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एआई गीगाफैक्ट्री के भीतर होता क्या है?

एआई गीगा फैक्टरियों के संचालन से जुड़ी एक बड़ी चुनौती भी है। एआई आधारित कंप्यूटिंग के लिए भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है और इससे अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होती है।

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 24, 2026
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यूरोप की 7 AI गीगाफैक्टरियां: अमेरिका-चीन को टक्कर देने की EU की बड़ी योजना

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) गीगाफैक्ट्री एक विशाल, अत्याधुनिक और विशेष रूप से निर्मित कंप्यूटिंग केंद्र है जहां बड़े पैमाने पर उन्नत एआई मॉडल विकसित किए जाते हैं, उन्हें प्रशिक्षित किया जाता है, और अधिक सक्षम बनाया जाता है तथा विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग के लिए तैयार किया जाता है।

सामान्य कारखानों में जहां भौतिक वस्तुओं का उत्पादन होता है, वहीं एआई गीगाफैक्ट्री का मुख्य उत्पाद उन्नत एआई मॉडल और एआई आधारित डिजिटल सेवाएं होती हैं। दूसरे शब्दों में, यहां मशीनें या उपभोक्ता वस्तुं नहीं, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नई क्षमताएं विकसित की जाती हैं।
ऐसी गीगाफैक्टरियों में आमतौर पर हजारों अत्यधिक शक्तिशाली एआई चिप्स (जीपीयू और अन्य विशेष एआई प्रोसेसर) स्थापित होते हैं। इनका निर्माण मुख्य रूप से एनवीडिया, एएमडी जैसी दुनिया की अग्रणी प्रौद्योगिकी कंपनियां करती हैं।

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इन केंद्रों में उच्च क्षमता वाले सर्वर, अति-तेज डेटा नेटवर्क, विशाल डेटा भंडारण प्रणाली और अत्यंत सुरक्षित क्लाउड अवसंरचना उपलब्ध होती है। इसके माध्यम से शोधकर्ता, स्टार्टअप, उद्योग और प्रौद्योगिकी कंपनियां दुनिया के किसी भी हिस्से से इस विशाल कंप्यूटिंग क्षमता का दूरस्थ रूप से उपयोग कर सकती हैं।

हालांकि, एआई गिगाफैक्ट्रियों के संचालन से जुड़ी एक बड़ी चुनौती भी है। एआई आधारित कंप्यूटिंग के लिए भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है और इससे अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होती है। इसलिए इन केंद्रों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति के साथ अत्याधुनिक और उच्च क्षमता वाली शीतलन (कूलिंग) प्रणाली की भी आवश्यकता होती है।

यही कारण है कि एआई गिगाफैक्ट्रियों की ऊर्जा खपत, बिजली की बढ़ती मांग और पर्यावरण पर उनके प्रभाव को लेकर आज पूरी दुनिया में गंभीर चर्चा हो रही है। जैसे-जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विस्तार तेज़ी से हो रहा है, वैसे-वैसे ऊर्जा-कुशल, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल गीगाफैक्टरियों का विकास वैश्विक प्राथमिकता बनता जा रहा है।

एआई क्षेत्र में बढ़त बनाने के लिए यूरोप का बड़ा दांव

अमेरिका और चीन को टक्कर देने के लिए यूरोपीय संघ सात एआई गीगाफैक्टरियां स्थापित करेगा

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में अमेरिका और चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का मुकाबला करने के लिए यूरोपीय संघ (ईयू) ने एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत यूरोपीय संघ सात अत्याधुनिक एआई गीगाफैक्टरियोंं की स्थापना के लिए 10 अरब यूरो (लगभग 11.4 अरब अमेरिकी डॉलर) का सार्वजनिक निवेश करेगा। यह जानकारी गत 30 जुलाई को एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट में दी गई है।

यूरोपीय आयोग का अनुमान है कि इस सरकारी निवेश के आधार पर निजी क्षेत्र से भी 20 अरब यूरो (लगभग 22.8 अरब अमेरिकी डॉलर) का अतिरिक्त निवेश आकर्षित किया जा सकेगा।

यूरोपीय आयोग में तकनीकी संप्रभुता (टेक्नोलॉजिकल सॉवरेनिटी) की जिम्मेदारी संभाल रहीं कार्यकारी उपाध्यक्ष हेन्ना विरक्कुनेन ने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास अभूतपूर्व गति से हो रहा है। ऐसे में एआई गीगाफैक्टरियों के माध्यम से उपलब्ध विशाल कंप्यूटिंग क्षमता तक पहुंच यूरोप के लिए अब एक रणनीतिक आवश्यकता बन गई है।”

तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में यूरोप का बड़ा कदम

ब्रुसेल्स लंबे समय से यूरोप को प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास कर रहा है। अब इन प्रयासों में और तेजी आ गई है क्योंकि यूरोपीय नेताओं का मानना है कि विदेशी तकनीकों पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में यूरोप के हितों के खिलाफ दबाव का साधन बन सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार यूरोपीय संघ के तकनीकी नियमों की आलोचना कर चुके हैं जबकि चीन ने एआई उद्योग के लिए आवश्यक कुछ महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति पर नियंत्रण लगा दिया है।

एक लाख से अधिक अत्याधुनिक एआई चिप्स से लैस होंगी गीगाफैक्टरियों

यूरोपीय संघ ने अब इन गीगाफैक्टरियों के निर्माण के लिए कंपनियों से निविदाएं (बिड्स) आमंत्रित की हैं।

प्रत्येक गीगाफैक्ट्री में कम-से-कम एक लाख अत्याधुनिक एआई चिप्स लगाए जाएंगे। इनकी कंप्यूटिंग क्षमता वर्तमान में यूरोपीय संघ में संचालित डेटा सेंटरों की तुलना में लगभग चार गुना अधिक होगी।

फिलहाल यूरोपीय संघ के पास फिनलैंड से स्पेन तक फैले 19 एआई डेटा सेंटरों का नेटवर्क है। नई सात गीगाफैक्टरियां शुरू होने के बाद यूरोप की कुल कंप्यूटिंग क्षमता दोगुने से भी अधिक हो जाएगी।

एआई के क्षेत्र में अमेरिका और चीन अभी भी आगे

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा वर्ष 2025 में किए गए आकलन के अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में यूरोप अभी भी अमेरिका और चीन से पीछे है।

चीन के पास डेटा सेंटरों के लिए विशाल विद्युत उत्पादन क्षमता उपलब्ध है जबकि निजी क्षेत्र से एआई में सबसे अधिक निवेश अमेरिका आकर्षित कर रहा है। दूसरी ओर, यूरोप में डेटा सेंटरों के लिए आवश्यक लाखों इलेक्ट्रॉनिक घटकों का उत्पादन अभी सीमित है। इसके अलावा, यूरोप में बिजली की लागत अमेरिका और चीन की तुलना में दो से तीन गुना अधिक है। यह जानकारी यूरोपीय आयोग द्वारा जून में यूरोपीय संसद के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट में दी गई थी।

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मिस्ट्रल का प्रयास, लेकिन प्रतिस्पर्धा अभी भी कठिन

फ्रांस की मिस्ट्रल एआई फिलहाल पेरिस स्थित अपने परिसर में यूरोपीय संघ के सबसे बड़े एआई डेटा सेंटरों में से एक का संचालन कर रही है।
मिस्ट्रल ने ‘ले चैट’ नामक चैटबॉट विकसित किया है लेकिन वह अभी तक अमेरिका की ओपनएआई के चैटजीपीटी और चीन की डीपसीक जैसी अग्रणी कंपनियों की बराबरी नहीं कर सकी है।

गोपनीयता और अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़ती चिंताएं

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सहित यूरोप के कई नेताओं ने चिंता व्यक्त की है कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकने वाली स्वदेशी एआई कंपनियों की यूरोप में अभी भी कमी है। इसके साथ ही एआई के तेजी से बढ़ते उपयोग का रोजगार, अर्थव्यवस्था और नागरिकों की व्यक्तिगत गोपनीयता पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर भी पूरे यूरोप में गंभीर बहस चल रही है।

डेटा सुरक्षा और नैतिक मानकों का सख्त पालन

यूरोपीय आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन गीगाफैक्टरियों में विकसित होने वाली सभी एआई सेवाएं और उत्पाद डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, सुरक्षा मानकों और नैतिक मूल्यों से जुड़े यूरोपीय संघ के सभी नियमों का पूरी तरह पालन करेंगे। इसके लिए डिजिटल सर्विसेज एक्ट और डिजिटल मार्केट्स एक्ट जैसे महत्वपूर्ण कानूनों को लागू किया जाएगा।

डेटा सेंटरों के पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर वैश्विक चिंता

जून महीने में दुनिया के 40 शहरों के महापौरों ने एक संयुक्त समझौते पर हस्ताक्षर कर एआई डेटा सेंटरों के निर्माण से प्राकृतिक संसाधनों, बिजली की कीमतों और शहरों के जलवायु लक्ष्यों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को सीमित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस पहल में अमेरिका के फीनिक्स, ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न सहित दुनिया के कई प्रमुख शहर शामिल हुए।

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