नई दिल्ली। दुष्कर्म और बच्चों से यौन अपराध के मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालतों का फंड अगले पांच साल के लिए पक्का हो गया है। केंद्रीय कैबिनेट ने फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की केंद्र प्रायोजित योजना को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी है।
ऑल इंडिया रेडियो की 4 नवंबर की खबर के मुताबिक इस पर 3,788 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होंगे। इसमें प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज (पोक्सो) कानून की विशेष अदालतें भी शामिल हैं।
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मामले: किसी व्यक्ति की फोटो नहीं, और अदालत भवन की फाइल फोटो वर्जित।
योजना में ऐसी 850 अदालतों का प्रावधान है, जिनमें दुष्कर्म और पोक्सो के मामले अलग सूची में चलते हैं। केंद्र का हिस्सा निर्भया फंड से आता है।
पांच साल में बांटें तो यह खर्च करीब 757 करोड़ रुपये सालाना बैठता है।
ब्लिट्ज डेटा कार्ड: ‘850 अदालतें · 3,788 करोड़ रुपये · 31 मार्च 2031 तक’।
यह फैसला नई अदालतें नहीं जोड़ता। पीड़ितों और उनके परिवारों को इसका सीधा फायदा यह है कि इन मामलों की सुनवाई के लिए समर्पित अदालतें बनी रहेंगी।
कैबिनेट के फैसले की जो जानकारी सामने आई है, उसमें निपटाए गए या लंबित मामलों की संख्या नहीं दी गई है।
ब्लिट्ज की सलाह
हर तिमाही अदालतवार निपटारे और लंबित मामलों का ब्योरा एक सार्वजनिक डैशबोर्ड पर जारी हो। इससे उन राज्यों को साफ दिखेगा कि किन अदालतों में और जजों या स्टाफ की जरूरत है।
भारतीय चिप ने 6G रफ्तार से भेजा डेटा
नई दिल्ली। अगली पीढ़ी के मोबाइल नेटवर्क की एक बड़ी तकनीकी अड़चन पर भारतीय वैज्ञानिकों ने काम आगे बढ़ाया है। बेंगलुरु के जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च ने ऐसी सिलिकॉन चिप दिखाई है जो टेराहर्ट्ज सिग्नल को 100 Gbit/s तक की रफ्तार से ले जाती है।
डीडी न्यूज की 5 नवंबर की खबर के मुताबिक यह काम आईआईएसईआर कोलकाता, आईआईटी बॉम्बे और सिंगापुर-फ्रांस के साझेदारों के साथ हुआ है। शोध ‘एडवांस्ड मैटेरियल्स’ जर्नल में छपा है।
ब्लिट्ज डेटा कार्ड: ‘100 Gbit/s · 310–360 GHz · सिलिकॉन।
जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च केंद्र के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी का स्वायत्त संस्थान है।
टीम ने फोटोनिक टनलिंग नाम के क्वांटम जैसे असर का इस्तेमाल किया। सिलिकॉन में बने छेदों की ज्यामिति बदलकर उन्होंने टेराहर्ट्ज तरंगों को उन रुकावटों के पार पहुंचाया जो आम तौर पर उन्हें रोक देती हैं, और नुकसान भी कम रहा।
310 जीएचजेड से 360 जीएचजेड के बीच परीक्षण में डबल-बैरियर डिवाइस ने 48 Gbit/s और चार तीखे मोड़ वाले ओमेगा आकार के डिवाइस ने 60 Gbit/s डेटा भेजा।
माना जा रहा है कि 6जी नेटवर्क टेराहर्ट्ज बैंड में चलेंगे। सबसे मुश्किल काम चिप पर सिग्नल को तीखे मोड़ों से घुमाना है।
यह प्रयोगशाला का नतीजा है, बाजार में आने वाला उत्पाद नहीं। फिर भी यह उस क्षेत्र में भारतीय बौद्धिक संपदा है, जहां अगले दशक के मानक अभी लिखे जा रहे हैं।














