधी कमाई खा जाता है। तय तारीख़ पर आने वाली किस्त फ़सल की कमाई की जगह नहीं लेती। वह यह बदल देती है कि उधार किससे लेना पड़ेगा।

YOU MAY ALSO LIKE

फास्ट-ट्रैक अदालतों को 2031 तक मिला फंड

सौर बिजली रात तक सहेजने को ₹14,500 करोड़ मंजूर

अब तक 23 किस्तें: योजना शुरू होने से अब तक ₹4.47 लाख करोड़ किसानों के खातों में भेजे जा चुके हैं। नीति आयोग के मूल्यांकन दफ़्तर ने पाया कि 92 फ़ीसदी से ज़्यादा लाभार्थियों ने यह पैसा खेती में ही लगाया।

छोटी रकम जो तय दिन आ जाए, वह काम कर जाती है जो बड़ी रकम बेवक़्त आकर नहीं कर पाती।

एक नज़र में

• मंज़ूरी: 31 जुलाई 2026 को केंद्रीय कैबिनेट ने दी
• अवधि: 2026-27 से 2030-31 तक
• कुल रकम: ₹3.15 लाख करोड़
• किसान को: साल के ₹6,000, तीन बराबर किस्तों में, सीधे बैंक खाते में
• अब तक भेजा गया: 23 किस्तों में ₹4.47 लाख करोड़ से ज़्यादा
• महिला किसानों को: ₹1.06 लाख करोड़ से ज़्यादा — हर चौथा लाभार्थी महिला है
• नीति आयोग का आकलन: 92% से ज़्यादा ने कहा, पैसा खेती और खेती के निवेश में लगा

नीति आयोग के मूल्यांकन दफ़्तर की यह बात सबसे काम की है — 92 फ़ीसदी से ज़्यादा किसानों ने बताया कि यह पैसा खेती में और खेती के लिए किए जाने वाले ख़र्च में ही लगा। नक़द मदद देने वाली योजनाओं पर हमेशा यही सवाल उठता है कि पैसा कहीं और तो नहीं चला जाएगा। यहां का जवाब अलग है, और उसकी बड़ी वजह वक़्त है। किस्त उस मौसम में पहुंचती है जब किसान वैसे भी खाद की दुकान पर खड़ा होता है। जब पैसा सही मौक़े पर आए, तो उसे सही जगह ख़र्च करने के लिए किसी को समझाना नहीं पड़ता।

दूसरी बड़ी बात महिलाओं की है। ₹1.06 लाख करोड़ से ज़्यादा महिला किसानों के खातों में गया है और हर चौथा लाभार्थी महिला है। इसकी वजह यह है कि पात्रता ज़मीन के काग़ज़ से तय होती है — यानी यह आंकड़ा असल में बताता है कि देश में कितनी खेती की ज़मीन महिलाओं के नाम दर्ज है। यह ऐसा आंकड़ा है जो और किसी तरीक़े से आसानी से नहीं दिखता। आगे की गुंजाइश भी साफ़ है। योजना ज़मीन वाले किसान परिवारों तक पहुंचती है, इसलिए बटाईदार और खेतिहर मज़दूर इसके दायरे से बाहर रह जाते हैं — जबकि बुवाई के वक़्त पैसे की तंगी उन पर भी उतनी ही होती है। रास्ता यह नहीं कि पीएम-किसान को ही खींचकर बड़ा कर दिया जाए, बल्कि यह कि उनके लिए उनके हिसाब का अलग इंतज़ाम बने। और नीति आयोग की यह जांच हर साल छपती रहे, क्योंकि पांच साल का ऐसा रिकॉर्ड उन बहसों को ख़त्म कर देगा जो दस साल की बयानबाज़ी से नहीं ख़त्म हुईं।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation