नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेल दिन-प्रतिदिन नया अवतार ले रही है। पिछले 10 वर्षों में ‘स्पीड, स्केल और सेफ्टी’ के साथ भारतीय रेलवे ने विकास के नए आयाम छुए हैं। दुनिया की पहली सबसे बड़ी हाइड्रोज ट्रेन क शुभारंभहुआ है। 130+ वंदे भारत ट्रेनें देश की रफ्तार और आधुनिक यात्रा का नया चेहरा बनी हैं। 1,340+ अमृत भारत स्टेशन्स को विश्वस्तरीय एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं के साथ उनका कायाकल्प किया गया है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख शहरों को जोड़ने वाले प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली और लखनऊ के बीच यात्रा का समय घटकर लगभग दो घंटे हो सकता है, जबकि राष्ट्रीय राजधानी से पटना की यात्रा में लगभग 4.5 घंटे लग सकते हैं।
नेपालगंज रोड-नानपारा-बहराइच सेक्शन पर नई बदली और बिजली वाली ब्रॉड-गेज रेल लाइन के उद्घाटन के दौरान वैष्णव ने कहा कि प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर दिल्ली को आगरा, कानपुर, लखनऊ, वाराणसी और पटना से जोड़ेगा।
प्रस्तावित प्रोजेक्ट के तहत, दिल्ली और आगरा के बीच 200 किमी की दूरी तय करने में अनुमानित समय 58 मिनट होगा। दिल्ली से कानपुर (455 किमी) की यात्रा में 1 घंटा 50 मिनट लगेंगे।
रेलवे का 99% से अधिक विद्युतीकरण हुआ है जिससे रेलवे इको-फ्रेंडली और हरित भविष्य की ओर बढ़ी है। ₹2.52 लाख करोड़ के बजट, रिकॉर्ड निवेश के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर का अभूतपूर्व विकास हुआ है। गति, प्रगति और आत्मनिर्भरता की यह नई पहचान आधुनिक भारत के संकल्प को सिद्ध कर रही है।
प्रस्तावित बुलेट ट्रेन दिल्ली और प्रयागराज के बीच 750 किमी की दूरी तीन घंटे में तय करेगी, जबकि वाराणसी की 945 किमी की यात्रा में लगभग 3 घंटे 33 मिनट लगेंगे। दिल्ली और पटना के बीच 1,170 किमी की यात्रा में लगभग 4.5 घंटे लगेंगे।
वैष्णव ने कहा, अगर यह प्रोजेक्ट साकार होता है, तो यह मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के बाद देश का अगला बुलेट ट्रेन कॉरिडोर होगा और राष्ट्रीय राजधानी को उत्तर प्रदेश और बिहार के कई शहरों से जोड़ने वाला पहला कॉरिडोर होगा।
प्रस्तावित कॉरिडोर से रोजाना यात्रा करने वालों को राहत मिलने और दिल्ली-यूपी-बिहार बेल्ट में पर्यटन, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिसमें आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और पटना जैसे धार्मिक पर्यटन केंद्र भी शामिल हैं।
फिलहाल, भारतीय रेलवे नेटवर्क पर सबसे ज़्यादा डिजाइन स्पीड लगभग 180 किमी प्रति घंटा है, जो वंदे भारत जैसी सेमी-हाई-स्पीड सेवाओं से हासिल की जाती है।
देश की पहली हाई-स्पीड रेल सर्विस अगस्त 2027 में शुरू होने की उम्मीद है, जिसका पहला सेक्शन सूरत और वापी के बीच खुलेगा।
इससे पहले वैष्णव ने कहा कि भारत अपने सेमीकंडक्टर प्रोग्राम के दूसरे चरण में एक लाख और सेमीकंडक्टर इंजीनियर तैयार करेगा, क्योंकि सरकार देश के टैलेंट पूल को मज़बूत करने और एक पूरा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बनाने की कोशिश कर रही है। सेमिकॉन 2.0 के लॉन्च के बाद मंत्री ने कहा कि यह पहल न सिर्फ सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पर, बल्कि टैलेंट डेवलपमेंट, चिप डिज़ाइन, इक्विपमेंट, मटीरियल, एडवांस्ड पैकेजिंग और रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर भी फोकस करेगी।
अब हमने एक लाख और इंजीनियर तैयार करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने आगे कहा कि यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि 2032 तक ग्लोबल सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में लगभग दस लाख (1 मिलियन) वर्करों की कमी होने की उम्मीद है।
| कहां से कहां तक | दूरी | समय |
|---|---|---|
| दिल्ली – आगरा | 200 किमी | 58 मिनट |
| दिल्ली – कानपुर | 455 किमी | 1.45 घंटे |
| दिल्ली – लखनऊ | 525 किमी | 2.12 घंटे |
| दिल्ली – प्रयागराज | 750 किमी | 3 घंटे |
| दिल्ली – वाराणसी | 950 किमी | 3.30 घंटे |
| दिल्ली – पटना | 1170 किमी | 4.30 घंटे |














