नई दिल्ली, 4 नवंबर। आपकी अपनी भाषा में सवाल समझने और जवाब देने वाला एआई अब देश में ही बना है। इंडियाएआई मिशन के तहत सॉकेट लैब्स ने ईकेए-1 नाम का मॉडल पेश किया है, जो संविधान की आठवीं अनुसूची की सभी 22 भाषाओं और अंग्रेजी में काम करता है।
इंडियाएआई मिशन के तहत ईकेए-1 और धीर मॉडल पेश। धीर बिना इंटरनेट फोन पर भी चलेगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 3 नवंबर को यह जानकारी दी। मंत्रालय के मुताबिक ईकेए-1 में 26.3 अरब पैरामीटर हैं और इसे करीब 7.5 लाख करोड़ टोकन पर तैयार किया गया है। यह गणित, कोडिंग और तर्क वाले कामों के लिए बना है।
फोन पर, बिना इंटरनेट
दूसरी कंपनी जेनटेक ने धीर 2बी और धीर 5बी मॉडल पेश किए हैं। ये 10 भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी में चलते हैं। इनकी खास बात यह है कि ये बिना इंटरनेट, सीधे फोन या कंप्यूटर पर चल सकते हैं।
इसका मतलब है कि आपका डेटा आपके फोन से बाहर नहीं जाएगा। अस्पताल, अदालत और सरकारी दफ्तर जैसी जगहों के लिए यह बड़ी बात है, जहां रिकॉर्ड विदेशी क्लाउड पर नहीं भेजे जा सकते।
“ऐसे स्वदेशी मॉडल भारत की तकनीकी और रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करते हैं,” मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा।
गांव तक पहुंच का रास्ता
देश में करोड़ों लोग अंग्रेजी नहीं बोलते। अब तक के बड़े एआई मॉडल ज्यादातर विदेश में और अंग्रेजी को ध्यान में रखकर बने हैं। अपनी भाषा में चलने वाला खुला मॉडल किसान सलाह, बैंकिंग और सरकारी सेवाओं को गांव तक पहुंचा सकता है।
ये मॉडल ओपन हैं, यानी देश के स्टार्टअप इन पर अपने ऐप बना सकेंगे। इसके लिए उन्हें विदेशी कंपनियों को मोटी फीस नहीं देनी पड़ेगी।
भारत को क्या मिला
अपनी भाषाओं में, अपने देश में बना एआई, जिस पर डेटा देश में ही रहे।
एक नजर में
•ईकेए-1 : 26.3 अरब पैरामीटर · करीब 7.5 लाख करोड़ टोकन · 22 भारतीय भाषाएं और अंग्रेजी
•धीर 2बी और 5बी : 10 भारतीय भाषाएं और अंग्रेजी · बिना इंटरनेट चलने वाले
हमारा हिसाब
ईकेए-1 के हर पैरामीटर पर करीब 285 टोकन का प्रशिक्षण (7.5 लाख करोड़ ÷ 26.3 अरब)।
भारत को क्या मिला
अपनी भाषा में अपना एआई।
ब्लिट्ज की सराहना
इंडियाएआई मिशन, सॉकेट लैब्स और जेनटेक की टीमें।
आंकड़े इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की रिलीज (पीआईबी, 3 नवंबर 2026) से; pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज की सलाह
राज्य सरकारें अपनी भाषा की हेल्पलाइन और किसान सलाह सेवाओं में इन देसी मॉडलों का परीक्षण करें, तो इनका फायदा सबसे पहले गांव तक पहुंचेगा।
सौर गठबंधन की कमान फिर भारत को
नई दिल्ली, 4 नवंबर। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) की अध्यक्षता लगातार तीसरी बार भारत को मिली है। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 3 नवंबर को भारत मंडपम में गठबंधन की नौवीं सभा में यह एलान किया। फ्रांस फिर सह-अध्यक्ष चुना गया है।
तीसरी बार अध्यक्ष चुना गया; ओडिशा में 1.17 लाख करोड़ के करार।
भारत और फ्रांस ने 2015 में यह गठबंधन शुरू किया था। अब इससे 130 देश जुड़े हैं। इसका मुख्यालय गुरुग्राम में है।
इसी मौके पर ओडिशा ने 18 करार किए, जिनमें 1.17 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने यह जानकारी दी। गठबंधन ने 30 लाख किसानों तक सोलर पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा है।
भारत को क्या मिला
दुनिया के सोलर मंच पर अगुवाई, और राज्यों में साफ ऊर्जा का निवेश।
रेल ने अक्टूबर में ढोया सबसे ज्यादा माल
नई दिल्ली, 4 नवंबर। खेतों से मंडी और गोदाम तक अनाज पहुंचाने में इस बार रेल ने बड़ी भूमिका निभाई है। अक्टूबर में रेल से अनाज की ढुलाई पिछले साल के मुकाबले 26.3 फीसदी बढ़ी।
अनाज की ढुलाई 26% बढ़ी, 64.72 करोड़ यात्री।
रेल मंत्रालय ने 4 नवंबर को बताया कि अक्टूबर में कुल 14.51 करोड़ टन माल ढोया गया। यह किसी भी अक्टूबर में अब तक का सबसे ज्यादा है और पिछले साल से 8.32 फीसदी ज्यादा है।
बिजलीघरों तक रोज औसतन 469.8 रेक कोयला पहुंचा, जो 19.5 फीसदी ज्यादा है। अक्टूबर में 64.72 करोड़ लोगों ने ट्रेन से सफर किया।
भारत को क्या मिला
सस्ती ढुलाई, और सर्दी से पहले बिजलीघरों में भरपूर कोयला।
कमजोर पड़ा चक्रवात मुरासु
अमरावती, 4 नवंबर। आंध्र प्रदेश के तट से टकराने के बाद चक्रवात मुरासु कमजोर होकर गहरे दबाव में बदल गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के 4 नवंबर रात 2:30 बजे के बुलेटिन के मुताबिक हवा की रफ्तार 55 से 65 किमी प्रति घंटा रह गई है।
आंध्र में एनडीआरएफ की 14 टीमें तैनात।
तूफान 3 नवंबर तड़के ओंगोल के पास तट से टकराया था। डीडी न्यूज के मुताबिक राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की 14 टीमें आंध्र में तैनात की गईं। किसी की जान जाने की खबर नहीं है। 15 जिलों में फसलों को नुकसान हुआ है।
मछुआरों को आंध्र तट पर समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।
भारत को क्या मिला
समय पर चेतावनी और तैयारी, जिससे तूफान में जान बचाई जा सकी।
दवा के हर बैच की होगी जांच
नई दिल्ली, 4 नवंबर।बाजार में आने वाली दवा के हर बैच पर अब एक योग्य जानकार की मंजूरी जरूरी हो सकती है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 3 नवंबर को औषधि नियम, 1945 में बदलाव का मसौदा जारी किया है।
दवा नियमों में बदलाव का मसौदा जारी।
मसौदे के मुताबिक दवा बनाने वाली कंपनियों को एक योग्य और अनुभवी व्यक्ति नियुक्त करना होगा। वही हर बैच को बाजार में भेजने की मंजूरी देगा। हर बैच का रिकॉर्ड रखना होगा और तय फॉर्मेट में प्रमाणपत्र देना होगा।
मंत्रालय के मुताबिक इसका मकसद दवा बनाने की प्रक्रिया में जवाबदेही मजबूत करना है। लोग ईमेल से अपनी राय भेज सकते हैं।
भारत को क्या मिला
मरीज के हाथ तक पहुंचने वाली दवा पर ज्यादा भरोसा।
रक्षा निर्यात 56 गुना बढ़ा
नई दिल्ली, 4 नवंबर। कभी हथियार खरीदने वाला भारत अब बेच भी रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 3 नवंबर को बताया कि 2025-26 में देश का रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये रहा। 2013-14 में यह करीब 686 करोड़ रुपये था। न्यूज ऑन एयर ने यह जानकारी दी।
ब्लिट्ज के हिसाब से यह 56 गुना की बढ़त है। रक्षा मंत्री ने कहा कि अब युद्ध अंतरिक्ष, साइबर और डिजिटल दुनिया तक फैल गया है।
2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये के हथियार विदेश गए।
भारत को क्या मिला
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देसी रक्षा उद्योग को विदेश से कमाई, और कारखानों में रोजगार।
पुरी में बनेगा अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल
पुरी, 4 नवंबर। जगन्नाथ धाम पुरी में अब समुद्री क्रूज से भी सैलानी पहुंच सकेंगे। पारादीप बंदरगाह प्राधिकरण और ओडिशा सरकार मिलकर पुरी में करीब 1,500 करोड़ रुपये का अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल बनाएंगे।
करीब 1,500 करोड़ रुपये की लागत।
बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने 3 नवंबर को पुरी में हुई बैठक के बाद यह जानकारी दी। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने की। ओडिशा के राष्ट्रीय जलमार्ग-5 पर 13,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो रहे हैं।
सरकार चाहती है कि 2047 तक देश के माल ढुलाई में समुद्र और नदी के रास्ते का हिस्सा 6 से बढ़कर 12 फीसदी हो जाए।
भारत को क्या मिला
तीर्थ और पर्यटन से रोजगार, और सस्ती माल ढुलाई।
विदेश सचिव काठमांडू में
काठमांडू, 4 नवंबर। विदेश सचिव विक्रम मिस्री 4 नवंबर को दो दिन के दौरे पर काठमांडू पहुंचे। उन्होंने नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राई से बातचीत की और विदेश मंत्री शिशिर खनाल से मुलाकात की। काठमांडू पोस्ट ने यह जानकारी दी।
नेपाल के प्रधानमंत्री के भारत दौरे की तैयारी।
यह दौरा नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की भारत यात्रा की तैयारी माना जा रहा है। खबरों के मुताबिक यह यात्रा नवंबर के आखिर में हो सकती है। दोनों देशों ने अभी तारीख तय नहीं की है।
भारत को क्या मिला
उस पड़ोसी से रिश्ते मजबूत, जिसकी नदियां, बिजली और व्यापार भारत से जुड़े हैं।
यूरोप से व्यापार समझौता दिसंबर में
नई दिल्ली, 4 नवंबर 2026 : यूरोपीय संघ के 27 देशों के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता दिसंबर में हस्ताक्षर के लिए तय है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 2 नवंबर को यह जानकारी दी। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने ब्रसेल्स में यूरोपीय आयोग के अधिकारियों से सीमा शुल्क और समझौते को लागू करने पर बात की।
सीमा शुल्क की तैयारी पर ब्रसेल्स में बात।
उन्होंने बेल्जियम के एंटवर्प में हीरा कारोबारियों से भी मुलाकात की। सूरत के हीरा उद्योग के लिए एंटवर्प बड़ा बाजार है।
भारत को क्या मिला
: यूरोप के बड़े बाजार में भारतीय सामान के लिए सस्ता रास्ता।
अंटार्कटिका का पानी हो रहा खारा
बेंगलुरु, 4 नवंबर। दक्षिणी महासागर में पानी की एक बड़ी परत दशकों से मीठी होती जा रही थी। अब करीब 2015 से यह उलटकर खारी और भारी होने लगी है। भारतीय विज्ञान संस्थान के वायुमंडलीय और समुद्री विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया है।
आईआईएससी के अध्ययन में हिंद महासागर तक पहुंचने वाली समुद्री परत में बदलाव।
यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय जर्नल नेचर क्लाइमेट चेंज में छपा है। आईआईएससी ने 28 अक्टूबर 2026 को इसकी जानकारी दी। संस्थान के मुताबिक इस परत का खारापन हर दशक करीब 0.0048 ग्राम प्रति किलो बढ़ रहा है।
वजह यह है कि अंटार्कटिका की समुद्री बर्फ घटी है, इसलिए पिघलकर आने वाला मीठा पानी भी कम हुआ है। खारा और भारी पानी ऊपर के पानी से जल्दी घुलता है। इससे समुद्र में जमा कार्बन हवा में जल्दी लौट सकता है।
“ये पानी की परतें ध्रुवीय समुद्र को उष्णकटिबंधीय समुद्र से जोड़ती हैं,” अध्ययन की अगुवाई करने वाले शोधार्थी कौशिक मिश्रा ने कहा। एसोसिएट प्रोफेसर बिशाखदत्त गायेन ने बताया कि टीम ने शुरुआत हिंद महासागर में इस पानी के बहाव को समझने से की थी।
भारत को क्या मिला
भारतीय वैज्ञानिक उस समुद्र को पढ़ रहे हैं, जो हमारे मानसून और मौसम पर असर डालता है।
ब्लिट्ज की सलाह
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय हिंद महासागर में भारत के अपने आर्गो फ्लोट से इस परत पर नजर रखे, तो मौसम के अनुमान और बेहतर होंगे।
मध्य प्रदेश में नल से जल
भोपाल, 4 नवंबर। मध्य प्रदेश के गांवों में 60.9 लाख घरों तक जल जीवन मिशन से नल पहुंच गया है। नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की 2026 की रिपोर्ट संख्या 5 के मुताबिक 9 दिसंबर 2024 तक 60,90,033 घरों में नल लगे। यह रिपोर्ट 22 जुलाई 2026 को राज्य विधानसभा में रखी गई।
सीएजी रिपोर्ट : 60.9 लाख घरों तक पहुंचा नल, 37 लाख बाकी।
मिशन शुरू होने के समय जिन घरों में नल नहीं था, उनमें से करीब 62 फीसदी तक पानी पहुंच गया। करीब 37 लाख घरों में अब भी नल का इंतजार है।
खर्च भी तेजी से बढ़ा। 2019-20 में राज्य ने 615 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जो 2023-24 में बढ़कर 12,779 करोड़ रुपये हो गए।
कहां रह गई कमी
सीएजी के मुताबिक कई गांवों को जोड़ने वाली बड़ी योजनाएं पीछे रहीं। सितंबर 2024 तक 147 में से 39 ही पूरी हुईं। सिंगरौली, छतरपुर और सतना जैसे जिलों में नल वाले घर 38 से 41 फीसदी ही थे।
राज्य केंद्र के हिस्से के 9,297 करोड़ रुपये नहीं ले पाया। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने 13 जून 2025 की बैठक में CAG की सिफारिशें मान लीं। विभाग ने कहा कि देरी पर ठेकेदारों से जुर्माना वसूला जाएगा।
सुधार का रास्ता
सीएजी ने नलों पर इंटरनेट से निगरानी, पानी जांचने वाली प्रयोगशालाओं को मान्यता और गांव की जल समितियों को सक्रिय करने की सलाह दी है। रिपोर्ट के मुताबिक ग्वालियर और नर्मदापुरम में गांवों की कार्य योजनाएं पूरी तैयार थीं।
भारत को क्या मिला
बाकी 37 लाख घरों तक नल पहुंचाने का साफ रास्ता, जिसे सरकार ने मान लिया है।
ब्लिट्ज़ की सलाह
जिलेवार ऑनलाइन सूची बने कि किस गांव में कब तक नल लगेगा, तो लोगों को भरोसा और काम को रफ्तार मिलेगी।














