नई दिल्ली, 3 नवंबर। देश के 21 लाख से ज्यादा घरों का बिजली बिल अब शून्य आ रहा है। ये वे घर हैं जिन्होंने पीएम सूर्य घर योजना में छत पर सोलर पैनल लगवाए हैं। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने यह जानकारी अपने लेख में दी, जिसे न्यूज ऑन एयर ने 2 नवंबर को प्रकाशित किया।
योजना से अब तक 65 लाख परिवार जुड़ चुके हैं। लक्ष्य 1 करोड़ घरों का है। यानी हर तीन में से एक सोलर घर बिजली का कोई बिल नहीं भर रहा।
सोलर बिजली 10 साल में करीब 73% सस्ती हुई। अब देश में बने सेल पर जोर।
सस्ती बिजली का हिसाब
मंत्री के मुताबिक 2014-15 में सोलर बिजली करीब 8 रुपये प्रति यूनिट पड़ती थी। अब यह 2.15 रुपये तक आ गई है। ब्लिट्ज के हिसाब से यह करीब 73 फीसदी की गिरावट है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 नवंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत नवीकरणीय ऊर्जा समिट और एक्सपो का उद्घाटन किया। डीडी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बताया कि सरकार की 44,000 से ज्यादा इमारतें सोलर से चल रही हैं। इससे हर साल करीब 700 करोड़ रुपये की बचत हो रही है।
किसानों को भी फायदा पहुंचा है। कुसुम योजना से 30 लाख से ज्यादा किसान जुड़े हैं। प्रधानमंत्री के मुताबिक हर सोलर पंप पर सालाना करीब 1 लाख रुपये की बचत हो रही है।
पैनल हमारे, सेल पर अब जोर
दस साल पहले देश में सिर्फ करीब 2 गीगावाट सोलर मॉड्यूल बनते थे। अब यह क्षमता 200 गीगावाट से ज्यादा है, यानी सौ गुना लेकिन सोलर सेल बनाने की क्षमता करीब 40 गीगावाट ही है।
सेल ही पैनल का असली दिल है। अपने देश में बने सेल अभी पैनल फैक्टरियों की सिर्फ पांचवें हिस्से की जरूरत पूरी कर पाते हैं। अगला बड़ा काम यही है।
देश की कुल बिजली क्षमता में आधे से ज्यादा हिस्सा अब गैर-जीवाश्म स्रोतों का है, करीब 300 गीगावाट। 2030 तक लक्ष्य 500 गीगावाट का है। इसके लिए हर साल करीब 50 गीगावाट जोड़ना होगा।
“यह लक्ष्य थोड़ा कठिन है, लेकिन मुझे अपने देश की क्षमता पर भरोसा है,” प्रधानमंत्री ने कहा।
समिट 5 नवंबर तक चलेगा। इसी दौरान अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की नौवीं सभा भी हो रही है। भारत ने अफ्रीका के लिए 20 करोड़ डॉलर की सोलर सुविधा का प्रस्ताव भी रखा है।
भारत को क्या मिला
अपने कारखानों में बनी सस्ती बिजली, और दुनिया के सोलर मंच पर अगुवाई।
एक नजर में
•सोलर मॉड्यूल क्षमता : 200 गीगावाट से ज्यादा (10 साल पहले करीब 2 गीगावाट)
•सोलर सेल क्षमता : करीब 40 गीगावाट
•पीएम सूर्य घर : 65 लाख घर जुड़े; 21 लाख से ज्यादा का बिल शून्य
तुलना
•सोलर बिजली की दर : अब 2.15 रुपये प्रति यूनिट तक, 2014-15 में करीब 8 रुपये। करीब 73% सस्ती।
हमारा हिसाब
देसी सेल, पैनल क्षमता का करीब पांचवां हिस्सा (40 ÷ 200)। 2030 का लक्ष्य पाने के लिए हर साल करीब 50 गीगावाट जोड़ने होंगे।
भारत को क्या मिला
सस्ती और अपनी बनाई बिजली।
ब्लिट्ज की सराहना
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और देश के सोलर निर्माता, जिन्होंने दस साल में क्षमता सौ गुना की।
आंकड़े प्रधानमंत्री के बीआरईएसई 2026 संबोधन (डीडी न्यूज, 2 नवंबर 2026) और मंत्री प्रह्लाद जोशी के लेख (न्यूज ऑन एयर, 2 नवंबर 2026) से; ddnews.gov.in और newsonair.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज़ की सलाह
अब जोर सेल और वेफर बनाने पर हो। बिजली पहुंचाने वाली ट्रांसमिशन लाइनें सोलर पार्क से पहले बिछें, तो 2030 का लक्ष्य देसी सेल से पूरा होगा।
हाईवे किनारे रहने वालों का टोल सस्ता 20 किमी के दायरे वालों के लिए सालाना पास।
नई दिल्ली, 3 नवंबर। नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा के पास रहने वालों को अब रोज-रोज पूरा टोल नहीं भरना पड़ेगा। प्लाजा से 20 किमी के दायरे में रहने वाले निजी वाहन मालिक सालाना पास बनवा सकेंगे।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने यह योजना 27 अक्टूबर को घोषित की थी। टोल प्लाजा पर यह 1 नवंबर से लागू हो गई है। शहर की सीमा से बाहर वाले प्लाजा पर पास 1,500 रुपये सालाना का है। शहर की सीमा के भीतर वाले प्लाजा पर 3,000 रुपये।
शर्त यह है कि गाड़ी पर चालू फास्टैग हो। पास उसी प्लाजा पर चलेगा जहां से बना है। इसे किसी और को नहीं दिया जा सकेगा। राजमार्गयात्रा ऐप पर यह सुविधा 1 दिसंबर से मिलेगी।
फोटो नहीं — यह खाना खाली रखें : अधिसूचना की कोई घटना-फोटो नहीं होती · इसकी जगह ब्लिट्ज डेटा कार्ड चलेगा।
भारत को क्या मिला
हाईवे किनारे बसे परिवारों के लिए रोज के खर्च में राहत।
अक्टूबर में जीएसटी से 2.31 लाख करोड़ त्योहारी महीने में वसूली 22.9% बढ़ी।
नई दिल्ली, 3 नवंबर।त्योहारों की खरीदारी ने सरकार का खजाना भी भरा है। अक्टूबर में कुल जीएसटी वसूली 2.31 लाख करोड़ रुपये रही। यह पिछले साल के मुकाबले 22.9 फीसदी ज्यादा है।
वित्त मंत्रालय ने ये अस्थायी आंकड़े 1 नवंबर को जारी किए, जिन्हें न्यूज ऑन एयर ने प्रकाशित किया। देश के भीतर के कारोबार से 1.59 लाख करोड़ रुपये आए, जो 15.8 फीसदी ज्यादा है। आयात पर टैक्स 42.2 फीसदी बढ़कर 72,246 करोड़ रुपये रहा।
रिफंड घटाने के बाद शुद्ध वसूली 2.03 लाख करोड़ रुपये रही। यह 25.6 फीसदी की बढ़त है।
एक बात ध्यान रखने की है। मंत्रालय ने पिछले अक्टूबर का आंकड़ा अब 1.88 लाख करोड़ रुपये माना है, जबकि पिछले साल यह करीब 1.96 लाख करोड़ बताया गया था। बढ़त इसी नए आधार पर है।
भारत को क्या मिला
राज्यों और केंद्र के पास सड़क, अस्पताल और स्कूल पर खर्च के लिए ज्यादा पैसा।
यूपीआई से रोज 1 लाख करोड़
मुंबई, 3 नवंबर। चाय की दुकान से लेकर बड़े शोरूम तक, अक्टूबर में लोगों ने यूपीआई से रिकॉर्ड भुगतान किया। पूरे महीने में 25.47 अरब लेन-देन हुए, जिनकी कुल रकम 31.53 लाख करोड़ रुपये रही।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई ) के 1 नवंबर को जारी आंकड़ों के मुताबिक पहली बार औसतन हर दिन 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान हुआ। रोज की औसत रकम 1,01,707 करोड़ रुपये रही।
एक साल में लेन-देन की संख्या 23 फीसदी बढ़ी, रकम 15.6 फीसदी। यानी छोटे भुगतान तेजी से बढ़ रहे हैं। एक भुगतान औसतन करीब 1,238 रुपये का रहा।
भारत को क्या मिला
छोटे दुकानदारों के लिए बिना फीस का डिजिटल भुगतान, जिसे दुनिया सीख रही है।
त्योहारों में गाड़ियों की रिकॉर्ड बिक्री
नई दिल्ली, 3 नवंबर।नवरात्र और दशहरे के महीने में शोरूम से गाड़ियां रिकॉर्ड रफ्तार से निकलीं। मारुति सुजुकी ने अक्टूबर में 2,76,120 गाड़ियां बेचीं। कंपनी के इतिहास में यह सबसे अच्छा महीना है। मीडिया ने 1 नवंबर को कंपनी के आंकड़े जारी किए।
मारुति का निर्यात 59 फीसदी बढ़कर 49,872 गाड़ियों पर पहुंचा। टाटा मोटर्स की देश में बिक्री 21 फीसदी बढ़कर 73,894 रही। उसकी इलेक्ट्रिक गाड़ियां 75 फीसदी बढ़ीं।
मारुति का सबसे अच्छा महीना, बिजली वाले स्कूटर 48% बढ़े।
दोपहिया में टीवीएस मोटर की बिक्री 28 फीसदी और हीरो मोटोकॉर्प की 16 फीसदी बढ़ी। वाहन पोर्टल पर 2,23,887 इलेक्ट्रिक दोपहिया दर्ज हुए, जो 48 फीसदी ज्यादा है।
ये आंकड़े कंपनियों से डीलरों को भेजी गई गाड़ियों के हैं, ग्राहकों को हुई बिक्री के नहीं।
भारत को क्या मिला
कारखानों में रोजगार, विदेश में भारतीय गाड़ियों की मांग और बिजली वाले वाहनों का बढ़ता बाजार।
पुणे के आईटी हब तक मेट्रो हिंजवडी–शिवाजीनगर लाइन शुरू।
पुणे, 3 नवंबर। पुणे के हिंजवडी आईटी हब में काम करने वाले लाखों लोगों का सफर अब आसान होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंजवडी–शिवाजीनगर मेट्रो लाइन शुरू की और नई मेट्रो परियोजनाओं की नींव रखी।
पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की ओर से 3 नवंबर को जारी संबोधन के मुताबिक यह लाइन सरकारी-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर बनी है। महाराष्ट्र में करीब 175 किमी मेट्रो चल रही है और 680 किमी से ज्यादा पर काम जारी है।
“जब शहर का समय बचता है, तो शहर की प्रॉडक्टिविटी बढ़ती है,” प्रधानमंत्री ने कहा।
भारत को क्या मिला
निजी पूंजी से शहरी रेल बनाने का मॉडल, देश के बड़े सॉफ्टवेयर शहर में।
देसी बुलेट ट्रेन का डिजाइन तैयार
पहला प्रोटोटाइप 2027 की शुरुआत में।
बेंगलुरु, 3 नवंबर। भारत में बनी पहली बुलेट ट्रेन का डिजाइन तैयार हो गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बेंगलुरु में बीईएमएल के कारखाने में इसके मॉडल और सिस्टम देखे। न्यूज ऑन एयर ने 1 नवंबर को यह खबर दी।
यह ट्रेन 280 से 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के लिए बनाई जा रही है। बीईएमएल की अगुवाई वाला समूह इसे मुंबई–अहमदाबाद हाई स्पीड कॉरिडोर और आगे के रूट के लिए बना रहा है। पहला प्रोटोटाइप अगले साल की शुरुआत में आ सकता है।
भारत को क्या मिला
तेज रफ्तार रेल की तकनीक, जो विदेश से खरीदी नहीं, देश में बनी।
नौसेना को आठ नए युद्धपोत 53,880 करोड़ रुपये से ज्यादा के करार।
नई दिल्ली, 3 नवंबर। कोलकाता और गोवा के शिपयार्ड में अगले कुछ साल आठ नए युद्धपोत बनेंगे। रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के लिए आठ नेक्स्ट-जेनरेशन कॉर्वेट के करार किए हैं, जिनकी कुल कीमत 53,880 करोड़ रुपये से ज्यादा है। न्यूज ऑन एयर ने 2 नवंबर को यह जानकारी दी।
इन जहाजों का डिजाइन नौसेना ने खुद बनाया है। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स पांच और गोवा शिपयार्ड तीन जहाज बनाएगा। करार पर दस्तखत रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में हुए।
ब्लिट्ज के हिसाब से एक जहाज औसतन करीब 6,735 करोड़ रुपये का है। मीडिया के मुताबिक पहला जहाज 2030 तक मिलने का लक्ष्य है।
भारत को क्या मिला
देश में डिजाइन और देश में बने युद्धपोत, शिपयार्ड में सालों का काम।
सोमालिया के पास 20 नाविक छुड़ाए नौसेना का 48 घंटे से ज्यादा चला अभियान।
नई दिल्ली, 3 नवंबर। अगवा मछली पकड़ने वाले जहाज अजिनी के सभी 20 नाविक सुरक्षित हैं। भारतीय नौसेना ने सोमालिया के पास 48 घंटे से ज्यादा चले अभियान में जहाज को छुड़ा लिया। रक्षा मंत्रालय ने 3 नवंबर को यह जानकारी दी।
अभियान में एक युद्धपोत और एक समुद्री निगरानी विमान लगे। वायुसेना के सी-17 विमान से मरीन कमांडो (मार्कोस) उतारे गए।
भारत को क्या मिला
समंदर में दूर तक पहुंचने की ताकत, और हर नाविक की सुरक्षित वापसी।
कोल इंडिया का सबसे बड़ा उत्पादन सर्दी से पहले बिजलीघरों तक रिकॉर्ड कोयला।
कोलकाता, 3 नवंबर। सर्दियों में बिजली की मांग से पहले बिजलीघरों तक रिकॉर्ड कोयला पहुंचा है। कोल इंडिया ने अक्टूबर में 5.71 करोड़ टन कोयला बिजलीघरों को भेजा। कंपनी का कुल उत्पादन 19 फीसदी बढ़कर 6.72 करोड़ टन रहा, जो किसी एक महीने में सबसे ज्यादा है।
कैप्टिव और कमर्शियल खदानों ने 2.20 करोड़ टन कोयला निकाला, जो 42 फीसदी ज्यादा है। कोयला मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 87 खदानें चालू हैं।
पिछले साल अक्टूबर में उत्पादन घटकर करीब 5.64 करोड़ टन रह गया था। इसलिए बढ़त का एक हिस्सा कमजोर आधार से भी है।
भारत को क्या मिला
देसी कोयले से बिजली, आयात पर कम निर्भरता।
प्रदूषण के आंकड़ों से बाढ़ का बेहतर अनुमान आईआईटी मद्रास के अध्ययन से चेन्नई की बाढ़ का सटीक अंदाजा।
चेन्नई, 3 नवंबर। शहर में बाढ़ कब और कितनी आएगी, इसका अंदाजा अब ज्यादा सटीक हो सकता है। यह आईआईटी मद्रास के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की अगुवाई में हुए अध्ययन का नतीजा है। इसके मुताबिक हवा के प्रदूषण कणों को मौसम मॉडल में जोड़ने से बाढ़ का अनुमान बेहतर होता है।
टीम ने दिसंबर 2015 में चेन्नई की अड्यार नदी घाटी में आई बाढ़ को कंप्यूटर पर दोबारा रचा। प्रदूषण कणों के बिना मॉडल ने 242 मिमी बारिश बताई। कणों को जोड़ने पर 297 मिमी आई। उपग्रह से असल बारिश 334 मिमी दर्ज हुई थी।
ब्लिट्ज के हिसाब से अनुमान की चूक 92 मिमी से घटकर 37 मिमी रह गई, यानी करीब 60 फीसदी कम।
यह अध्ययन 12 अगस्त 2026 को अंतरराष्ट्रीय जर्नल नेचुरल हैजर्ड्स एंड अर्थ सिस्टम साइंसेज में छपा। आईआईटी मद्रास ने 5 अक्टूबर 2026 को इसकी जानकारी दी। इसमें जर्मनी, जापान और नेपाल के संस्थान भी साथी रहे।
प्रयोगशाला से आगे का रास्ता
यह अभी एक पुरानी घटना पर कंप्यूटर सिमुलेशन है, चालू पूर्वानुमान प्रणाली नहीं। IIT मद्रास के मुताबिक इसे बड़े पैमाने पर लाने के लिए प्रदूषण के बारीक आंकड़े, तेज कंप्यूटर और दूसरे शहरों पर परीक्षण चाहिए।
भारत को क्या मिला
: समुद्र किनारे बसे शहरों के लिए बाढ़ की बेहतर चेतावनी का रास्ता।
ब्लिट्ज़ की सलाह
भारत मौसम विज्ञान विभाग और आईआईटी मद्रास, उत्तर-पूर्वी मानसून में चेन्नई पर इस तरीके का परीक्षण साथ कर सकते हैं।
विवाद से विश्वास योजना का हिसाब
नई दिल्ली, 3 नवंबर। इनकम टैक्स के पुराने विवाद निपटाने वाली ‘विवाद से विश्वास’ योजना से 1.06 लाख मामले सुलझे और सरकार को 71,924 करोड़ रुपये मिले। यह जानकारी नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) की 2026 की रिपोर्ट संख्या 8 में है, जो 12 अगस्त 2026 को संसद के दोनों सदनों में रखी गई।
सीएजी रिपोर्ट : 71,924 करोड़ रुपये वसूले, कागजों में देरी।
योजना में करीब 0.99 लाख करोड़ रुपये के विवादित टैक्स के लिए आवेदन आए थे। यानी इसका करीब तीन-चौथाई हिस्सा वसूल हुआ।
देरी कहां हुई
सीएजी ने 5,212 मामलों की जांच की। इनमें से 3,285 मामलों में फॉर्म-3 देर से जारी हुआ। कुछ मामलों में देरी 868 दिन तक रही। सिस्टम में याद दिलाने की कोई व्यवस्था नहीं थी।
389 मामलों में योजना के नियम ठीक से लागू नहीं हुए। इनमें 1,675.65 करोड़ रुपये जुड़े हैं।
मंत्रालय ने ओडिशा के एक मामले में गलती मानी। 27 अगस्त 2024 को हाथ से फॉर्म-3 और फॉर्म-5 जारी कर सुधार किया गया। कई बिंदुओं पर जून 2026 तक मंत्रालय का जवाब आना बाकी था।
सुधार का रास्ता
सीएजी ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) को सुझाव दिया है कि आगे की योजनाओं में हर फॉर्म की समय-सीमा तय हो। पुराने सिस्टम से आंकड़े अपने-आप आएं और निगरानी की व्यवस्था पहले से बने।
भारत को क्या मिला
अगली विवाद निपटान योजना के लिए परखा हुआ खाका, ताकि टैक्स भरने वाले को समय पर कागज मिलें।
ब्लिट्ज की सलाह
अगली योजना के नियमों में ही हर फॉर्म का कैलेंडर तय हो और करदाता उसे ऑनलाइन देख सके, तो ऑडिट की सीख जल्दी राहत में बदलेगी।














