श्रीहरिकोटा, 2 नवंबर। भारत की अपनी दिशा बताने वाली प्रणाली नाविक को अंतरिक्ष में नई ताकत मिली है। इसरो ने बताया कि जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट 30 अक्टूबर की रात 11 बजकर 51 मिनट पर श्रीहरिकोटा से उड़ा। उसने एनवीएस-03 उपग्रह को तय कक्षा में पहुंचा दिया।
अगले ही दिन उपग्रह ने अपना इंजन चलाया। इसरो के मुताबिक 31 अक्टूबर को 2,174.8 सेकेंड तक इंजन चला। इससे कक्षा का निचला बिंदु 170.3 किलोमीटर से बढ़कर करीब 5,477.6 किलोमीटर हो गया। उपग्रह पूरी तरह ठीक है।
अब कुछ और चरणों के बाद यह 111.75 डिग्री पूर्व पर अपनी जगह लेगा। यह वही जगह है जहां पिछले साल भेजा गया एनवीएस-02 नहीं पहुंच पाया था।
इसमें भारत में बनी परमाणु घड़ी लगी है। यह एल1 सिग्नल भी देगा। दुनिया के ज्यादातर मोबाइल फोन यही सिग्नल पढ़ते हैं। नाविक भारत और उसकी सीमा से करीब 1,500 किलोमीटर आगे तक काम करता है।
नाविक को अपने दम पर चलने के लिए कम से कम चार चालू उपग्रह चाहिए। एनवीएस-04 और एनवीएस-05 के बाद यह जरूरत पूरी होगी।
भारत को क्या मिला
दिशा और समय का ऐसा सिग्नल जो भारत के हाथ में है, किसी दूसरे देश के नहीं। मछुआरों, रेल-सड़क के बेड़ों, बिजली ग्रिड, बैंकों और सेना — सबको इसका फायदा।
अक्टूबर में जीएसटी 2.31 लाख करोड़ के पार
नई दिल्ली, 2 नवंबर। त्योहारों की खरीदारी सरकारी खजाने तक पहुंची। अक्टूबर में कुल जीएसटी वसूली 22.9 फीसदी बढ़कर 2 लाख 31 हजार 290 करोड़ रुपये रही। पिछले साल अक्टूबर में यह 1 लाख 88 हजार करोड़ रुपये थी। जीएसटी नेटवर्क ने 1 नवंबर को ये शुरुआती आंकड़े जारी किए।
इसकी जगह: ब्लिट्ज डेटा कार्ड — “अक्टूबर जीएसटी: 2.31 लाख करोड़, 22.9 फीसदी बढ़त”। देश के भीतर 1.59 लाख करोड़, आयात 72 हजार करोड़ · स्रोत: जीएसटीएन, 1 नवंबर 2026। दोबारा देखने से पहले: वित्त मंत्रालय और पीआईबी पर लाइसेंस वाली आधिकारिक ग्राफिक देखें।
रिफंड के बाद शुद्ध वसूली और तेज बढ़ी। यह 25.6 फीसदी बढ़कर 2 लाख 3 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा रही।
देश के भीतर की वसूली 15.8 फीसदी बढ़ी। आयात पर वसूली 42.2 फीसदी उछली। यानी अक्टूबर के जीएसटी का करीब तीसरा हिस्सा बंदरगाहों और सीमा से आया।
पूर्वोत्तर ने सबको पीछे छोड़ा
असम में घरेलू वसूली 47 फीसदी बढ़ी, मणिपुर में 40 और मेघालय में 35 फीसदी। सबसे बड़ा योगदान महाराष्ट्र का रहा — 35,150 करोड़ रुपये।
भारत को क्या मिला
टैक्स का दायरा उन राज्यों तक फैल रहा है जो कभी हाशिये पर थे। यह पैसा सड़क, स्कूल और अस्पताल पर लगता है।
यूपीआई से रोज एक लाख करोड़ का लेनदेन
मुंबई, 2 नवंबर । पहली बार देश के मोबाइल फोन से एक दिन में औसतन एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान हुआ। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई ने 1 नवंबर को अक्टूबर के आंकड़े जारी किए।
इसकी जगह: ब्लिट्ज डेटा कार्ड —
•अक्टूबर में यूपीआई: 2,547 करोड़ लेनदेन · 31.53 लाख करोड़ रुपये ·•रोज 82 करोड़ भुगतान” · स्रोत: एनपीसीआई, 1 नवंबर।
•दोबारा देखने से पहले: एनपीसीआई के न्यूजरूम पर आधिकारिक ग्राफिक देखें।
•अक्टूबर में यूपीआई से 2,547 करोड़ लेनदेन हुए। इनकी कुल रकम 31 लाख 53 हजार करोड़ रुपये रही। पिछले साल के मुकाबले लेनदेन 23 फीसदी और रकम 16 फीसदी बढ़ी।
हिसाब लगाएं तो हर सेकेंड करीब 9,500 भुगतान हुए। एक भुगतान औसतन 1,238 रुपये का रहा। यानी चाय से लेकर राशन तक, रोज की छोटी खरीद अब यूपीआई पर चल रही है।
आगे क्या
बड़े दुकानदारी भुगतानों पर प्रस्तावित शुल्क एनपीसीआई ने दिवाली के बाद तक टाल दिया है। नई तारीख अलग से बताई जाएगी। आम लोगों के आपसी भुगतान मुफ्त रहेंगे।
भारत को क्या मिला
देश में बना भुगतान का ऐसा रास्ता, जिस पर अब रोज का कारोबार चलता है और जिसे दूसरे देश भी अपना रहे हैं।
पंचायतों के लिए 7,395 करोड़ की योजना
नई दिल्ली, 2 नवंबर । देश की ढाई लाख से ज्यादा ग्राम पंचायतों को अब पांच साल की अपनी योजना मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर को प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना को मंजूरी दी। इस पर 7,395.55 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
इसकी जगह: ब्लिट्ज डेटा कार्ड — “7,395 करोड़ · 2.55 लाख पंचायतें · 32 लाख प्रतिनिधि · 2026 से 2031” · स्रोत: केंद्रीय मंत्रिमंडल, 28 अक्टूबर 2026। दोबारा देखने से पहले: योजना शुरू होने पर पंचायती राज मंत्रालय और पीआईबी पर कार्यक्रम की तस्वीर देखें।
योजना 2026-27 से 2030-31 तक चलेगी। इसमें केंद्र 4,869 करोड़ रुपये देगा, यानी करीब दो तिहाई। बाकी 2,526 करोड़ रुपये राज्य देंगे।
हर साल हर पंचायत अपनी विकास योजना ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर बनाएगी। हर साल ऑनलाइन ऑडिट की योजना भी बनेगी। करीब 32 लाख चुने हुए प्रतिनिधियों और कर्मचारियों को ट्रेनिंग मिलेगी।
गांव वालों तक जानकारी पहुंचाने के लिए पंचम नाम का एआई प्लेटफॉर्म इस्तेमाल होगा। यह 17 भारतीय भाषाओं में काम करता है। पंचायतों को अपनी कमाई बढ़ाने और उसका हिसाब रखने में भी मदद मिलेगी।
बराबर बांटें तो हर पंचायत के हिस्से साल में करीब 58 हजार रुपये आते हैं। यह पैसा इमारतों से ज्यादा लोगों और कामकाज के तरीके पर लगेगा।
भारत को क्या मिला
जो पंचायत खुद योजना बनाए, ऑडिट कराए और कमाए, वही हर सरकारी योजना को जमीन पर उतारती है।
त्योहारों में कारों की रिकॉर्ड बिक्री
नई दिल्ली, 2 नवंबर। त्योहारों पर गाड़ियों की खरीद ने कंपनियों के रिकॉर्ड तोड़ दिए। मारुति सुजुकी ने अक्टूबर में कुल 2 लाख 76 हजार 120 गाड़ियां बेचीं। इनमें 49,872 गाड़ियां विदेश भेजी गईं। कंपनी के मुताबिक यह उसका अब तक का सबसे अच्छा महीना रहा।
इसकी जगह: ब्लिट्ज डेटा कार्ड — “अक्टूबर बिक्री:
•मारुति 2.12 लाख · •टाटा 73,894 ·
•महिंद्रा 73,338
•ह्युंडै 62,799”
स्रोत: कंपनियों के आंकड़े, 1 नवंबर 2026। दोबारा देखने से पहले: नवंबर के बीच में आने वाले सियाम के आंकड़े देखें।
•महिंद्रा ने देश में अपनी अब तक की सबसे ज्यादा एसयूवी बेचीं — 73,338।
• किआ की थोक बिक्री भी रिकॉर्ड 33,462 पर पहुंची।
•टाटा मोटर्स ने 14,552 बिजली वाली गाड़ियां बेचीं।
ये आंकड़े कंपनियों से डीलरों तक भेजी गई गाड़ियों के हैं। ग्राहकों तक कितनी पहुंचीं, यह पंजीकरण के आंकड़ों से पता चलेगा।
भारत को क्या मिला
गाड़ियों की बिक्री से इस्पात, टायर और कलपुर्जा बनाने वाले कारखानों में भी काम बढ़ता है। मारुति की करीब हर छठी गाड़ी विदेश जा रही है।
कारखानों ने रफ्तार पकड़ी, उत्पादन 6.7 फीसदी बढ़ा
नई दिल्ली, 2 नवंबर । सितंबर में देश के कारखानों ने अच्छा काम किया। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक 6.7 फीसदी बढ़ा। विनिर्माण 7.6 फीसदी और बिजली 11.2 फीसदी बढ़ी। 28 अक्टूबर को जारी शुरुआती आंकड़ों से यह पता चला।
इसकी जगह: ब्लिट्ज डेटा कार्ड —
• “सितंबर: उत्पादन •+6.7% · मशीनें •+10.4% ·
•बिजली उपकरण +33.9%” ·
स्रोत: आईआईपी, 28 अक्टूबर । दोबारा देखने से पहले: सांख्यिकी मंत्रालय और पीआईबी की आधिकारिक ग्राफिक देखें।
सबसे अहम बात मशीनों की है। दूसरी चीजें बनाने वाली मशीनों यानी कैपिटल गुड्स का उत्पादन 10.4 फीसदी बढ़ा। बिजली उपकरणों का उत्पादन 33.9 फीसदी उछला। गाड़ियों का उत्पादन 19 फीसदी बढ़ा।
खनन में 6.2 फीसदी गिरावट रही। अप्रैल से सितंबर तक कुल उत्पादन 6.8 फीसदी बढ़ा।
भारत को क्या मिला
जब कारखाने मशीनें ज्यादा खरीदते हैं, तो वे आने वाले कल के लिए क्षमता बना रहे होते हैं। इसका मतलब है नया निवेश और नई नौकरियां।
आगे क्या: अक्टूबर के आंकड़े 30 नवंबर को आएंगे।
मुख्य लेख · आसमान से गांव तक: अक्टूबर का हिसाब
नई दिल्ली, 2 नवंबर : पिछले हफ्ते आए सरकारी आंकड़ों को साथ रखकर पढ़ें तो एक ही कहानी दिखती है। देश हर स्तर पर एक साथ बन रहा है — आसमान में, गांव में, कारखाने में और आम आदमी की जेब में।
इसकी जगह: ब्लिट्ज डेटा कार्ड,
चार खाने — •जीएसटी 2.31 लाख करोड़
•यूपीआई 31.53 लाख करोड़
•उत्पादन +6.7% · √सरकारी निवेश 6.55 लाख करोड़”
स्रोत: जीएसटीएन, एनपीसीआई,आईआईपी, सीजीए। दोबारा देखने से पहले: जरूरत नहीं।
आसमान में: 30 अक्टूबर की रात एनवीएस-03 उड़ा
इसमें भारत की बनाई परमाणु घड़ी है। दिशा बताने वाले सिग्नल से ही बिजली ग्रिड और बैंकों का समय मिलता है। जो देश अपनी घड़ी का मालिक है, वह अपने भविष्य का भी मालिक है।
गांव में। मंत्रिमंडल ने ढाई लाख पंचायतों के लिए 7,395 करोड़ रुपये मंजूर किए। पैसा हर गांव के हिसाब से कम है, पर निशाना सही है — योजना, ऑडिट और हिसाब-किताब। यहीं तय होता है कि हर सरकारी रुपया सही जगह पहुंचेगा या नहीं।
कारखाने में। सितंबर में मशीनों का उत्पादन 10.4 फीसदी बढ़ा। यह निवेश का संकेत है, सिर्फ खपत का नहीं।
जेब में। अक्टूबर में जीएसटी 22.9 फीसदी बढ़ा। यूपीआई पर पहली बार रोज औसतन एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का लेनदेन हुआ। असम में जीएसटी 47 फीसदी बढ़ा।
सरकार भी अपना हिस्सा कर रही है। महालेखा नियंत्रक के 30 अक्टूबर के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से सितंबर तक केंद्र ने 6.55 लाख करोड़ रुपये निवेश पर खर्च किए। यह पिछले साल से 13 फीसदी ज्यादा और साल के लक्ष्य का करीब 54 फीसदी है।
दुनिया भी यह देख रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने 13 अक्टूबर को इस साल भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया।
हर आंकड़ा ऊपर नहीं जा रहा। सितंबर में खनन 6.2 फीसदी घटा। इन पर नजर रखनी होगी।
भारत को क्या मिला
: ऐसा विकास जो एकतरफा नहीं, चौतरफा है।
ब्लिट्ज की सलाह
पंचायतों की योजना तभी काम करेगी जब ऑडिट समय पर हों। हर राज्य का ऑडिट पूरा होने का आंकड़ा हर तिमाही ई-ग्रामस्वराज पर दिखे, तो लोग काम देख सकेंगे और काम तेज होगा।
इस स्लॉट की हर खबर 28 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 के बीच जारी मूल दस्तावेजों पर टिकी है: जीएसटीएन, एनपीसीआई, इसरो, केंद्रीय मंत्रिमंडल, आईआईपी और महालेखा नियंत्रक। हर अनुपात डेस्क ने खुद दोबारा जोड़ा है।
निगरानी डेस्क रिपोर्ट
हर खबर में तारीख और स्रोत वाक्य के भीतर है। जीएसटी और आईआईपी के आंकड़े शुरुआती हैं। एक खबर में फोटो है, बाकी में ब्लिट्ज डेटा कार्ड और उसकी वजह दर्ज है।














