ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।जुलाई में देश भर से जीएसटी की वसूली ₹2.11 लाख करोड़ रही, पिछले साल के मुक़ाबले 15.4 फ़ीसदी ज़्यादा। पर यह औसत है, और औसत हर राज्य की कहानी छिपा देता है।
बड़े राज्यों में जुलाई की बढ़त इस तरह रही — हरियाणा 25 फ़ीसदी, गुजरात 19, तेलंगाना 19, पंजाब 16, केरल 16, उत्तर प्रदेश 15, महाराष्ट्र 13 और कर्नाटक 12। यानी सबसे तेज़ और सबसे धीमे बड़े राज्य के बीच एक ही महीने में क़रीब दोगुने का फ़र्क़। जीएसटी की वसूली दरअसल इस बात का पैमाना है कि राज्य के भीतर कारोबार कितना चल रहा है — दुकानें, फ़ैक्ट्रियां, ठेके, सेवाएं। जब यह आंकड़ा 15 फ़ीसदी बढ़ता है, तो इसका मतलब है कि बीते साल के मुक़ाबले लेन-देन उतना ही बढ़ा है।
₹2.11 लाख करोड़ में से ₹66,511 करोड़ बंदरगाह से आया: आयात पर लगने वाला जीएसटी 28.8 फ़ीसदी बढ़ा, जबकि देश के भीतर की वसूली 10.1 फ़ीसदी।
जीएसटी का आंकड़ा सरकार की कमाई से ज़्यादा यह बताता है कि आपके राज्य में कारोबार किस रफ़्तार से चल रहा है।
एक नज़र में
• जुलाई 2026 में कुल वसूली: ₹2.11 लाख करोड़, 15.4% की बढ़त
• देश के भीतर से: ₹1.45 लाख करोड़, 10.1% ज़्यादा
• आयात पर: ₹66,511 करोड़, 28.8% ज़्यादा
• रिफ़ंड के बाद शुद्ध वसूली: ₹1.81 लाख करोड़, 15.8% की बढ़त
• अप्रैल से जुलाई तक: ₹8,42,905 करोड़ — पिछले साल के ₹7,65,607 करोड़ से 10.1% ज़्यादा
• बड़े राज्य: हरियाणा 25%, गुजरात 19%, तेलंगाना 19%, पंजाब 16%, केरल 16%, उत्तर प्रदेश 15%, महाराष्ट्र 13%, कर्नाटक 12%
राज्यों के बीच इतना फ़र्क़ क्यों है, इसकी दो वजहें हैं और दोनों जानना ज़रूरी है। पहली, असली फ़र्क़ — किसी राज्य में इस साल कारोबार सचमुच तेज़ चला। दूसरी वजह ढांचे की है। जिस राज्य में बड़ा बंदरगाह है या जहां की फ़ैक्ट्रियां बाहर से माल मंगाकर काम करती हैं, वहां का आंकड़ा आयात की वजह से भी ऊपर दिखता है। जुलाई में आयात पर लगने वाला जीएसटी 28.8 फ़ीसदी बढ़ा, जबकि देश के भीतर की वसूली 10.1 फ़ीसदी। यानी पूरे महीने की तेज़ी का बड़ा हिस्सा बंदरगाहों से आया है, बाज़ारों से नहीं।
इस आंकड़े का आम आदमी के लिए मतलब सीधा है। जीएसटी में जो पैसा आता है, उसका एक तय हिस्सा राज्यों को जाता है, और वहीं से सड़क, स्कूल, अस्पताल और तनख़्वाहों का बजट बनता है। जिस राज्य की वसूली तेज़ बढ़ रही है, उसके पास ख़र्च करने की गुंजाइश उतनी ही ज़्यादा है। एक बात और ध्यान रखने लायक़ है, और यह ईमानदारी की बात है — अप्रैल से जुलाई तक की कुल वसूली ₹8,42,905 करोड़ रही, जो पिछले साल से 10.1 फ़ीसदी ज़्यादा है। यानी अकेले जुलाई की 15.4 फ़ीसदी की बढ़त पूरे साल की रफ़्तार से पांच अंक ऊपर है। सीधी बात यह है कि जुलाई का महीना अच्छा रहा — पर एक अच्छा महीना अभी अच्छा साल नहीं है।












