ब्लिट्ज ब्यूरो
वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की दोस्ती को याद करते हुए कहा कि यह रिश्ता पद से नहीं, बल्कि विश्वास से बना था। पद बदलते रहे, लेकिन दोनों नेताओं की मित्रता कायम रही। सीएम ने प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के दिन उनके मित्र शिंजो आबे की स्मृति में वाराणसी में रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आबे मेमोरियल कॉरिडोर का लोकार्पण किया। जापान की पूर्व प्रथम महिला और शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे के साथ उन्होंने स्मृति गलियारे का अनावरण किया।
योगी ने इसे प्रधानमंत्री मोदी, 140 करोड़ भारतीयों और उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता की ओर से शिंजो आबे को श्रद्धांजलि बताया। उन्होंने कहा कि जापान ने काशी को रुद्राक्ष दिया और अब काशी उसी रुद्राक्ष में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री की स्मृति को हमेशा के लिए संजो रही है।
2007 में हुई थी मोदी और आबे की पहली मुलाकात
योगी ने बताया कि वर्ष 2007 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी जापान गए थे, जहां उनकी पहली मुलाकात शिंजो आबे से हुई। उसी वर्ष आबे ने भारतीय संसद में भारत और जापान के मजबूत संबंधों की जरूरत पर जोर दिया था। इसके बाद 2014 में काशी-क्योटो पार्टनर सिटी समझौता हुआ और 2015 में शिंजो आबे प्रधानमंत्री मोदी के साथ वाराणसी आए। दोनों नेताओं ने गंगा आरती में हिस्सा लिया। 2017 में अहमदाबाद में दोनों नेताओं ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की आधारशिला रखी। 2018 में आबे ने प्रधानमंत्री मोदी को यामानाशी स्थित अपने निजी आवास पर आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब दो नेताओं की मित्रता दो देशों के बीच विश्वास का आधार बन जाती है तो इतिहास बदलने लगता है।
‘यह प्रोटोकॉल नहीं, रिश्ता था’
योगी ने सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री मोदी के शिंजो आबे को अंतिम विदाई देने जापान पहुंचने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पूरे भारत ने आबे के निधन पर राष्ट्रीय शोक मनाया। मुख्यमंत्री ने कहा, यह प्रोटोकॉल नहीं था, एक रिश्ता था। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई का उल्लेख करते हुए कहा कि आज की दुनिया में बिना लाभ-हानि का हिसाब लगाए साथ खड़ा रहने वाला मित्र मिलना कठिन है। दुनिया अक्सर अपने हित देखकर रिश्ते बनाती है, लेकिन भारत और जापान के संबंध विश्वास पर आधारित हैं।
नोएडा में 500 एकड़ में बनेगी जापानी सिटी
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में करीब 1,400 जापानी कंपनियां काम कर रही हैं और दोनों देशों की साझेदारी अब सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि जापान के पास तकनीक और अनुभव है, जबकि भारत के पास प्रतिभा और युवा ऊर्जा है। इसी साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश में भी जापानी निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है।














